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हिंदुत्व की बहार हो गइल कि ओबामा रामचंद्र पधारो म्हारा देश। इतिहास बदले बदले विज्ञान

जनधन वाह वाह। कैश सब्सिडी आहा आहा।
खाता खुलल हो। धिन ता धिन ता।
कैश आ घिलनता ता थई ता ता थई।
नाचै मन मयूर बै चैथू।
बै अबहीं ताम्रपत्र गाढ़े का पोरगाम लागै है,शुरु होईहिं चाहि।
का पता के मनरेगा मा ताम्रपत्र गाढ़ेका काम मिले हो।
कि इतिहास बदले कि विज्ञान बदले।
हिंदू राष्ट्र समयबै चैतू।
वो जो इंदिराम्मा ने चालू करिकै चाहि तो बडा़ बावेला हुई गवा।
बाबर ने बाबरनामा लिखवायो। अकबर ने लिहिला आपण इतिहास।
हिटलर इतिहास बदल दियो।
इंडियन पब्लिक बुरबकै है।
सात के दशक मा ये पुण्यकर्म रोक दिहिस और इंदिराम्मा को बवाल रोके खातिर इमरजेंसी दागेके पड़ी।
अबहु हम तो अमेरिकी भयो। देश म्हारा वायब्रेंट गुजरात हुई गयो।
अबही मुसल्लों का इतिहास,गोरों का इतिहास काय को।
नयका इतिहास चाहि।
विज्ञान भी नयका चाहि।
रिवर्स गियर पुष्पक विमान चढिके मर्यादा पुरुषोत्तम रामचंद्र पधारबे भारत मा।
लंका विजय हुओ कि नाय, ना मालूम।
रामजी ओबामा भयो कलजुग मा। शूद्र अवतार छन।
जैसन कि आपण कल्कि महाराज।
साक्षात जुड़वां बिरादर।
मेलवा मा बिछुड़ल बा।
छब्बीसे जानुवारी भरत मिलाप होई।
जइसा कि सिनेमा मा होवत हो,बिल्कुले वइसन हुई गयो रे।
गुजरात नरसंहार का हल्ला भौते हुआ एइसन कि अमेरिका बिच जा ही न सकै आपण कल्कि महाराज। कइसे पहिचानते जुड़वां भाई जुड़वा भाई को।
वो जो प्रधानमंत्री बन गइलन तो कोई कारा तिल रहे मुखवा पे जो बिजुरी जइसन चमकाल बा आउर झट से अमेरिकी रामजी ने पहिचान लिल कि यहीच तो आपन खून वानी। गला मिलेक को उतावल हुई गवा।
घोंघिया आंखि देखे न सकत, मुसनाक सूंगे ना सकै कि उनर कलेजे में पीर पिघलकर गंगा जमुना हो गइलन। वहींच गंगा परिष्कार वास्ते स्वच्छता अभियान चालू आहे।
शांतता, नरमेध चालू आहे। शांतता, बलात्कार चालू आहे। शांतता वध चालू आहे। शांतता वैदिकी हिंसा चालू आहे।
हम ना देख सकै बै वो कारा तिल। अमेरिकी ससुरे सैटेलाइट वाइट घनचक्कर चलावत हो आउर अंतरिक्ष से ताके झांके करै। चळवळ एटीएमोमाझा दृष्टि काय।
तुहार हमार नब्ज जानै है व्हाइटहाउस, पेंटागन, वर्ल्ड बैंक, आईएमएफ, नाटो बाकीर सबै उनर संस्था सार। मोर बाप तोर बाप, मालिक मलकाइन उनर भी बापो का बाप वो अमेरिका। बायोमैट्रिक डिजिटल जो हुई गवो देश तो समझो उनर उपनिवाश वानी हम।
विकास कथे कथे बिगड़ल हो कइसे होवे सुधार, वही बताये रहिले।
