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समझौता परमाणु विकास या कि विनाश का …

ऐ मेरे वतन के लोगों,  जरा आंख में भर लो पानी कि पच्चीस हजार मौतों की नींव पर बसा है यह सीमेंट का  हसीन ख्वाबगाह हिंदू हिंदुस्तान का!

भव्य राममंदिर बनायेंगे लेकिन सीता मइया की रसोई को उपवास है।
माफ करना मेरे दोस्तों, मैं वह नन्हा सा खरगोश हूं जिसे दिख रहा है कि आसमान गिर रहा है और गिरते हुए आसमान को थामने के लिए मैं सरपटदौड़ रहा हूं। जबकि बाकी लोगों के लिए नीला आसमान पिघलता हुआ विकासगाथा का प्रेमपगा पनाहगार है।
जब नंदीग्राम में नरसंहार हुआ था तो पूंजीपरस्त वाम के खिलाफ हम सड़क पर थे। जब नागरिकता संशोधन विधेयक 2003 में वाम समर्थन से पूर्वी बंगाल के अनार्य हिंदू शरणार्थियों के रंगभेदी देशनिकाला का सबब बना तो वामपंथ के विश्वासघात पर मैंने लिखना शुरु किया। वामपंथ से उस दिन से मैं खारिज हूं।
अब अंबेडकरी मित्रों की बारी हैं कि वे मुझे खारिज करें कि अंबेडकरी दुकानदारी के खिलाफ मेरी जंग है कि अंबेडकर को विष्णु भगवान का अवतार मानने से साफ मेरा इंकार है और अंबेडकर के अंध अनुयायियों के देश काल परिस्थितियों से एकदम बेखबर होने के खिलाफ मैं बोल रहा हूं। लिख भी रहा हूं।
अब अंबेडकरी मित्र भी मुझसे मुंह चुराने लगे हैं।
मैं कोई शरणस्थल खोज नहीं रहा हूं, हालांकि जनमजात शरणार्थी हूं। जनमा हूं शरणार्थी बनकर तो मरना है शरणार्थी बनकर। बाकी सारा कुछ निमित्तमात्र है। थोड़ा पढ़ लिख गया। पत्रकारिता की नौकरी मिली ठैरी तो थोड़ी जान पहचान हो गयी ठैरी।
बाकी मैं बसंतीपुर का वही बच्चा हूं जो बचपन में कड़ाके की सर्दी में मिले हुए काला कोट चबाकर खा जाता रहा है और जिसकी नाक से गंगा जमुना बहती रही है। जेसके पांव धन के खेतो में गढ़े हुए थे और अब जब कंप्यूटर पर बैठा हूं तो भी उसी धान के खेत में धंसा हूं और देह मेरी माटी और गोबर है।
मैं आज भी उतना ही वामपंथी हू जितना कि मैं अंबेडकरी हूं आज भी।
मैं विचारधारा के खिलाफ नहीं हूं।
विचारधारा के बिजनेस के विरुद्ध हूं।
मैं जनांदोलन के कारोबार के खिलाफ हूं।
जनभावनाओं से खिलवाड़ के खिलाफ हूं।
सपनों के सौदागरों और मौत की तिजारत के खिलाफ हूं।
मैं आज भी उतना ही वामपंथी हूं जितना कि मैं अंबेडकरी हूं आज भी।
स्त्री उत्पीड़क पुरुष वर्चस्व के खिलाफ मेहनतकश जनता के हक में खड़ा हूं मैं।
अत्याचारियों की नंगी तलवारों में जब तक बहती रहेगी खून की नदियां, तब तक मुझे माटी और गोबर के इस मोर्चे से छुट्टी नहीं मिलने वाली है।
मैं सत्ता समीकरण के खिलाफ हूं। नस्ली रंगभेद के खिलाफ है लड़ाई मेरी।
अकेला हूं और मेरे साथ कोई कारवां या काफिला नहीं है।
फिर भी आदत से सच कहने लिखने को मजबूर हूं, दोस्तों कि माफ करना कि आप देख ही नही रहे हैं कि कयामत शुरु हो गयी है और सर पर जो आसमान है, वहां कोई मुहब्बत की महजबीं नहीं है।
वह आसमान टूटकर गिर रहा है।
कि कयामत चालू आहे।
गणतंत्र दिवस परेड में बाराक ओबामा महाशय और अपने कल्कि अवतार सुदामाकृष्ण जुगलबंदी से जो संगीतबद्ध समां बांध रहे हैं, वह दरअसल कयामत की दस्तक है।
ऐ मेरे वतन के लोगों, थोड़ा आंखों में भर लो पानी कि पच्चीस हजार मौतों की नींव पर बसा है यह सीमेंट का  हसीन ख्वाबगाह हिंदू हिंदुस्तान का !
