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सत्ता से बाहर कर देंगे सत्ता के बल पर आवाज़ दबाने वालों को- राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल

धारा 341 से लगी धार्मिक प्रतिबन्ध को हटाने की मांग को लेकर राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के आंदोलन का आठवां दिन
  नई दिल्ली। राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के तत्वावधान में बीती 17 फरवरी से संविधान के धारा 341 , 10  अगस्त 1950 को तत्कालीन कार्यवाहक केंद्र सरकार द्वारा एक कथित अवैधानिक अध्यादेश के माध्यम से लगाये गए धार्मिक प्रतिबन्ध को समाप्त किये जाने की माँग को लेकर चलाये जा रहे आंदोलन मिशन 341 के तहत दिल्ली में जंतर मंतर पर धरने के आठवां रोज़ कौंसिल के कार्यकर्ताओ ने जबर्दस्त प्रदर्शन करते हुए केंद्र सरकार एवं दिल्ली प्रशासन को आड़े हाथो लिया।
वक्ताओं ने कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी एवं उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि यह लोग सत्ता के बल पर लोकतान्त्रिक ढंग से धारा 341 में लगी धार्मिक प्रतिबन्ध के विरुद्ध उठाई जारही आवाज़ को दबा देना चाहते हैं।
कौंसिल के मीडिया प्रभारी डॉ. निजामुद्दीन खान ने बताया कि कल इस मुद्दे को लेकर सोनिया गांधी के घर पर प्रदार्शन करने जा रहे थे जिस पर दिल्ली प्रशासन ने  सोनिया गांधी के आवास दस जनपथ के आसपास धारा 144 लगा  कर पार्लियामेंट थाने के पास रोक दिया था। अपनी मांगों को लेकर सरकार के ऊपर दबाव बनाने के लिए कौंसिल ने 23 फरवरी को सोनिया गांधी, 24 फरवरी को राहुल गांधी के आवास और 25 फरवरी को कांग्रेस पार्टी के कार्यालय पे प्रदर्शन करने की घोषणा की थी।
इस अवसर पर प्रदर्शन कारियों को सम्बोधित करते हुये कौंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी मदनी ने धारा 341 में धार्मिक प्रतिबन्ध लगाने के लिए 10 अगस्त 1950 को पंडित जवाहर लाल नेहरू की तत्कालीन कार्यवाहक केंद्र सरकार द्वारा लाये गए अध्यादेश संविधान अनुसूचित जाति आदेश 1950  की वैधता पर प्रश्नचिह लगाते हुए कहा यह दमन कारी अन्याय पूर्ण एवं संविधान विरोधी अध्यादेश उस सरकार द्वारा लगाया गया था/ जो एक कार्यवाहक सरकार थी, जिसका गठन न तो संविधान में सरकारों के गठन के लिए किये गए प्राविधानों के तहत हुआ था और न ही जनता द्वारा चुनी थी और न ही उसी इस प्रकार का प्रस्ताव पारित करने का अधिकार था जो संविधान की मर्यादाओ के विपरीत हो। उन्होंने कहा कि यूं तो संविधान की मर्यादाओं और उसकी मूलभूत धारणाओं की सुरक्षा एवं देश की एकता एवं अखंडता एवं सांप्रदायिक  सौहार्द की सुरक्षा का  शपथ लेकर गठित सरकारों द्वारा आये  दिन संविधान की मर्यादाओं और उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने का का काम  होता रहता है लेकिन संविधान की धारा 341 में दिए  गए दलित समाज को आरक्षण के अधिकार से धर्म के आधार पर मुस्लिम एवं इससे  दलितों को आरक्षण के अधिकार  से वंचित कर देने वाला अध्यादेश भारत  के धर्म निरपेक्ष  स्वरूप पर गहरा वार है, जिसके लिए कांग्रेस पार्टी और उसकी सरकारे पूर्ण रूप से जिम्मेदार  है । उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी धारा 341 के सम्बन्ध  में सत्ता के बल पर जिस प्रकार हमारी आवाज़  को दबाना चाहती हैं उससे  साफ़ जाहिर है कि न तो वह स्वयम् सच्चाई  को सुनना चाहती हैं और न ही सच्चाई को देश की जनता के सामने आने  देना चाहती हैं। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि सत्ता के बल पर हमारी आवाज़  दबाने वालों को हम सत्ता से बाहर कर देंगे। अपने पूर्ण घोषित कार्यक्रम  के अनुसार बड़ी संख्या में राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के कार्यकर्ताओ ने जबर्दस्त प्रदर्शन करते हुए राहुल गांधी के आवास  के और मार्च किया लेकिन प्रशासन ने भारी पुलिस  बल लगा कर प्रदर्शन कारियों को राहुल गांधी के घर तक  पहुँचने  से रोक दिया। प्रदर्शन में  राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के आंदोलन को विभिन्न राजनैतिक एवं सामाजिक संगठनो की ओर से व्यापक समर्थन दिखाई पड़ रहा है। अब अब तक दर्ज़नो संगठन धरने में सम्मलित होकर अपने समर्थन की घोषणा कर चुके हैं। आज यूनाइटेड मुस्लिम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व  सांसद डॉ० एजाज़ अली एवं आल इण्डिया जमीयत इस्लामी के राष्ट्रीय महा सचिव मुफ़्ती अफ़रोज़ आलम क़ासमी  ने भी धरने में पूर्ण समर्थन की घोषणा की।
धरने में मुख्य रूप से कौंसिल के युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुक्तदा हुसैन खैरी मिस्बाही तमिलनाडू के प्रदेश अध्यक्ष के० एम्० नूरुद्दीन अतीक़ महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष सय्यद नूरुद्दीन आफताब मुम्बई अध्यक्ष हाजी  नूर मोहम्मद असम वेस्ट बंगाल झारखण्ड डॉ० इज़हार आरज़ू युवा नेता अनिल सिंह दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष एस० एम्० नूरुल्लाह  उत्तर  प्रदेश के संगठन मंत्री डॉ० ज़फर आलम  सहित सैकड़ो ने मांगकी। आज क्रमिक अनशन  पर नूरुल हुदा बैठे हैं।

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