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साहब, संभल जाओ! अब भी वक़्त है। भारत माता रुष्ट है।

अभिषेक श्रीवास्तव
मुझे शुरू से शक था कि कोई आपदा आने वाली है। ऐसे ही थोड़ी बसन्त में बरसन्त हो जाता है। परसों देर रात बनारस में जो हुआ है, वह बेहद खतरनाक है। पांच सौ साल पुराने शापित रत्नेश्वर महादेव मंदिर पर आकाशीय बिजली गिरी है। उसका शिखर टूट गया है। यह आकाश मंडल में गुरु चाण्डाल योग बनने का लक्षण है।
मणिकर्णिका घाट के करीब सन् 1500 में यह मंदिर एक बेटे ने अपनी माँ का क़र्ज़ चुकाने के लिए बनवाया था। माँ को बहुत दुःख पहुंचा था कि उसका पुत्र एक मंदिर से माँ का क़र्ज़ चुकाने जैसी सस्ती बात कह रहा है। माँ रत्ना के दिल को ठेस पहुंची। उसके मन से शाप निकला। मंदिर पीसा की मीनार जैसा झुक गया। कालान्तर में वह रत्नेश्वर महादेव कहलाया।
याद करो भक्तों, दो साल पहले एक और बेटा माँ का क़र्ज़ चुकाने काशी आया था। 500 साल बाद माँ को उम्मीद बंधी थी। शनिवार की रात जब आकाश से बिजली मंदिर के शिखर पर गिरी, तो वह बिजली नहीं, एक माँ के दोबारा टूटे हुए दिल की कराह थी। बेटा फिर नालायक निकल गया। सोचा था माँ को धन-दौलत से तौल देगा। शनि और मंगल का ऐसा मिलन हुआ कि शिखर ही टूट गया।
मंगल डेढ़ माह किसी राशि में रहता है, इस बार वह वृश्चिक राशि में छः माह रहेगा। कलियुगी बेटे को भारत की कई माँओं का शाप एक साथ लगा है। अगले छह महीने बहुत खतरनाक हैं। साहब, संभल जाओ! अब भी वक़्त है। भारत माता रुष्ट है।

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