वारेन एंडरसन की आत्मा को शांति मिल गयी होगी कि आखिर डाउ कैमिकल्स के वकील को भारी कामयाबी मिल गयी है और भोपाल गैस त्रासदियां दोहराने और उस मानवताविरोधी कयामती जुल्मोसितम का गुनाहगार कोई नहीं होगा और न पच्चीस हजार मौतों का रोना रोते हुए कोई विकास बुलेट के सामने सीना तानकर फिर कहेगा कि भोपाल के लिए न्याय चाहिए।
कारपोरेट वकील अरुण जेटली की बेमिसाल कामयाबी कहिए कि भूत भविष्य वर्तमान में किसी अमेरिकी कंपनी के खिलाफ किसी पारमाणविक औद्योगिक दुर्घटना का कोई मुकदमा इस दुनिया की सरजमीं या फलक में कहीं न दर्ज होगा और न फिर कभी किसी गैस पीड़ित की किसी अदालत में सुनवाई होगी।
परेड और ताजमहल देखने भारत आनेवाले अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को कोस रहा था जो अमेरिकी मीडिया, वह गार्डन गार्डन है और गणतंत्र दिवस पर सैन्य राष्ट्र के शक्ति प्रदर्शन से बरसात की फुहारों के बीच अपनी हार रही क्रिकेट टीम की भीगी भीगी प्रेमकथा के बीच सर्दियों में वसंत बहार जो है, उसका असली किस्सा एक कारपोरेट वकील की यशोगाथा है, जिसपर भविष्य में कारपोरेट पुराण लिखा जायेगा।
हमने नारे सुने हैं अनेक।
मसलनः जयहिंद। दिल्ली चलो।
इंक्लाब। भारतमाता की जय।
मसलनःगरीबी हटाओ।
मसलनःराम की सौगंध खाते हैं, मंदिर वही बनायेंगे।
मसलन जय जवान जय किसान।
डाउ कैमिकल्स के वकील अरुण जेटली ने देश को नया नारा दिया हैः कम्प्लीट प्राइवेटाइजेशन। संपूर्ण निजीकरण।
जो कहत रहल बाड़न, कि चाकरी करै तो कर सरकारी या बेच फिर तरकारी।
जो बुद्धिमान पिता षोडसी कन्या के खातिर चतुर्थ श्रेणी के बुढ़ऊ चाकर सरकारी चाकर खोजै आउर लाखौंलाख दहेज के साथ कन्या विदा करके तर जाये कन्या का जीवन नर्क बनाइके, अब उनर का होई, सोच बै, चैतू कि अब सरकारी चाकरी नाही।
कम्प्लीट प्राइवेटेआइजेशन। संपूर्ण निजीकरण चालू आहे।
ई तेजबत्ती टार्चवाला तो अंधियारा का जबरदस्त कारोबारी दीखै बै चैतू।
यह पीपीपी का मेकिंग इन और इन्नोवेशन है।
यह विनिवेश और प्रत्यक्ष विदेशी पूंजी निवेश, अबाध पूंजी प्रवाह और विकास का सार है।
ऐ मेरे वतन के लोगों, थोड़ा आंखों में भर लो पानी कि पच्चीस हजार मौतों की नींव पर बसा है यह सीमेंट का  हसीन ख्वाबगाह हिंदू हिंदुस्तान का !
