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साहब एक दिन कश्मीरी बन के तो गुजारिए, यहाँ हर रोज़ गोधरा है हर रोज़ मुज़फ़्फ़रनगर

दास्तान-ए-दर्द, कश्मीर और भारतीय सेना
सच में तुम्हें कश्मीर चाहिए कश्मीरी नहीं
सुमैया कुरैशी

कुछ दिन पहले एक हिंदुस्तानी लड़के से बात हो रही थी। अब फ़ेसबुक है, टकरा ही जाते हैं। बातचीत में जब मैंने उसे हिंदुस्तानी-हिंदुस्तानी कहकर 2-4 बार मुख़ातिब किया, तो बेचारे ने फीकी सी ही खिलाफत दर्ज किया कि हम सब हिंदुस्तानी हैं तो फिर आप सिर्फ़ मुझे हिंदुस्तानी क्यूँ कहती हैं।
मैंने जवाब दिया कि भोपाल में स्टूडेंट्स को तुम सिर्फ़ इसलिए मार देते हो कि वो कश्मीरी है।
UP में कलेज में घेराबंदी करके लड़कों का दमन करते हो, क्यूँकि वो कश्मीरी हैं
जब पूरे हिंदुस्तान के लिए हम सिर्फ़ कश्मीरी हैं तो बाक़ी का पूरा हिंदुस्तान हमारे लिए हिंदुस्तान है। और आप हिंदुस्तानी। और हमारी जान पर मुसल्लत फौज भी हिंदुस्तान की।
सेना के बचाव में बोलना जैसे हर भारतीय का धर्म हो, जानते हुए भी कि सिर्फ़ कश्मीरियों का ही बलात्कार नहीं होता भारतीय दोस्त, ये सेना तुम्हारी भारतीय बहन मनोरमा देवी का भी बलात्कार करती है और तुम चुप रहते हो। कैसे भाई हो तुमसे अच्छे तो कश्मीरी हैं, पथराव तो करते हैं, कम से कम गोली की क़ीमत पर ही सही। मर गए तो क्या हुआ बतिल के ज़ुल्म को सहना भी कुफ़्र जैसा है।

आप क्या जानें साहब कश्मीरी होना इतना आसान नहीं, इसकी एक क़ीमत है जो चुकानी पड़ती है।
मंज़ूर है तो आ जाइये। जवान लड़की है तो बलात्कार ओर ज़ुल्म है विरोध करने पर गोली है ही।
तुम जो बोलते हो ना कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, सच में तुम्हें कश्मीर चाहिए कश्मीरी नहीं।
जब तुम्हारी सेना यहाँ हमें ऐसे गोलियों से भूनती है, जैसे ये अवाम हिंदुस्तान का “अभिन्न” हिस्सा ना होकर पाकिस्तान की अवाम हो तो फिर किसी के पाकिस्तानी झंड़ा फहराने पर विरोध ही कैसा।

तुम कश्मीर को अभिन्न बनाने की बजाए कश्मीरियों को अभिन्न बनाते काश।
तुम कहते हो हमें पढ़ना चाहिए सिस्टम में आना चाहिए।
तुम कहते हो हम क्रिकेट मैच में पाकिस्तान को क्यों जिताते हैं? भारतीय भय्या हमने परवेज़ रसूल को तुम्हारी टीम में भेजा, तुमने ड्रेसिंग रूम से गिरफ़्तार कर लिया।
हमने नईम भट्ट को U19 कैम्प भेजा, तुमने गोली मार दी।
हम ही मरते हैं ओर हम ही लड़ने के लिए खड़े हो जाते हैं
आप आराम से जी तो लेते हैं ना वहाँ। हमारे यहाँ हर रोज़ गोधरा है हर रोज़ मुज़फ़्फ़रनगर है
आपके बच्चे स्कूल से शाम को वापस बिंदास अपने पैरों पर घर तो आ जाते हैं, हमारे वाले तो अक्सर दूसरों के कंधो पर आते हैं।
भाई साहब आप एक दिन के लिए कश्मीरी बन के तो देखिए पूरी ज़िंदगी के लिए हिंदुस्तानी ना बन जाऊँ तो कहना !!
सुमैया कुरैशी की फेसबुक टाइमलाइन से साभार

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