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सपा के स्टार प्रचारक बने अखिलेश, सोने का भी नहीं है वक्त

दिनेश शाक्य
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आजकल बहुत व्यस्त हैं। आखिर वो हों भी क्यों न…वह समाजवादी पार्टी के सबसे बड़े स्टार कैंपेनर जो हैं और साथ ही पार्टी की चुनाव प्रचार अभियान समिति के मुख्य रणनीतिकार भी। जब से उन्होंने लोकसभा चुनाव के लिये प्रचार शुरू किया है तब से लेकर अब तक वह करीब 55 चुनावी जनसभाओं को सम्बोधित कर चुके हैं। वह रोजना तीन से चार चुनावी रैलियों को सम्बोधित करते हैं। उनका लक्ष्य है उत्तर प्रदेश के हर लोकसभा क्षेत्र में कम से कम दो रैलियों को सम्बोधित करना क्योंकि समाजवादी पार्टी का सारा दारोमदार उत्तर प्रदेश पर ही है। इसका मतलब है कि उन्हें चुनाव के दौरान अकेले उत्तर प्रदेश में ही कम से कम 160 रैलियों को सम्बोधित करना है। वह उत्तर प्रदेश के अलावा दूसरे राज्यों में भी जाकर सपा उम्मीदवारों के लिये प्रचार कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव एसआरएस यादव के पास अखिलेश यादव की रैलियों के लिये बड़ी संख्या में रोजाना पार्टी के उम्मीदवारों की तरफ से अनुरोध आ रहे हैं।
अखिलेश यादव की रैलियों की कवरेज से साफ़ नजर आया कि जब से उन्होंने प्रचार शुरू किया है तब से वह बमुश्किल चार घंटे की नींद ले रहे हैं। दूसरे राजनेता जहां चुनावी रैलियों से फुर्सत मिलते ही थकान मिटाने के लिये हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर में झपकी लेने लगते हैं अखिलेश यादव दिन में बिल्कुल नहीं सोते हैं। उनके साथ साये की तरह रहने वाले सुरक्षा अधिकारी शिवकुमार कहते हैं, मुख्यमंत्री जी दिन में सोना तो दूर झपकी भी नहीं लेते हैं। वह घर से निकलते समय अपने साथ जरूरी फाइलों को रख लेते हैं। रैलियों को सम्बोधित करने के बाद जैसे ही हेलीकॉप्टर या हवाई जहाज में बैठते हैं, फाइलों को निपटाने लगते हैं। उनके अंदर आलस नाम की कोई चीज नहीं है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सुबह पांच बजे उठ जाते हैं। खुद को चुस्त-दुरुस्त और दिन भर तरोताजा बनाए रखने के लिये तकरीबन एक घंटे तक पसीना बहाते हैं। मुख्यरूप से वह साइकिलिंग, योग और प्राणायाम करते हैं। इसके बाद वह अखबार पढ़ते हैं और अगर किसी जिले में कोई बड़ी वारदात वगैरह हुयी होती है तो वहां के डीएम और एसपी से बात करके उन्हें जरूरी निर्देश देते हैं।
इसके बाद वह अपनी पत्नी डिम्पल यादव यादव के साथ घर-परिवार के मसलों पर चर्चा करते हैं। इस दौरान वह डिम्पल यादव यादव से उनके चुनाव को लेकर भी चर्चा करते हैं। डिम्पल यादव कन्नौज लोकसभा सीट से दोबारा चुनाव लड़ रही हैं। मुख्यमंत्री कन्नौज में डिम्पल यादव के चुनाव का काम देख रहे मुख्यमंत्री के गजेंद्र सिंह से फोन पर बात करने के बाद उन्हें जरूरी दिशा-निर्देश भी देते हैं। इसके साथ ही वह मैनपुरी और फिरोजाबाद में सपा उम्मीदवारों के चुनाव की जानकारी भी लेते हैं। मैनपुरी से जहां उनके पिता और समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव