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Monthly Archives: अक्टूबर 2014

कविता की ज़रूरत और कविता के सरोकार

Literature news साहित्य

कविता कार्यशाला इन्दौर। म. प्र. प्रगतिशील लेखक संघ की अशोकनगर इकाई ने दिनांक 5-6 अक्टूबर, 2014 को दो दिवसीय कविता कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में नई पीढ़ी के 20 से अधिक कवियों ने भागीदारी की। ये सब ऐसे कवि थे जिनकी कवितायें अभी किसी पत्रिका में प्रकाशित नहीं हुई हैं। पहले दिन कविता कार्यशाला में भोपाल से आये …

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भारतीय समाजवाद के पितामह आचार्य नरेंद्र देव

Acharya Narendra Dev

‘‘समाजवाद का ध्येय वर्गहीन समाज की स्थापना है। समाजवाद प्रचलित समाज का इस प्रकार का संगठन करना चाहता है कि वर्तमान परस्पर विरोधी स्वार्थ वाले शोषक और शोषित, पीड़क और पीडि़त वर्गों का अंत हो जाए; वह सहयोग के आधार पर संगठित व्यक्तियों का ऐसा समूह बन जाए जिसमें एक सदस्य की उन्नति का अर्थ स्वभावतः दूसरे सदस्य की उन्नति …

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राजनीति की बलिवेदी पर इतिहास की बलि

Ram Puniyani राम पुनियानी, लेखक आई.आई.टी. मुंबई में पढ़ाते थे और सन् 2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं।)

मुस्लिम शासकों के आगमन के बहुत पहले से भारत में शूद्रों को अछूत माना जाता था और वे समाज के सबसे दमित और शोषित वर्ग में शामिल थे। उत्तर-वैदिक गुप्तकाल के बाद से अछूत प्रथा और जाति व्यवस्था की क्रूरता और उसकी कठोरता में वृद्धि होती गई।

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आचार्य नरेंद्रदेव जयंती पर संगोष्‍ठी 30 को

national news

आचार्य नरेंद्रदेव जयंती पर संगोष्‍ठी विषय : आचार्य नरेंद्रदेव और अहिंसा वक्‍ता : अनिल नौरिया (सीनियर फेलो, नेहरू मेमोरियल म्‍यूजियम एंड लायब्रेरी) अध्‍यक्षता : डॉ प्रेम सिंह स्‍थान : गांधी शांति प्रतिष्‍ठान, दीनदयाल उपाध्‍याय मार्ग, नई दिल्‍ली तारीख : 30 अक्‍तूबर 2014 समय : अपराहन 2 बजे आप सादर आमंत्रित हैं।  सुरेंद्र कुमार सचिव, गांधी शांति प्रतिष्‍ठान

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आने वाले वक्त में मील का पत्थर साबित होगा बीकानेर कला एवं साहित्य उत्सव

Literature news साहित्य

कला क्या है? | What is art? प्राणियों के विकास में चरम कूट मानव है, दृष्टि का अद्यतन आद्ययतम रूप जीवन का चरम बिंदु ” अशरफ़-उल-मख़्लूक़ात (ashraf-ul-makhluqat)” मानवीय जीवन का विकास सभ्यता की सतत् विकसित होती गयी मंजिलों के मानदण्ड से मापा जाता है। प्राणियों में जो स्थान मानव का है, सभ्यता के परिवेश में वही संदर्भ संस्कृति का है। …

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पिछड़े मुसलमान और मुस्लिम आरक्षण

News Analysis and Expert opinion on issues related to India and abroad

A conference of backward class Muslims in Patna लगभग 2 वर्ष पहले मुझे पटना में पिछड़े वर्ग के मुसलमानों के एक सम्मेलन को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया गया था। इस सम्मेलन का आयोजन ‘‘तहरीक-ए-पसमांदा मुस्लिम समाज‘‘ ने किया था। सम्मेलन में लगभग 400 लोग उपस्थित थे। हर वक्ता को केवल तीन-चार मिनट बोलने के लिए कहा गया और …

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फिर उठी भोजपुरी के संवैधानिक मान्‍यता की मांग

National News

Demand to include Bhojpuri in eighth schedule of constitution नई दिल्‍ली: भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग  ()एक बार फिर बहुत जोर-शोर से उठाई गई है। अवसर था भोजपुरी समाज दिल्‍ली द्वारा इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (India International Center) में आयोजित समाज के अध्‍यक्ष अजीत दुबे द्वारा लिखित पुस्‍तक “तलाश भोजपुरी भाषायी अस्मिता की” के विमोचन …

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सुधार की आवश्यकता है भारतीय शिक्षा पद्धति में

News Analysis and Expert opinion on issues related to India and abroad

परिवर्तन शाश्वत् है- तो देश, काल व परिस्थिति के अनुसार शिक्षा भी परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। शिक्षा समाज, परिवर्तन का प्रेरक बल है, वही शिक्षक परिव्राजक है। आने वाले समय में शिक्षा की परिभाषा में व्यापक परिवर्तन करने होंगे, जिससे शिक्षा उपयोगी और लक्ष्य आधारित हो तथा वर्तमान शिक्षण प्रणाली के दोष दूर हों अर्थात् अब रटने वाले तोते को शिक्षा, उद्योग, कारखानों और अन्य स्थलों पर व्यस्त रखकर सीखाना पड़ेगा।

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Fake “Love Jihad”!

Just in, Breaking News.

It is now confirmed that the young woman from a village in Meerut who had earlier alleged that she was abducted, gang-raped and then forced to convert to Islam has now approached the Meerut police to seek protection from her own family. She has told the police that her earlier statements were completely false and that she had entered into …

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जाति और धर्म की राजनीति विरासत में मिली है लोहिया के उत्तराधिकारियों को

opinion, debate

लोहिया, आंबेडकर और गाँधी (भाग-3) (यह आलेख रोशन प्रेमयोगी के उपन्यास ‘आजादी : टूटी फूटी’ की समीक्षा नहीं हैं, पर उसके बहाने लोहिया के समाजवाद की आलोचना है।)  उपन्यास में जो लोहिया आंबेडकर-गाँधी विवाद को देश तथा समाज की लड़ाई न मानकर दो नेताओं का अन्तर्द्वन्द्व और हितों का टकराव मान रहे थे, वे दलितों की लड़ाई में विरोधी के …

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