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साध्वी चिदर्पिता ने पूछा कथित संत चिन्मयानंद से सवाल, पिछले 12 वर्षों में कितनी बार 84 कोस परिक्रमा की है श्रीमान् ?

चिन्मयानंद क्या स्वयं राम नाम का जप करते हैं? कब से गंगा स्नान नहीं किया है चिन्मयानंद ने?

बदायूँ। भारतीय जनता पार्टी के नेता, पूर्व गृह राज्यमंत्री और कथित संत स्वामी चिन्मयानंद की कभी शिष्या रहीं मुमुक्षु आश्रम, शाहजहांपुर की निवर्तमान प्रबंधक साध्वी चिदर्पिता सरस्वती ने स्वामी को कटघरे में खड़ा करते हुये सवाल किया है कि, “चौरासी कोसी परिक्रमा पर प्रतिबंध आज लगा है पर यह तिथि, महीना, रितु प्रतिवर्ष आते हैं तो चिन्मयानंद बतायें कि पिछले 12 वर्षों में उन्होंने कितनी बार यह परिक्रमा की है? इस चौरासी कोसी यात्रा का ध्यान उन्हें इससे पहले क्यों नहीं आया? आज वे कह रहे हैं कि राम मंदिर निर्माण आन्दोलन कभी रुका ही नहीं था तो साथ में यह भी स्पष्ट करें कि यह आन्दोलन कब, कहाँ और कैसे चल रहा था? यदि वाकई चल रहा था तो यह भी स्पष्ट करें कि क्या उनका भारत की न्याय व्यवस्था में विश्वास नहीं है? जब श्रीराम मंदिर का प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है तो वे गोपनीय या सार्वजानिक तौर पर आन्दोलन चला ही क्यों रहे थे?“

साध्वी चिदर्पिता ने कहा कि वे सामाजिक, राजनैतिक और धार्मिक स्तर पर पूरी तरह शून्य हो चुके चौरासी कोसी परिक्रमा को लेकर विवाद उत्पन्न करके पुनः चर्चा में आने का प्रयास करने वाले कथित संत चिन्मयानंद से करोड़ों हिन्दुओं की ओर से ही नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की ओर से सार्वजनिक रूप से सवाल कर रही हैं जिसका वे सार्वजनिक रूप से ही जवाब दें… कि वह कौन से संत समाज के अगुआ बनकर चौरासी कोसी यात्रा को निकालने की जिद कर रहे हैं? कौन से अखाड़े के एवं कितने लोग उनके साथ हैं? उन्होंने कहा कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री आज़म खां को कोसने से पहले वह देश की जनता को यह बतायें कि क्या वह स्वयं राम नाम का जप करते हैं? हरिद्वार में भागीरथी के किनारे विशाल आश्रम हैं जहाँ गंगा के नाम पर अपार चन्दा आता है, पर यह बतायें कि उन्होंने कब से गंगा स्नान नहीं किया है?

जो व्यक्ति राम नाम का कभी जप नहीं करता, गंगा किनारे रहने के बावजूद गंगा स्नान नहीं करता, आचमन नहीं करता, आश्रम में रहने के बावजूद आश्रम के ही मन्दिर में जो व्यक्ति कभी जल नहीं चढ़ाता, जहाँ बड़े से बड़े व्यक्ति के जूते उतरवाये जाते हैं, जहाँ लोग मंदिर की ही भाँति पूजा-अर्चना करते हैं, उस गुरु गद्दी के आगे जो जूते पहनकर जाता है, वह व्यक्ति जब राम मंदिर के निर्माण और चौरासी कोसी यात्रा की जिद करता दिखता है तो हास्यास्पद लगता है।

साध्वी ने सवाल किया है कि आश्रम द्वारा संचालित शैक्षिक संस्थाओं में उन्होंने अपने परिजनों को नौकरी क्यों दे रखी है? संत के लिये तो सम्पूर्ण समाज एक सा ही होना चाहिए और नियमानुसार भी संस्था की समिति का कोई भी पदाधिकारी अपने खून के रिश्ते को वेतनभोगी कर्मचारी नहीं बना सकता तो उनके रिश्तेदार आश्रम में क्यों रहते हैं?  शुरुआत में जब संत राजनीति में आये तो आलोचना होने पर यह तर्क दिये गये कि संतों के आने से पतित हो चुकी राजनीति पुनः स्वच्छ हो जायेगी लेकिन कथित संत चिन्मयानंद की स्वयं की शैक्षिक संस्थाओं में ही करोड़ों के घोटाले हैं। उन्होंने पूछा है कि शैक्षिक संस्थाओं और शिक्षा के विकास के लिए उपयोग होने वाले धन से वह खुद मोबाईल, गाड़ी क्यों खरीदते हैं? संपन्न होने के बावजूद रोटी तक शैक्षिक संस्थाओं के धन से ही क्यों खाते हैं? आश्रम का खाने की बजाय होना तो यह चाहिए कि वे अपने सम्पर्क के लोगों से सहयोग लेकर संस्थाओं और आश्रमों का चहुंमुखी विकास करें…

साध्वी ने कहा कि शाहजहाँपुर की जनता ने उन्हें भली-भाँति जानने के कारण लोकसभा चुनाव में पहली बार में ही नकार दिया था लेकिन वे स्पष्ट करें कि अपने किसी भी क्षेत्र से दोबारा चुनाव लड़ने की हिम्मत वे क्यों नहीं जुटा पाये? लोगों की धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग कर बदायूँ, मछलीशहर और जौनपुर से सांसद रह चुके चिन्मयानंद यह भी बतायें कि इन लोकसभा क्षेत्रों से क्या उनका अब कोई सरोकार है? क्या उनके पास इन क्षेत्रों से जुड़ा एक भी मुद्दा नहीं है जो एक बार फिर धार्मिक भावनाओं के सहारे ही राजनीतक मैदान में आना चाह रहे हैं?

विश्व हिन्दू परिषद्, भारतीय जनता पार्टी से भी चिदर्पिता ने पूछा है कि आखिर एक ऐसे दागी व्यक्ति को साथ लेने जिसे उसके अपने आश्रम की ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी के पद से बेदखल कर दिया गया है की उनकी क्या मजबूरी है। क्या उनके पास राम मंदिर के लिये साथ चलने वाले लोगों का अकाल पड़ गया है जो मर्यादापुरुषोत्तम राम के नाम की मर्यादा की भी अनदेखी की जा रही है? क्या वे निर्णय होने तक, छवि बेदाग साबित होने तक ऐसे लोगों से दूरी बनाना उचित नहीं समझते?

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