चुनाव लड़ रहे हैं वहीं फिरोजाबाद से उनके चचेरे भाई अक्षय यादव चुनावी समर में किस्मत आजमा रहे हैं। इसके बाद वह पार्टी के 10-15 उम्मीदवारों को खुद फोन मिलाकर सीधे उनसे बात करते हैं। मुख्यमंत्री थोड़ी देर अपने तीनों बच्चों अर्जुन, तान्या और टीना के साथ खेलते हैं। वे बच्चों की शिकायतों को भी सुनते हैं। तीनों बच्चों की अक्सर यही शिकायत होती है कि वे उन्हें कहीं घुमाने नहीं ले जाते हैं।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पूरी तरह तैयार होकर घर में ही बने अपने कार्यालय में पहुंचते हैं। यहां पर उनके विशेष कार्याधिकारी जैनेन्द्र (नीटू) उन्हें एक पर्चा पकड़ाते हैं। इस पर्चे में उन लोगों के नाम दर्ज होते हैं जो मुख्यमंत्री से बात करना चाहते हैं या फिर उनसे मिलना चाहते हैं। वे पर्चे को देखने के बाद कुछ लोगों से बात कराने को कहते हैं और कुछ लोगों को अगले दिन सुबह मिलने के लिये बुलाने को कहते हैं। इस बीच उन्होंने जिन लोगों को मिलने के लिये बुलाया होता है उन सभी से एक-एक करके मिलते हैं। मुलाकातियों के जाने के बाद वे सपा के चुनावी वॉर रूम में एयर विंग का कामकाज देख रहे प्रदीप कपूर और अपने विशेष कार्याधिकारी आशीष यादव (सोनू) से बात करते हैं। अगर जरूरी होता है तो वे आशीष यादव को घर पर बुला लेते हैं।
पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक अगर कोई पत्रकार उनकी चुनावी रैलियों की कवरेज के लिये उनके साथ जाने वाला होता है तो वे उसे अपने ऑफिस में बुलाकर उससे बातचीत करते हैं। घर से निकलने से पहले वह एक बार फिर अपनी पत्नी डिम्पल यादव को बुलाकर उनसे मिलते हैं।
डिम्पल यादव अपने मुख्यमंत्री पति के खान-पान का पूरा ख्याल रखती हैं। वह अपनी निगरानी में मुख्यमंत्री के खाने-पीने का सामान एक बड़ी टोकरी में रखवाती हैं। खाने-पीने के सामान में सूखे मेवे, भुने बादाम, घर पर ताजे फलों से निकाला हुआ जूस, वेजीटेबल सैंडविच और उबला हुआ पानी होता है। मुख्यमंत्री को अगर हवाई जहाज से जाना होता है तो उनका काफिला अमौसी एयरपोर्ट की ओर बढ़ता है और अगर हेलीकॉप्टर से जाना होता है तो ला मार्टीनियर कॉलेज के ग्राउंड की ओर।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव समय के बहुत पाबंद हैं। जिस ऑगस्टा ग्रैंड हेलीकॉप्टर से वह चुनाव प्रचार कर रहे हैं वह रैली स्थलों पर समय से पहुंच जाता है। वे अभी तक अपनी किसी भी रैली में आधे घंटे से ज्यादा देरी से नहीं पहुंचे हैं। बरेली में एक दिन चुनावी रैली के बाद जब एक टीवी न्यूज चैनल के बड़े पत्रकार ने उन्हें हैलीपैड पर रोक कर उनसे इन्टरव्यू लेना चाहा तो उन्होंने उस पत्रकार के महज तीन सवालों के जवाब दिए और आगे बढ़ गए। हेलीकॉप्टर में बैठते ही पॉयलट से सवाल किया- क्यों, हम कितना लेट हो गए। पॉयलट ने बताया कि वह तय कार्यक्रम से 20 मिनट लेट चल रहे हैं। उन्होंने अगली सभा में पहुंचते ही सीधे माइक थामा और बोलना शुरू कर दिया। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत में ही लोगों से जनसभा में देरी से पहुंचने के लिये माफी मांगी।
