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Janeshwar Mishra

समाजवादी आन्दोलन व चिंतन की पाठशाला है छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र

know more about Jnaneshwar Mishra | Politics Blog | जानिए छोटे लोहिया की कहानी

जनेश्वर मिश्र (Janeshwar Mishra) समाजवादी आन्दोलन के एक योद्धा व विचारक के रूप में सदैव याद किये जायेंगे। ५ अगस्त,१९३३ को श्रीमती बासमती एवं श्री रंजीत मिश्र के पुत्र रूप में बलिया जनपद के शुभ नाथहि गाँव में जन्मे जनेश्वर मिश्र पर तत्कालीन ब्रितानिया हुकूमत के खिलाफ चल रहे जन संघर्ष का गहरा असर पड़ा। हिंदुस्तान प्रजातान्त्रिक समाजवादी संघ ने समाजवाद की अवधारणा (Concept of socialism) को भारत भूमि के युवा मष्तिष्क में जगह बना दी थी। शचीन्द्र नाथ सान्याल, चन्द्र शेखर आजाद, भगत सिंह, राज गुरु, सुख देव सहित तमाम क्रांतिकारियों के आजादी के लिए संघर्ष, समाज के प्रति सोच व बलिदान ने भारत के जन मानस को आक्रोशित कर रखा था। इस क्रांति की बेला में ब्रितानिया हुकूमत के अन्याय के खिलाफ चल रहे संघर्ष के दौर में जन्म लेने वाले जनेश्वर मिश्र के व्यक्तित्व (Personality of Janeshwar Mishra) में अन्याय, अत्याचार, शोषण, छुआ -छुत, भेद-भाव व पूंजीवाद के खिलाफ संघर्ष कूट कूट के भरा था।

लोक नायक जय प्रकाश नारायण, डॉ राम मनोहर लोहिया के व्यक्तित्व का गहरा प्रभाव विद्यार्थी जीवन में जनेश्वर मिश्र पर पड़ा।

जय प्रकाश नारायण के सर्वोदय आन्दोलन में चले जाने के बाद जब लोहिया ने समाजवादी आन्दोलन व संघर्ष की कमान संभाली तब से जनेश्वर मिश्र पूरी तरह से डॉ लोहिया के ही साथ हो लिए। डॉ लोहिया के निजी सचिव की जिम्मेदारी के साथ साथ जनेश्वर मिश्र ने १९६१ में समाजवादी युवजन सभा के महामंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाली।

१९६२ में फूलपुर लोकसभा के चुनाव में जवाहर लाल नेहरू के मुकाबिल डॉ लोहिया के चुनाव संचालन की जिम्मेदारी जनेश्वर मिश्र ने ही संभाली थी। इस चुनाव में जनेश्वर मिश्र के रणनीतिक कौशल के कारण डॉ लोहिया ने ४५ बूथों पर नेहरु को परास्त किया, यद्यपि यह चुनाव डॉ लोहिया हार गये। इस चुनाव के कारण १९६३ में डिफेंस ऑफ़ इंडिया एक्ट के तहत जनेश्वर मिश्र को नज़र बंद किया गया।

डॉ. राम मनोहर लोहिया के अनुयायी के रूप में जनेश्वर मिश्र इतने मशहूर हो गये कि १९६९ में फूलपुर लोक सभा के उप चुनाव में फूलपुर के लोगों ने नारा दिया — लोहिया को तो जिता ना सके, छोटे लोहिया को जिताएंगे। इस प्रकार जनेश्वर मिश्र को छोटे लोहिया की उपाधि से विभूषित करने का श्रेय फूलपुर की सम्मानित जनता को जाता है।

