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सोशल मीडिया में अपनी राय दर्ज कराना अनुशासनहीनता- कॉमरेड करात का नया फतवा

एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास
प्रकाश कारत को शायद अब यह समझ में नहीं आ रहा है कि जनसंवाद के जरिये पार्टी के जनाधार को विस्तार दें या बंगाल और केरल में कॉमरेडों को अनुशासित रखें। जो लोग आप प्रसंग में कॉमरेड महासचिव के बयानों से उत्साहित होकर सोच रहे थे कि युवाओं की समस्याओं को समझने और उनसे संवाद करने को उन्होंने जरूरी नहीं समझा, वे शायद गलत हैं। आप की टीम में सूचना तकनीक के विशेषज्ञ बेहतरीन लोग हैं और उनके दिल्ली करिश्मे से उत्साहित होकर कारत ने पार्टीजनों को आप के तौर तरीके से सीखने का सबक दिया, यह बहुत पुराना किस्सा नहीं है। लेकिन अब उन्होंने कोच्चि से बयान जारी करके फतवा दिया है कि सोशल मीडिया में अपनी राय दर्ज कराना अनुशासन भंग में शामिल है। यह ममला इसलिए संगीन है क्योंकि लोकसभा चुनाव के पहले माकपा अपने कैडरों को उत्साहित करने के लिये तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ डायरेक्ट एक्शन (सीधा हमला) करने की घोषणा की है। इस नये फतवे से कैडर कितने उत्साहित होंगे, इस पर ही सवालिया निशान लग गया है। हालाँकि माकपाई हमेशा की तरह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन लगाने से अब भी बच रहे हैं।
उधर दीदी एक झटके के साथ एक दो सीटें आप को बंगाल में देकर माकपा का खेल बिगाड़  सकती हैं। मोदी का समर्थन करने पर उनका वोट बैंक समीकरण गड़बड़ा सकता है लेकिन आप से समझौता करने पर ऐसा कोई खतरा नहीं है।
आप ने कारत का बयान आते ही वामशासन में वाम के बंगाल में किये कराये के मद्देनजर वाम के साथ तीसरे मोर्चे के गठन की सम्भावना को सिरे से खारिज कर दिया तो दीदी अब आप की तारीफ करने लगी हैं। यानी तीसरे मोर्चे की वाम परियोजना में मुलायम सिंह के अलावा कोई और वामपक्ष में नहीं दीख रहा है।
उधर मुलायम पहले ही भाजपा की तारीफ कर चुके हैं और मुजफ्फरनगर दंगों के बाद अल्पसंख्यकों में उनकी साख खराब हो गयी है। इस पर तुर्रा यह कि कांग्रेस बहुजन समाज पार्टी को उत्तर प्रदेश में पूरी पचास सीटें देकर उससे महाराष्ट्र, पंजाब और हरियाणा में गठबंधन करने जा रही है।
बिहार में भी कांग्रेस के साथ राजद और लोजपा के गठबंधन के बाद नीतीश कुमार के उस गठबंधन में शामिल होने की संभावना नहीं है। ऐसे में मुलायम और नीतीश के सामने सारे दूसरे विकल्प खुले हैं, ऐसे विकल्प जो वाम दलों को मंजूर होंगे नहीं।
लगता है कि राष्ट्रीय राजनीति में एकदम अकेले हो जाने के सदमे में कामरेड करात को आप की तारीफ में वाम कार्यकर्ताओं को दी गयी नसीहत याद नहीं है। अब वे फेसबुक,ट्विटर और ब्लॉग के खाते खोलकर अपनी राय देने वाले माकपाइयों को अनुशासित करने लगे हैं।
बंगाल में सुजन चक्रवर्ती और ऋतव्रत जैसे तमाम खास कार्यकर्ता सोशल नेटवर्किंग में बेहद सक्रिय हैं। करात उन सभी पर अंकुश लगायेंगे तो सोशल नेटवर्किंग के जरिये आप की तरह वामदलों का जनाधार बनेगा कैसे, इसका कोई खुलासा लेकिन कामरेड ने नहीं किया है। धर्म-कर्म की आजादी की तरह लगता है कि केरल की कट्टर पार्टी लाइन से बाहर निकलने में कॉमरेड को अब भी दिक्कत हो रही है। गौरतलब है कि बंगाल में माकपाइयों को जनता से जुड़ने के लिये धर्म-कर्म की इजाजत दे दी गयी है लेकिन केरल में नहीं।
गौरतलब है कि करात ने अगरतला में पहली बार हुटी माकपा की केन्द्रीय समिति की बैठक के दौरान संवाददाताओं से कहा था कि विधानसभा चुनाव में आप कांग्रेस और भाजपा के सामने एक सशक्त विकल्प के रूप में उभरी है। हमें आप को समर्थन देने से पहले उनके राजनीतिक कार्यक्रमों, नीतियों और योजनाओं को देखना है। इसके अलावा मीडिया में उन्होंने आप को वाम विरासत वाली पार्टी भी कह दिया और जनाधार बनाने के लिये कैडरों से आप से सीखने की सलाह भी दे दी। हालाँकि बाद में उन्होंने अगरतला से कोच्चि पहुँचकर यह भी कह दिया कि आम आदमी पार्टी बुर्जुआ दलों का विकल्प बन सकती है, लेकिन यह वामपंथी दलों का नहीं। उन्होंने कहा कि 28 दिसंबर को दिल्ली में अल्पमत सरकार बनाने वाली आप पर अभी भी कोई राय बनाना बहुत जल्दबाजी है। करात ने मीडिया से कहा, आप ने दिल्ली में अच्छा प्रदर्शन किया और यह एक महत्वपूर्ण ताकत है, लेकिन मैं अन्य राज्यों के लिए निश्चिंत नहीं हूँ। उन्होंने कहा,वे बुर्जुआ दलों के लिये विकल्प हो सकते हैं, वामपंथी दलों के नहीं। यह अच्छी बात है कि उन्होंने मध्य वर्ग से सहयोग लिया है। लेकिन हम उनसे उनके कार्यक्रमों और नीतियों का इंतजार कर रहे हैं। करात ने कहा कि महानगरों में माकपा का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। हमें मध्य वर्ग की वर्तमान पीढ़ी के साथ समस्या हो रही है और इसलिए माकपा और वामपंथियों ने खुद को अनुकूल बनाना शुरू कर दिया है।
आप के साथ वामपंथी दलों के गठबंधन के सवाल पर करात ने कहा कि ऐसा लगता है कि उन्हें गठबंधन में कोई दिलचस्पी नहीं है और इस समय वे खुद को स्थापित करने को लेकर चिन्तित हैं। करात ने कहा, हमें नव उदारवादी नीतियों और सांप्रदायिकता पर उनका दृष्टिकोण जानने में दिलचस्पी है।

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