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शौचालय के नाम पर तीन लाख परिवारों को नागरिक अधिकारों से वंचित करने की साजिश : माकपा

रायपुऱ।  मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने स्वच्छता और शौचालय के नाम पर प्रदेश के तीन लाख परिवारों को नागरिक अधिकारों से वंचित करने का आरोप केन्द्र और प्रदेश की भाजपा सरकारों पर लगाया है.

यहां जारी एक बयान में माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने खुले में शौच करने वालों को बीपीएल श्रेणी से बाहर करने, उन पर जुर्माना थोपने तथा उन्हें मनरेगा और राशन से वंचित करने के फरमान को सरासर ‘गैर-कानूनी’ बताते हुए कहा है कि यह फरमान ऐसे समय जारी किया गया है, जब आंगनबाड़ी और स्कूलों सहित हजारों सरकारी भवन बगैर शौचालयों के ही संचालित हो रहे हैं. इस तरह यह फरमान न केवल गरीबों का मजाक उड़ाता है, बल्कि उनके आत्मसम्मान को भी ठेस पहुंचाता है.
शौचालय निर्माण के नाम पर फर्जीवाड़ा
माकपा नेता ने आरोप लगाया कि शौचालय निर्माण के नाम पर प्रदेश में जो फर्जीवाड़ा किया जा रहा है, उसकी कीमत पिछले चार दिनों में पांच बच्चों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी है. यह सरकार की गंदी सोच ही है कि गरीबों के लिए भोजन और रोजगार का प्रबंध करने के बजाये वह उनके ‘शौच’ पर नज़र रख रही है.

उन्होंने कहा कि शौचालय के नाम पर इस प्रदेश के दो-तिहाई दलितों, आदिवासियों व वंचितों को पहले ही चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है और अब इन फरमानों से ऐसा लगता है कि उन्हें नागरिक अधिकारों से भी वंचित करने की योजना बनाई जा रही है.
इससे स्पष्ट है कि मोदी सरकार जिस विकास का दावा कर रही है, उसमें गरीबों विशेषकर आदिवासी-दलितों के लिए कोई जगह ही नहीं है.
माकपा ने भाजपा सरकार से अपने गरीब विरोधी फरमानों को वापस लेने की मांग करते हुए शौचालय निर्माण और स्वच्छ भारत योजना में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की है. माकपा ने पांचों मृत बच्चों के पीड़ित परिवारों को भी 5-5 लाख रुपयों की सहायता देने की मांग की है.

 

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