समाजवादी पार्टी ने इस बार लोकसभा चुनाव में किसी भी फिल्मी सितारे को प्रचार के लिये आमंत्रित नहीं किया है। जया बच्चन सपा से राज्यसभा की सांसद हैं लेकिन अभी तक पार्टी ने उन्हें कहीं पर भी प्रचार के लिये नहीं कहा है।
सपा के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी कहते हैं, फिल्मी सितारों को देखने के लिये भले ही लोगों की भीड़ जुट जाए, लेकिन उनके कहने से जनता वोट नहीं देती है। नेताजी (मुलायम सिंह यादव) और अखिलेश यादव के आगे किसी फिल्मी सितारे की कोई औकात नहीं है। हमारी पार्टी के नेता ही असली हीरो हैं।
अखिलेश यादव अपनी रैलियों में औसतन 22 से 25 मिनट का भाषण देते हैं। वह लोगों के सामने अपनी सरकार के कामकाज की उपलब्धियां गिनाने के साथ ही बसपा प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री पर हमला बोलते हैं। वह लोगों को बताते हैं कि बसपा के शासन में हुये घोटालों और भ्रष्टाचार की वजह से राज्य विकास की दौड़ में बहुत पीछे चला गया है। वह भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधने के साथ ही उसके पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष भी करते हैं।
हापुड़ के असौढ़ा गांव में हुयी अखिलेश यादव की रैली में आए स्कूल मास्टर चौधरी राम सेवक कहते हैं, अखिलेश भाषण अच्छा देते हैं। उनका फोकस सिर्फ राज्य सरकार की उपलब्धियों और विकास पर होता है। वे किसी पर निजी हमला नहीं करते हैं। वह अपने भाषणों में कहीं पर भी मर्यादा का उल्लंघन नहीं करते हैं।
लखनऊ में दैनिक हिन्दुस्तान के स्टेट हेड रंजीव कहते हैं, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सभ्य और शालीन हैं। अभी तक उन्होंने अपने किसी भी भाषण में ऐसी कोई बात नहीं कही है जो किसी को बुरी लगी हो। उनके भाषणों में न तो कोई हल्की बात होती है और न ही वे किसी पर कोई व्यक्तिगत आरोप या आक्षेप लगाते हैं। नरेंद्र मोदी ने जबसे अपने हलफनामे में पत्नी जशोदाबेन का जिक्र किया है उन पर जबर्दस्त हमले हो रहे हैं। लेकिन अखिलेश यादव ने इस मामले पर कहीं कुछ नहीं कहा।
दिन भर में तीन से चार चुनावी रैलियों को निपटाकर जब वे लखनऊ वापस लौटते हैं तो उनके चेहरे पर न तो कोई तनाव होता है न ही थकान झलकती है। घर लौटकर वह सीधे अपने ऑफिस में जाते हैं। जरूरी कामकाज निपटाते हैं। जिन लोगों को मिलने के लिये बुलाया होता है उनसे मुलाकात करते हैं। कोई जरूरी काम होने पर वह पार्टी कार्यालय भी जाते हैं। शाम सात बजे के आसपास वह सपा प्रमुख और अपने पिताजी मुलायम सिंह यादव से मिलते हैं और चुनाव को लेकर चर्चा करते हैं।
इन बैठकों से फुर्सत मिलते ही अखिलेश यादव अगले दिन की तैयारियों में जुट जाते हैं। जिन लोकसभा क्षेत्रों में उनका कार्यक्रम होता है वे वहां के स्थानीय नेताओं से बात करते हैं। वह सोशल मीडिया फेसबुक और ट्विटर पर भी सक्रिय हैं। वह बीच-बीच में अपने चुनावी दौरों की जानकारी सोशल मीडिया पर भी देते रहते हैं।
जनादेश न्यूज़ नेटवर्क

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