मनमोहना समझ ना सकौ, झट से उतार दियो गद्दी से।
तड़ाक से बुला भेज्यो अमेरिकामा। का जलवा रहि अडानी सौजन्य से। अंबानी भी पीछे रहे हो। सारे इंडियाइंक बाग बाग गुलबहार गुलनार हो गयो रे। निसार हमरी गली खूनै क नदीबन गइलन आउर हमनी लहूलुहान आप जख्म चाटेको जिंदा वानी।
अब उनन को भारत के अयोध्या राज में ठीके से स्वागत खातिर मस्त तैयारी बाटे।
राममंदिर कोई इमारत नइखे, बुरबकै समझत नाही।
राममंदिर का मतबल हो शत प्रतिशत हिंदुत्व।
वौहे जो हिंदू साम्राज्यवाद ह।
या जो शत प्रतिशत हिंदुत्व ह, वोके खातिर सबसे पहिले इतिहास बदलना चाहि।
अभै पब्लिक का कल्चरो बदल गयो ह।
हर जेब मा डालर का हल्ला है।
डालर माई बाप।
डालर तोर बाप।
सात सात जनम का बाप हो डालर।
वही मालिक।
वोही मलकियान।
हमनी डालरे खातिर एत्तो एत्तो मचान बांधली।
राजकरण दुकानों कतो साजली।
विकास पागलदौड़ कहै जो गांधी बुड्ढो, उकर वध कर दीहिस नाथूराम बाबा ने।
मंदिर उननका बनकै तैयार समझो।
बाबासाहेब जो संविधान बांधली, भंग रामसेतु मा उका विसर्जन भी हुई गइल।
आर्डिनेंस राज भयो।
पार्लियामेंट रोजगार दफ्तर वानी।
जो निठल्ला कुछो कर न सकै है, मस्त आराम से बतियावन खातिर हल्ला उल्ला करै वास्ते तफरी को जावत उहां।
जावेके खातिर भौते पइसा वइसा चाहि।
सो कारपोरेट फंडिंग है।
कारपोरेट जो फ्री फ्लो फारेन मनी है, कारपोरेट जो मल्टीनेशन ह।
कारपोरेट जो ब्लैको मनी रिसाइकल वानी।
माने कि जो मनी टैक्स उक्स बिना काला हुई गवा, उका दुबई, मारीशस , हांगकांग रस्ते देश मां बिल्डर प्रोमोटर इफ्रास्ट्रक्चर मा झोंकेके चाहि, फेर वही कालाधन विदेशी मनी डालर उलर झिनचाक सफेदो बा।
 वो जो कटकटले अंधकार का कारोबारी छन,बड़का बड़का आश्रम बांधली हो, तमामे मचान बाबा बाबी हईबे करें जो बड़ो चिल्लाया केसरिया सुनामी बनावन खातिर, खुल जा खुल जा सिम सिम तर्जे।
वा सिम अब मोबाइल है।
सिंगल सिम गयो अभै डाबल सिम ट्रिपल सिम जमाना हिईगो।
सिम सिम सिम।
खुल जा सिम सिम सिम।
मोबाइलमध्ये वो खजाना हुईबे करै,जाके लूटे खातिर दुश्मन देश चीनवा से आ गइलन अलीबाबा। चालीस चोर ते तमाम प्रोजेक्ट खुलिके बइठ गइलन।
तो जो आंदोलन वगैरह करैके बीमार पब्लिक है, काका कहि बारंबार मानवाधिकार,  नागरिक अधिकार, जल जंगल जमीन, पर्यावरण, ससुरे सारे राष्ट्रद्रोही छन।
जइसे सलवा जुडुम मा आदिवासी मारे जात या कश्मीर या यूपी या नार्थ ईस्ट मा गड़बड़ करि ते मारे देवै गोली बिना कैफियत, अइसन ही रिफारमवा चाहि त अर्थ व्यवस्था बुलेट माफिक हो जाई। करेजवा चीर कर दनादन डालर की बरसात हुई जाई।