टीवी चैनल सैकड़ों हजारों रातदिन चौबीसों घंटा बागों में बहार है।
अखबारों में रंगीन चीखों का अनंत सिलसिला है।
कल से खबर चल रही है कि नया इतिहास रच दिया है कृष्ण सुदामा उत्तरआधुनिक बंधुत्व ने कि वसंत बहार है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अब अमेरिकी है और भारत भी अमेरिका भयो रे।
उस इतिहास के दो चार पन्ने तो खेल कर बांच दिये होते।
नरेंद्र भाई ने बाराक को गले लगाया।
सरकारी समारोहों में अमेरिकी फर्स्ट लेडी नहीं गयीं। भारतीय लेडी जो लापता हैं।
नरेंद्र भाई ने ओबामा से बाराक बाराक कहा तो बाराक भी गदगदायमान होकर नमो नमो रटने लगे।
नमो ने बाराक को गले लगाया।
बाराक ने नमो को गले लगाया।
फर्स्ट लेडी किसे गले लगाती?
खड़ी रही स्टेच्यु जइसन।
सुजाता सिंह विदेश सचिव रहबे करि।
रहबे करि सलामी ठोंक पूजा पाठक विंग कमांडरो।
कि स्त्री सशक्तीकरण है कि बेटी बचाओ की गुहार है लेकिन फिर भी सीता मइया का वनवास है।
भव्य राममंदिर बनायेंगे लेकिन सीता मइया की रसोई को उपवास है।
BBC Hindi
गणतंत्र दिवस के जश्न के बीच जसोदाबेन- ‘मुझे वहां होना चाहिए पर साहेब ने नहीं बुलाया.’ http://bbc.in/1C52JwS
और वो कुतवा ने तो हद कर दी।
ससुरा कुतवा अमेरिकी बा कि देशी, उसका बाइट साइट दे देत जइसन सिनेमा मा कुतवा का रोल जबर होत है।
कथे जात चैतू, बै। देखा नहीं घोंघियन आंखि से कि कइसन रेड कार्पेट में तब्दील हो गइलन अपना सुदामा जी डिजाइनर कुर्ता मा आउर जो लिडिया रहिन, उनर स्कर्टवा भी देसी है। साड़ी न पहना तो का, वो ईसाई भी बाड़न आउर मध्य नामो हुसैन बा। डालर स बड़का का धर्म का,  धर्मांतरण का।
डालर लेडा  लेडी दुनो हिंदुत्व के झंडेवरदार बन गई रहलन।
त ससुरा कुतवा ने मजा खराब कर दीहिस कि आगरा एक्सप्रेस मा लोगन से थूकवा चटवा कर चाकचौबंद बंदोबस्त कर दिहिस कि ताज की झांकी पेश कर दी जाये जिस राजपथ की परेड में शामिल ना करबे सकै।
वो ससुरा सबसे जो तेल धनी रहलनबाडा़, वो गुजर गइलन।
ई इमर्जिंग मार्केटमा अमितवा, भागवतवा, प्रवीणवा, तमाम तमाम संत संतवा,  बाबावा, बाबिवा, खुदे नमो नमो, कारपोरेट वकील डाउ कैमिकल्स के खासमखास अरुण जेटली जइसन सिपाहसालार बाड़न जिनके हाथों हिंदी हिदू हिंदुस्तान सबै डालर महमहाये तो काहे वक्त खराब करैंं, जात बाड़न परेड से फारिग होइके।
बाकीर इतिहास तो अमेरिकी कंपनियों और इंडिया इंक का है।
गलती हो गइलन। कुतवा का भी आधार कार्ड होइबे चाहि।
उकर भी बायोमैट्रिक डाटा चाहि।
बाप मोर, का मस्त गडबडझाला हो गइलन रे चैतू कि ससुर कुतवा रेड कारपेटपर बाराक भइया और मिसेल भौजी की सुरक्षा तार तार करिके दौड़ गइलन।
कुतवा के पेट मा आरडीएक्स रहतो तो का हो जात, सोच बे।
के कुतवा ससुर कुतवा बम रहिस तो का होत, सोच बे।
ड्रोन के हवाले रहा देश।
गाइडेड मिसाइल, गाइडेड बुलेट, अंतरिक्ष में निगरानी प्रणाली और चप्पे चरप्पे पर सीआईए, मोसाद आउर एफबीआई।
फिर भी निराधार कुतवा की ये मजाल के मोदी जो फर्राटे से कार्पेटवा पर दौड़त रही कारों बीच बिछ बिछ जाय रहे, उनरका झांसा दे दौड़ि गयो और दावा रहिस कि परिंदा भी पर ना मर सकै।
