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सत्ता पाने के लिये शीर्षासन

रणधीर सिंह सुमन
आरएसएस के अनुवांशिक संगठन भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आने के लिये पुरजोर कोशिश कर रही है। इसके लिये कॉर्पोरेट सेक्टर द्वारा जनित चेहरा नरेंद्र मोदी का है। नरेंद्र मोदी ने कॉर्पोरेट सेक्टर के इशारे पर भाजपा के पुराने नेताओं को अप्रासंगिक घोषित कर उनको अलग-थलग करने का कार्य बड़ी तेजी से किया है। इसमें काफी हद तक उन्हें सफलता भी मिली है। लाल कृष्ण अडवाणी को अपनी मनचाही सीट से लड़ने नहीं दिया तो जसवंत सिंह जैसे नेताओं को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ने के लिये मजबूर कर दिया।  लाल जी टंडन, केसरीनाथ त्रिपाठी, कल्याण सिंह जैसे सैकड़ों दिग्गज नेताओं को चुनाव मैदान से बाहर कर दिया है। टिकट वितरण में रुपया, गुटबाजी, जिस्मफरोशीका भी योगदान रहा है। जिसका एक उद्धरण यह भी है टिकट के लिये भाजपा नेता ने अपनी बेटी को बेचा, दामाद ने की हत्या।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली के निकट साहिबाबाद में भाजपा नेता धर्मवीर चौधरी की उन्हीं के दामाद ने गोली मारकर हत्या कर दी। गिरफ्तार आरोपी ने बताया कि मृत नेता अपनी बेटी को दूसरे नेताओं के साथ सोने के लिये मजबूर करते थे। साहिबाबाद के रहने वाले धर्मवीर चौधरी पार्टी के वार्ड अध्यक्ष भी थे। उन्हें गोली मारने के बाद दामाद सुनील ने साहिबाबाद थाने में जाकर सरेंडर कर दिया। आरोपी ने बताया कि उसकी शादी 18 साल पहले मृत नेता की बेटी से हुई थी। लेकिन पिछले 8 महीने से मेरी बीवी मेरे साथ ना रहकर अपने पिता के घर में रहने लगी थी। पिता ने मेरी पत्नी को जबरदस्ती अपने घर में रखा हुआ था। वह पार्टी की ओर से टिकट पाने के लालच में नेताओं को अपनी बेटी और मेरी पत्नी को उनके घरों में गंदे काम के लिये भेजा करता था। इलाके में रसूख होने के कारण कोई इससे उलझना नहीं चाहता था। मैं अपने ससुर की इन हरकतों से बहुत परेशान हो गया था, इस कारण आज मैंने उसे गोली मार दी। पुलिस ने बताया कि सुनील की 4 लड़कियां और 2 लड़के हैं।
इस तरह के कितने उदहारण मिल सकते हैं यह जांच का विषय है। वहीँ पर भाजपा ने अपने पुरानी पीढ़ी के नेताओं को बेइज्जत कर वाणी से पूरी तरह पंगु बना दिया है। वहीँ, सत्तारूढ़ दल के पुराने नेताओं को राजनीतिक लाभ के लिये इस्तेमाल करना प्रारम्भ किया है। स्वप्नदर्शी नेहरू को इस वजह से भी बदनाम किया जा रहा है कि उनसे जुड़े हुए लोग सत्ता पर काबिज हैं। दूसरे के पितामह को अपना पितामह घोषित करना और अपने पितामह को बेइज्जत करना इस चुनाव की मुख्य विशेषता भी है। जनसत्ता ने लिखा है “आज देश में संघ परिवार और उसके ‘शो ब्वॉय’ नरेंद्र मोदी, सरदार पटेल के कंधे का इस्तेमाल करते हुए नेहरू के चरित्र पर अवांछित हमले कर रहे हैं। उनकी राय में जवाहरलाल ने लोकतंत्र, समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता जैसे सिद्धांतों को भारतीय संविधान में गूंथ कर कोई अपराध कर दिया है। यह संयोग है कि नेहरू के उत्तराधिकारी लगातार भारतीय राजनीति के केंद्र में रहे हैं। जिस विचारधारा ने आजादी की लड़ाई में खुद को महफूज रखा, वह इस बात से खौफजदा है कि नेहरू-गांधी परिवार राजनीति के शिखर पर कब तक काबिज रहेगा। इसलिये उसने कांग्रेस के सभी हिंदुत्व समर्थक नेताओं को अपने पूर्वज होने का प्रमाणपत्र जारी कर दिया है।”
  यह सब इसलिये हो रहा है कि गुजरात में टाटा से लेकर सभी प्रमुख उद्योगपतियों को एक तरह से निःशुल्क जमीन दी गयी है। प्राकृतिक सम्पदाओं  उपहार स्वरूप सौंपा गया है।  बैंक ऋण एक तरह से ब्याज मुक्त है इसलिये उस लाभ को पूरे देश में प्राप्त करने के लिये नरेंद्र मोदी को मीडिया द्वारा प्रचारित किया जा रहा है कि वह विकास पुरुष हैं और एक मिथ्या लहर कि बात कही जा रही है। हाँ यह जरूर है कि मीडिया एक सम्मोहन की स्थिति पैदा कर रही है कि मत देने तक मतदाता भ्रमित रहे। और उस भ्रम का लाभ नरेंद्र मोदी को हो और पूरे देश में कॉर्पोरेट सेक्टर को मुक्त लूट का अवसर मिल सके।

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