निठल्ला करोड़पति अरबपति जमात कूं फायदा हा फायदा।
सो,कायदा कानून सार बदलत रहि।
बाबासाहेब भी अंग्रेजी राज मा मंत्री बन गइलन त तमाम कानून बनाये दियो।
वो इतिहास भी बदलना चाहि ह।
लेबर ला, ट्रेडयूनियन कानून और का कहि मरदन का देश मा ऊ बाबासाहेब हिंदू कोड भी रच दिहिस, जइसन संविधान इर्रीलिवेंटङुई गयो, बाबा क संविधान भी कूडा जइसन हुई गयो। शिडुल फाइव शिडुल सिक्स वगैरह-वगैरह लाद दियो कि विकास रथ रुक जइहें।
वो इतिहास भी बदलना चाहि ह।
डालर की बरसात न हुई, डालर न हुआ तो करोड़पति अरबपति जमात, मोर तोर बाप महतारी तो भूखों मर जाई।
तभै केकर गोड़ दबाइबो,सोच।
जनम बृथा हो जाई। हम गुलाम वानी हज्जारो बरस से।
गुलामी समनातन ह।
गुलामी खारिज तो हम का चाटिहे डेमोक्रेसा समता सामाजिक न्याय और उ का कहत क्रांति व्रांति। गुलामी हमार वजूद ह। वहीच आत्मा वहीच परमात्मा। वहीच गीता महोत्सव।
गुलामी बहाल रखेकै सोच,चैतू।
कानून बदलने खातिर, रिफार्म वास्ते, पुरकश डालर राज वास्ते, रामराज्य के लिए डालर चाहि। सो अमेरिका से परमाणु संधि हुई गयो।
अब चाहे पोलोनियम खियाके सुनंदा पुष्कर बनायदी कि परमाणु विस्फोट हो जाई कि जिनगी घटस्फोट हो जाई कि भापाल गैस त्रासदी हो जाई फिन फिन ,चाहे दंगा उंगा खूब होई रहै,आग लग जायी सगरा देश मा,राम की सौं भव्यमंदिर बनावक चाहि.वाकर कातिर ताम्रपत्र गाढ़ेके चाहिं।
इंदिराम्मा जो नाहीं कर सकत,वो कल्कि महाराज के राजकाज में होइबे करि है। अब चाहे सिखों का नरसंहार हो,चाहे असम में कत्लेआम हो जाई,चाहे घाट बाट अनाच कनाच घर दफ्तर में बलात्कार कार्निवाल हो, पूरा पहाड़ डूब में शामिल हो कि रेगिस्तान बन जाई तमाम ग्लेशियर कि सार अरण्य तबाह हुई जाये,  सारे कारोबारी हो जायें बरबाद या हम खेत शेतकरी खातिर कब्रिस्तान हिंदुस्तान में हो जाये तब्दील, हमका हिंदू राज चाहि।
हिंदू राज चाहि तो मनुस्मृति बहाल बा। अछूत वानी तो ढेरों जाति नीचे बा। ङम भी उनर मुकाबले ऊंच बा। उ सभै हमार खातिर अछूत बा।
ई जात पांत जारी रहेक खातिर,मनुस्मृति बहाल रखे खातिर आउर झमाझम डालर पावस हिमपात खातिर हमका केेशरिया कारपोरेट राज चाहि। कि निठल्ले हमरे बाप महतारी, मालिक मलकियाइन सबै बहाल तबीयते हों, करोड़पति अरबपति हों आउर हम गोड़ दबात रहे हम गोड़ दबात रहे। गढ्ढा खोदेक आदत बा,खने जाव खनै जाव और उमा गहरी नींद सो जाव घोड़े बेचकर तमाम।
य अश्वमेधी राजसूय ह।
जेकर पुरोहित तमाम पढ़े लिख्के मलाईदार तबके ह।
जेकर पुरोहित तमाम विद्वतजन राजनेता ह।