यह वह दौर था जब समाजवादी युवजन सभा के नेता के तौर पर जनेश्वर मिश्र का दबदबा कायम हो चुका था। उत्तर भारत के युवाओं के आकर्षण के केंद्र बिंदु बन चुके जनेश्वर मिश्र के संघर्ष व विचारों के प्रति समर्पण के कारण ही समाजवादी पुरोधा डॉ राम मनोहर लोहिया ने कहा था– समता, समानता, अहिंसा, लोक तंत्र और समाज वाद यह पांचो भारत की समग्र राजनीति के अंतिम लक्ष्य है। इन्हें जनेश्वर जैसे वैचारिक प्रतिबद्धता वाले संकल्प के धनी युवा ही सत्याग्रह के रास्ते पर चल कर प्राप्त कर सकते हैं। जनेश्वर में संगठन की अकूत क्षमता है। वह विश्वसनीय और जुझारू है, समाजवाद की लड़ाई के लिए ऐसे नौजवानों को आगे आना जरूरी है। उसके मन में ताकत के बल पर शोषक बने लोगों के प्रति क्रोध और गरीबों, पीड़ितों, कमजोरों के लिए अथाह करुणा है। उसमें प्रतिभा है और दबे-कुचले वर्ग की बेहतरी के लिए बड़ा काम करने की सदिच्छा भी, ये दोनों  बातें विरले लोगों में मिलती हैं।

छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र ने डॉ लोहिया के एक एक शब्द को, अपने ऊपर किये गये हर विश्वास को ता ज़िदगी बखूबी जिया व पूरा किया। समाजवादी आन्दोलन के योद्धा जनेश्वर मिश्र का महती योगदान वैचारिक दृढ़ता के रूप में हमारे सामने है।

डॉ लोहिया के विचारों को आत्मसात किये छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र ने तमाम युवाओ को समाजवादी संघर्ष व विचार से जोड़ा तथा राजनीतिक सक्रियता प्रदान की। डॉ लोहिया के विचारों के लिए संघर्ष करने वाले लोक बंधु राज नारायण को भी जनेश्वर मिश्र अपना नेता मानते थे।

प्रखर वक्ता जनेश्वर मिश्र उर्फ़ छोटे लोहिया को समाजवाद की चलती फिरती पाठशाला बताते हुये समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि आज से लगभग 43 वर्ष पूर्व मैं जनेश्वर मिश्र जी के संपर्क में आया था, तब से जब तक वो सशरीर रहे, एक शिक्षक व अभिभावक की तरह हमारा मार्ग दर्शन करते रहे। उनका दिल्ली का राजेंद्र प्रसाद मार्ग स्थित ८ न ० का बंगला लोहिया के लोग समाजवादी नेताओं, कार्य-कर्ताओं का केंद्र बिंदु था।

स्मृतियों में खोते हुये राजेंद्र चौधरी ने बताया कि छोटे लोहिया का भवन मार्ग दर्शन प्राप्त करने का, आशीर्वाद प्राप्ति का, अपनी बात बेबाकी से कहने का, मदद प्राप्ति का और भरपूर भोजन करने का स्थल था।

समाजवादी विचारों के संगम छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र ने ११ सितम्बर, २००५ को कहा था,– समाजवाद महज़ सियासी लफ्ज़ नहीं है, इसे किसी भी समाज का संपूर्ण आधार माना गया है। उपभोक्तावादी संस्कृति युवा वर्ग को वैचारिक रूप से पतन की ओर ले जाती है। इससे निकट भविष्य में ऐसा संकट पैदा होगा जिससे पार पाना आसान नहीं होगा।…  आज के हालात में छोटे लोहिया की यह चिंता वैश्विक चिंता बन चुकी है।

२८ अगस्त, २००९ को आगरा के लोहिया नगर में छोटे लोहिया ने कहा था — समाजवादियों को देश की तकदीर बदलनी है तो भारी बलिदानों के लिए तैयार रहना होगा। समाजवादियों को राष्ट्रीय मुद्दों पर बहस चलानी चाहिए। सिर्फ नेताओं के भाषण सुन लेने भर से सामाजिक – आर्थिक परिवर्तन की राजनीति नहीं गरमाएगी। जनता भूख की मार सहते- सहते सो गयी है। जनता को जगाने की जरूरत है। यह काम समाजवादियों को ही करना है। भेदभाव के बारे में सोचोगे तो दिमाग गरम हो जायेगा, तब गरीब की लड़ाई लड़ सकोगे।…..

