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सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के नाम पर देश को अमरीकी गुलामी की ओर ले जाने की देशद्रोही साजिश

रणधीर सिंह सुमन
2014 में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के नाम पर चुनाव लड़कर सरकार बनाने वाली भारतीय जनता पार्टी की आर्थिक नीतियाँ देश को बेबसी की ओर ले जा रही हैं। बुलेट ट्रेन के नाम पर जापान से लिए गए कर्ज से देश कर्ज के मकड़जाल में फँसता जा रहा है तो वहीं जापान सरकार ने हस्ताक्षर होने के बाद तुरन्त ही कहा कि आप परमाणु टेस्ट नहीं कर सकते हैं अगर परमाणु टेस्ट किया तो हमको समझौते के ऊपर सोचना पड़ेगा।
यह उसी तरीके की बात है कि जब तारापुर परमाणु संयत्र को शर्तें न मानने के कारण फ्रांस ने यूरेनियम की सप्लाई रोक दी थी।
अमरीकी साम्राज्यवादी मुल्कों या उनके सहयोगी देशों से कर्ज लेने का मतलब है इस देश की जनता को गिरवी रखनेा। देश का ज्यादा से ज्यादा पैसा कर्जे का ब्याज चुकाने में देना होगा। जिससे आर्थिक बुनियादी ढाँचा कमजोर होगा।
वहीं सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का नारा संघ आगे बढ़ाकर उन्माद के स्तर पर लगा रहा है। देश के अंदर भुखमरी, बेरोजगारी, महंगाई, उत्पीड़न सभी का इलाज हिन्दू-मुसलमान के आधार पर देखा जायेगा। इसी सोच के साथ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ता पूरे देश में साम्प्रदायिक उन्माद फैला रहे हैं।
साम्प्रदायिक उन्माद से नागरिकों की किसी भी बुनियादी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। युवाओं के दिमाग को विषाक्त करने का काम अवश्य किया जा रहा है। अपने कुकर्मों को छिपाने के लिए सीबीआई को उपयोग कभी मुख्यमंत्री वीरभद्र के घर पर छापे की लिए या केजरीवाल के कार्यालय पर छापा मारने के लिए किया जा रहा है।
इरफ़ान इंजीनियर लिखते हैं कि हिन्दू राष्ट्रवादी अपनी बेजा हरकतों को उचित ठहराने के लिए राष्ट्रवाद और देशभक्ति की अवधारणाओं का सहारा ले रहे हैं। जो भी ऊँची जातियों की जीवनशैली, संस्कृति व विचारों के विरूद्ध या शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के सिद्धांत के अनुरूप है, वे उसे राष्ट्रविरोधी व देशद्रोह बता रहे हैं। हिन्दू राष्ट्रवादियों के लिए राष्ट्रवाद का अर्थ है एक संस्कृति और एक विचार का वर्चस्व। इसी आधार पर हिंदू राष्ट्रवादी, तार्किकता व मानवतावाद को खारिज करते हैं। हिन्दू धर्म इन दोनों अवधारणाओं को खारिज नहीं करता। आज आवश्यकता है राष्ट्रवाद की परिकल्पना के विखण्डन की।
– रणधीर सिंह सुमन

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