जजमान फेर वही केसरिया फारेन मनी ब्लैक मनी।
यही खातिर शाहज्यू महारज उवाच,कालाधन जटिल मामला ह।
जयश्रीराम बोलो रामजाद बन जइयो सीधे सीधे।

बाकीर हरामजाद का का कहि,सबै म्लेच्छ शुद्ध हो जाइ।
उलट कलमा पढ़ाई शुरु हो गइलन।
रामजी पधारो म्हारा देश।
कल्कि अवतार राजकाज संभाले है।
ई नयका इतिहास बा। त इतिहास बदलेके बड़ा काम चालू आहे।
संघी इतिहास कौंसिल इतिहास बदलेक को तैयार बा। विज्ञान कांग्रेस मा भी परिवर्तन चाहि। वइसन जइसन सतात्तर मा लाले कृष्ण आडवाणी लौह पुरुष मीडिया भूगोल बदल दीन्ही। जित देखो तित केसरिया। रंग बिरंग केसरिया। केसरिया बोली ठोड़ ना लिहिल समथिंगवा। इतिहास विज्ञान भी वइसन चाही।
त संघ सेवक बत्रा महाराज इकलौते नइखे, अबहुं आईसीएचआर बोर्ड योजना आयोग के नीति आयोग मा कायाक्लप जइसन कायाकल्पित हुई गयो रे।
आईसीएचआर बोर्डे संघ परिवारच्या हिस्ट्री विंगर वाइस प्रेसीडेंट नारायण राव, आल इंडिया जनरल सेक्रेटरी ईश्वर शरण विश्वकर्म आउर केसरिया बंगाल बाटि निखिलेंदु गुहा अबहिं वैदिकी इतिहास रचेक का काम करिहैं। तमाम महाकाव्य, स्मृति, ब्राह्मण, शतपथ, पुराण ,उपनिषद आउर वेद सनातन इतिहास है।
तम युग मा अनार्यइतिहास जइसन गुम हो गइलन, हमलावर विदेशी कौमें सारी गुम हो जाइब। तभै न सौ टक्का हिंदुत्व का दर्शन होई।
अब देश त हमार तुहार नाही।
मालिक मलिकाइन जीवै लाख बरीश तो आशीष बरसै मूसलाधार त यही खातिर हम गोड़ दबावत रहि। हम मचान बांधळी रहि।
नाना आइडेंटिटि, नाना विचारधारा, नाना अस्मिता दुकान चळवळ चलावल रहि,त बूझो वो सभै सलामत त बाकीर जनता खातिर त ङुई देख्यो बांसों का वसंत वायब्रेंट गुजरात।
बाकीर देश गुजरातो जइसन होवेक चाहि।
हमका मजदूरी मिलल जाई तो जिनगी सुधर जाई ।
बाकी जनधन और कैश सब्सिडी ह।
बाकीर उ आधार निराधार तमामो कार्ड छनछनाछन छनछनाछन आउर पुढै डालर पावस घनानघन हिमपात नैनीताल मध्ये।
डालर अइहें त क्या पत्त कि मनरेगा फिर खुल जाइ बाकीर कंस्ट्राक्शन ग्लोबल हुई गयो। का पता के मनरेगा मा ताम्रपत्र मा भारी मजदूरी मिलल हो।
बंगाल मा कोई रोजी रोटी नइखे।  ट्रेनवा मा भर भरकर बंगाली सारा देश मा कंस्ट्रक्शनकरै है।  बाकीर जो है उनपर बिल्डर प्रोमोटर सिंडिकेटवा की बड़ी कृपा हैगी।
मिस्टि दई आर ईलिश माछ की बहार देखो।  देखो गुजराती थाली आउर चाखो चाहो तो दख लिजो मारवाड़ी थाली।
हिंदुत्व की बहार हो गइल कि ओबामा रामचंद्र पधारो म्हारा देश।
पलाश विश्वास

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