छोटे लोहिया स्वयं विभिन्न जन संघर्षों में लगभग ११ साल जेल में रहे है। कर्त्तव्य के प्रति लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की तरह दृढ़ता दिखाते हुये राम कोला कांड में नैनी जेल में हिरासत में रखे गये छोटे लोहिया ने पत्नी की मृत्यु पर राज्य पल द्वारा जमानत पर रिहाई करने की बात कहने पर साफ़ मना कर दिया था। उन्होंने कहा कि सभी आन्दोलनकारियों की रिहाई होने पर ही वे जेल से निकलेंगे और अंतत यही हुआ।

जनेश्वर मिश्र कार्यकर्ताओं और साथियों को सम्मान देने में तनिक भी कंजूसी नहीं करते थे।

छोटे लोहिया का स्पष्ट कहना था कि मुद्दे जन संपर्क व संघर्ष से बनते हैं। वे चिंतित रहते थे कि अब समाजवादी जन संघर्ष से अलग हो रहे हैं तथा मेरी मृत्यु के बाद मेरे भवन में रह रहे कार्यकर्ताओं का क्या होगा ? छोटे लोहिया आज हमारे मध्य नहीं है, उनके विचार व संघर्ष समाजवादी विचारों पर चिंतन करने वालों, राजनीति करने वालों के लिए सदैव प्रेरक रहेंगे। आज समाजवादी विचारों के सभी लोगों को, डॉ लोहिया के लोगों को गरीब- गुरबा की लड़ाई को आगे बढ़ाने की जरुरत है।

राजनीतिक पटल पर १९९२ में मुलायम सिंह यादव द्वारा लखनऊ के हज़रत महल पार्क में डॉ लोहिया के विचारों की पार्टी का गठन किये जाने के पीछे छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र का संपूर्ण निर्देश व आशीर्वाद था।

डॉ राम मनोहर लोहिया के विचारों के वाहक छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र आजीवन समाजवादी पार्टी के और मुलायम सिंह यादव के मार्गदर्शक रहे। मुलायम सिंह यादव ने उनके देहावसान के बाद कहा था,—- डॉ लोहिया और राजनारायण जी के बताये आदर्शों को जनेश्वर जी आगे बढ़ाने में लगे हुये थे। लोहिया और  राजनारायण के विचार, उन्हीं की सादगी, उन्हीं का संघर्ष और उन्हीं के बताये रास्ते पर जनेश्वर जी चल रहे थे। जो गरीब हैं, पिछड़े हैं, मजदूर हैं, किसान हैं, उनके प्रति जो ना इंसाफी हो रही है, गरीबी – अमीरी की खाई बढ़ रही है, उसे पढ़ने का संकल्प जनेश्वर जी ने लिया था। अब जनेश्वर जी नहीं है। पहले डॉ राम मनोहर लोहिया जी और राज नारायण जी और फिर जनेश्वर जी हम लोगों को संभाले हुये थे। दिशा निर्देश देते थे, राय देते थे। उनका अभाव बहुत खलेगा। जनेश्वर जी के सपनों, विचारों और उनके संकल्पों को ले कर हम लोग आगे चलेंगे।

१९ जनवरी,२०१० को समाजवादी पार्टी के इलाहाबाद में आयोजित धरने में जनेश्वर मिश्र छोटे लोहिया ने आशा भरी आवाज़ में कहा था —- शायद मेरी मौत के बाद समाजवादी आन्दोलन और तेज हो जाये। २२ जनवरी, २०१० को ही छोटे लोहिया नहीं रहे। छोटे लोहिया के देहावसान के बाद उनकी अंतिम इच्छा कि समाजवादी आन्दोलन तेज हो को पूरा करने कि जिम्मेदारी समाजवादी कार्यकर्ताओं की है। समाजवादी आन्दोलन के बूते समाजवादी राज्य की स्थापना जनता के मुद्दों पर संघर्ष खड़ा करके, जन विश्वास अर्जित करके ही किया जा सकता है। जोड़-तोड़, दल -बदल, सिधान्तहीन गठ बंधन का सहारा लेने की अपेक्षा समर्पित संघर्ष के साथियों को राजनीति में अवसर दिया जाना वक्त की मांग है और समाजवादी पुरोधाओं भगत सिंह, आचार्य नरेन्द्र देव, लोक नायक जय प्रकाश नारायण, डॉ राम मनोहर लोहिया, राज नारायण, राम सेवक यादव, मधु लिमये, जनेश्वर मिश्र के संकल्पों, सपनो के क्रियान्वयन की दिशा में उथया गया सकारात्मक कदम रूपी सच्ची श्रधांजलि और समर्पण है।

अरविन्द विद्रोही

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