चैतु, परिंदों के बारे में सोच मत, कुतवा के बारे में सोच।
सोच, कि कुतवा ने का इतिहास रच दिहिस।
चाय पर चर्चा कुतवा चरचा हो गइलन बै चैतू।
दुइ दिन होई गवा। कृष्ण सुदामा लाइव है।
सेकंड दर सेकंड न्यूज ब्रेकिंग है।
टीवी तोड़ एंकर सगरे सुंदर सुंदरियां मुंहजोर हैं।
कारगिल से कच्छ तक कारपोरेटलाबिइंग विशेषज्ञ सगरे हैं तो पेइड न्यूज वाले भी कम ना टरटरायो है।
कुलि खबर ह कि इतिहास रच दियो रे इतिहास रच दियो।
का का उखाड़ लिहिस खेतवा मा, कछु कहत नाही।
फोटू फोटू आउरो फोटू सेल्फी मात कर दीहिस।
का का उखाड़ लिहिस खेतवा मा, कछु कहत नाही।
ससुरे जो असल भागवतकथा डाउ कैमिकल्स है, सो ना बांचै कोई।
जो असल विजेता है जेटली भाई, सो ना कहै कोई।
ऐ मेरे वतन के लोगों, थोड़ा आंखों में भर लो पानी कि पच्चीस हजार मौतों की नींव पर बसा है यह सीमेंट का  हसीन ख्वाबगाह हिंदू हिंदुस्तान का !
कुल जमा समझौता परमाणु विकास या कि विनाश का होइबै करै हो, उकर सार कि अमेरिकवा से तमाम हथियार, तमाम परमाणु चूल्हा वगैरह ले लिहिस नमो ने कि मेकिंग इन के तहत अमेरिकी कंपनियां कल कारखाने लगवायेंगे।
पर्यावरण, भूमि अधिग्रहण, खनन कानून, पांचवा छठां अनुसूची , बीमा कानून सबै कुछ अमेरिकी कंपनियों को समर्पित। स्वतंत्रता, संप्रभुता, लोकतंत्र, संविधान समर्पित।
जल जंगल जमीन अमेरिकी कंपनियों को समर्पित।
हवाएं और पानियां, आसमान और अंतरिक्ष, रण मरुस्थल और हिमालयभी अमेरिकी हो गइलन।
तमाम ग्लेशियर अमेरिकी।
हीकर देश के हीरक राजा का राजकाज परमाणु हो गइलन।
अब विकास परमाणु है तो परमाणु है विनाश भी।
कुल जमा समझौता परमाणु विकास या कि विनाश का होइबै करै हो, देस की जो पांच बड़ी सरकारी बीमा कंपनियां हैं, उनकी पूंजी से बीमा पुल बर रहलिस कि उमा से शारदा फर्जीवाड़ा के भुक्तभोगियों को मिलल रहल मुआवजा बतर्ज मुआवजा सरकारी फंड से, जनता की बीमा रकम से भुगतान करेक चाहि।
अमेरिकी कंपनियों की जम्मेदारी खतम बा।
भारत में बीबीसी के संपादक हमारे दिनेशपुर से अठारह मील दूर किछा के राजेश जोशी हैं। तो सलमान रवि के सात एक अच्छी खासी टीम भी है। जिनके साथ जुड़े हैं, जनसत्ता में कभी हमारे सहकर्मी भाई रहे प्रमोद मल्लिक भी। प्रमोद मल्लिक को बधाई के साथ भोपाल गैस त्रासदी की यह खबर पेश है कि ऐ मेरे वतन के लोगों, थोड़ा आंखों में भर लो पानी कि पच्चीस हजार मौतों की नींव पर बसा है यह सीमेंट का हसीन ख्वाबगाह हिंदू हिंदुस्तान का !
http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/12/141201_bhopal_gas_tragedy_series_01_rns?SThisFB#share-tools

Dear @PMOIndia @BarackObama pl call 8088255533 to listen to #MannKiBaat of victims n survivors of Bhopal Gas Disaster pic.twitter.com/k3mlz1hQoC

— NAPM India (@napmindia) January 25, 2015
पलाश विश्वास

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