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साम्प्रदायिक फासीवादी खतरे का मुकाबला वैकल्पिक नीतियों के लिये संघर्ष के बदौलत ही सम्भव- अखिलेन्द्र

साम्प्रदायिक हिंसा निरोधक कानून हो इसी सत्र में पारित- निहालुद्दीन
आइपीएफ ने सभी सांसदों को भेजा पत्र
अखिलेन्द्र के उपवास का आज दूसरा दिन
नई दिल्ली, 8 फरवरी 2014; मौजूदा वक्त में इस देश की एकता, अखण्डता और सामाजिक ताने-बाने के लिये गम्भीर खतरे के रूप में उभर रही साम्प्रदायिकता फासीवाद का चरित्र लिये हुये है और इसका मुकाबला किसानों, मजदूरों, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों के सामाजिक, आर्थिक व लोकतान्त्रिक अधिकारों की वैकल्पिक नीतियों के लिये मजबूत आंदोलन के जरिए ही हो सकता है। हमारा यह उपवास इस संघर्ष को देश में तेज करने के लिये सभी लोकतान्त्रिक और जनान्दोलन की ताकतों को एकताबद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा।

यह बातें आज आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने जंतर-मंतर पर अपने उपवास के दूसरे दिन आयोजित सभा को सम्बोधित करते हुये कही।

आइपीएफ के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रो0 निहालुद्दीन अहमद ने कहा कि मौजूद वक्त में हमारे देश में उभर रही राजनीतिक और सामाजिक प्रवृत्तियों के मद्देनजर साम्प्रदायिक हिंसा निरोधक कानून को संसद के मौजूदा सत्र में पारित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि देश में साम्प्रदायिक शक्तियों का उत्थान हो रहा है जो हमारे देश की धर्मनिरपेक्षता व लोकतान्त्रिक ढाँचे के लिये गम्भीर खतरा पैदा कर रही हैं। इन परिस्थितियों में यह जरूरी है कि सांप्रदायिक हिंसा पर रोक के लिये एक मजबूत कानून बनाया जाये। अनेक राजनैतिक दल मौजूदा सांप्रदायिक हिंसा निरोधक विधेयक, यहाँ तक कि इसके संशोधित स्वरूप को भी लेकर सशंकित है कि मौजूदा विधेयक राज्य सरकारों के अधिकारों का अतिक्रमण करता है और इस तरह देश के संघीय ढाँचे के लिये खतरा है। उन्होंने बताया कि इस सम्बंध में आइपीएफ की तरफ से सभी सांसदों को पत्र देते हुये आग्रह किया गया है कि विधेयक में तत्काल ऐसे आवश्यक संशोधन किये जाये ताकि साम्प्रदायिक हिंसा निरोधक विधेयक देश के संघीय ढाँचे की भावना के प्रतिकूल न हो तथा इसे संसद के मौजूदा सत्र में ही पारित कर देश के धर्मनिरपेक्ष ढाँचे को मजबूत किया जा सके।

इसके साथ ही उन्होंने सरकार से माँग की कि हिन्दू, सिख और बौद्ध दलित की तरह ही दलित मुस्लिमों और ईसाईयों को अनुसूचित जाति की श्रेणी में रखा जाये और मण्डल आयोग की सिफारिशों के अंतर्गत आने वाले पिछड़े मुसलमानों का कोटा उनकी जनसंख्या के अनुपात पर पिछड़े वर्ग की श्रेणी से अलग किया जाये।

उपवास कार्यक्रम को आइपीएफ के नेता ललित रूनवाल, भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ऋषिपाल अम्बावता, हरियाणा के किसान नेता शमशेर सिंह दहिया, गांधी इंस्टीटयूट के निदेशक व अर्थशास्त्री प्रो दीपक मलिक, पूर्व आईजी व दलित चितंक एस आर दारापुरी, उबैदुल्लाह अखिलेश दूबे, रमेश सिंह, मोहम्मद आरिफ लाल बहादुर सिंह, शम्भूनाथ कौशिक आदि ने सम्बोधित किया और सभा का संचालन विवेक यादव ने किया।

आइपीएफ द्वारा सांसदों को बेजा गया पत्र निम्नवत् है-

To,

The Honourable Member of Parliament

Union of India.

 

Subject: Anti-Communal Violence Bill needs to be amended and passed in this session of Parliament :

 

Dear Sir/ Madam,

 

The need for an Anti-Communal Violence Bill is of pressing urgency in our country given the current political and social trends emerging in the country. The nation is witnessing rise in communal forces and threats to secularism and democracy are emerging all over the nation. In such a scenario, it is imperative that there should be strong laws to check the communal violence. It is apprehended by several political parties that the Anti-Communal Violence Bill even its amended present form infringes upon the rights of state governments as such it is seen as a threat to federalism of our constitution. We, therefore, urge that immediate amendments be made to ensure that the Anti-Communal Violence Bill does not tamper the spirit and federal structure of the constitution and it should be passed in this session of Parliament to strengthen the secular fabric of the nation.

 

The Dalit Hindus, Sikhs and Buddhists are already placed under article 341 of the constitution but Dalit Muslims and Christians who are of the same category are deprived of all benefits under the category of SC which is against the spirit of our constitution and principles of natural justice so we demand that Dalit Muslims and Christians should be included in the same category.

 

The OBC Muslims quota covered under the Mandal Commission recommendations should be separated within the Backward Class category as per their population. The government should make sincere efforts that the case under the consideration of Hon’ble Supreme Court is expedited as soon as possible.

 

We, therefore, humbly request all of you to sympathetically consider the genuine demands of Indian Muslims and do your level best that Anti-Communal Violence Bill is passed in this session and Dalit Muslims and Christians are given their constitutional right.

With kind regards.

 

Yours’ sincerely,

 

(Akhilendra Pratap Singh)                                                             (Prof. Dr. Nehaluddin Ahmad)

National Convenor                                                                                        National Spokesperson

AIPF                                                                                                                                            AIPF

 

Cc: The Honourable Prime Minister of India.

 

Note: On these issues Mr. Akhilendra Pratap Singh, National Convenor of All India Peoples Front, is holding a 10 days fast commencing from Feb 7th to Feb 16th 2014 at Jantar Mantar, New Delhi.

 

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