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4 मार्च को जंतर मंतर पर परमाणु ऊर्जा के खिलाफ ‘जनसंसद‘

फुकुशिमा अब और नहीं! परमाणु बिजलीघरों को बन्द करो!
चुटका परमाणु संयंत्र रद्द करो!!
परमाणु ऊर्जा के खिलाफ धरना एवं प्रदर्शन
3 मार्च, यादगारे शाहजहांनी पार्क, भोपाल (म.प्र.), एवं
जनसंसद, 4 मार्च, जंतर मंतर, नई दिल्ली
आज से तीन साल पहले, 11 मार्च 2011 को जापान के फुकुशीमा परमाणु बिजलीघर में भयावह हादसा हुआ था। इससे पहले अमेरिका के ‘थ्री माइल आइलैण्ड‘ और भूतपूर्व सोवियत संघ के ‘चेर्नोबील परमाणु बिजलीघरों‘ में बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी थी। इन हादसों ने बार-बार यह साबित किया है कि तकनीकी विकास के मौजूदा स्तर को देखते हुए परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल न तो सुरक्षित है और न ही सस्ती है।
कथित रूप से विकसित देशों में परमाणु ऊर्जा के खिलाफ आन्दोलन तेज हो रहा है, जिसके कारण वहां की सरकारें सभी चालू परमाणु बिजलीघरों को बन्द करने के लिए बाध्य हुयी हैं। लेकिन बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के हित में भारत देशों की सरकारें नए परमाणु बिजलीघरों का निर्माण करने के लिए इन कम्पनियों से तकनीकी और रिएक्टरों का आयात कर रही हैं। इसके लिए कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार ने जापान के साथ परमाणु संधि पर हस्ताक्षर किया है, जबकि भाजपा जैसी विपक्षी पार्टियां इस मामले में मौन साधे हुए हैं। यह साम्राज्यवादी हुक्मशाही के समक्ष इनके आत्म-समर्पण को दर्शाता है। हमारे देश में भी परमाणु ऊर्जा के खिलाफ जनता का प्रतिरोध तेज हो रहा है फिर भी, विपक्षी पार्टियों के साथ मिलकर संप्रग सरकार देश भर में करीब दो दर्जन नए परमाणु बिजलीघर थोपने का प्रयास कर रही है। यह जनता के हितों पर खुला हमला है।
मध्यप्रदेश में स्थानीय जनता के प्रबल विरोध को दरकिनार करते हुए मंड़ला जिले के चुटका में भी परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाया जा रहा है इसके लिए पिछले साल दो बार तथाकथित ‘जन-सुनवाई‘ करवाने का प्रयास किया गया था लेकिन व्यापक विरोध को देखते हुए सरकार को दोनों ही बार सुनवाई रद्द करनी पड़ी। अंततः तीसरी बार केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर बन्दूक की नोंक पर तथाकथित जनसुनवाई 17 फरवरी को जैसे-तैसे पूरी कर ली। परमाणु सयंत्र के खिलाफ अभूतपूर्व जनप्रतिरोध को रोकने और संघर्षरत जनता को डराने के लिए हथियारबंद पुलिस कि मदद से जिला प्रशासन ने कर्फ्यू जैसे हालात बना दिए थे। सयंत्र का विरोध करने वालों को जनसुनवाई स्थल पर पहुँचने से रोकने के लिए हरसंभव हथकंडे अपनाये गये। इन सब के बाबजूद जनता ने राजकीय आतंक और तानाशाही का मुहतोड़ जबाब दिया और जनसुनवायी के दो दिन पहले से ही धरना शुरू किया, सोलह फरवरी को दो हजार और अंतिम दिन पांच हजार से अधिक लोगों ने इस तथाकथित जनसुनवायी का विरोध किया।
इसी संघर्ष को आगे ले जाने के उद्देश्य से चुटका व आसपास के गांवों के लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाते हुए भोपाल में आगामी 3 मार्च को यादगारे शाहजहांनी पार्क, भोपाल में सुबह 10 बजे से धरना एवं प्रदर्शन किया जायेगा और अगले दिन 4 मार्च को जंतर मंतर, नई दिल्ली में परमाणु ऊर्जा के खिलाफ ‘जनसंसद‘ का आयोजन किया गया है।
इस संघर्ष में जनता की मांग है कि –
– चुटका परमाणु संयंत्र रद्द करो। – सभी नव प्रस्तावित परमाणु संयंत्रों को रद्द करो। – सभी चालू परमाणु संयंत्रों को बंद करो। – वर्तमान में चालू एवं प्रस्तावित यूरेनियम खदानों परा रोक लगाओ।
– सार्वभौमिक परमाणु निशस्त्रीकरण लागू करो। – वैकल्पिक अक्षय ऊर्जा स्रोतों का विकास करो।
– जनपक्षीय ऊर्जा नीति समेत विकास का वैकल्पिक प्रतिमान तैयार करो।
हम सभी परमाणु-विरोधी आन्दोलनों, मजदूरों, किसानों, विद्यार्थियों, नौजवानों, समाज के उत्पीडि़त वर्गों एवं तबकों तथा प्रबुद्ध नागरिकों से अपील करते हैं कि वे इस धरना व प्रदर्शन और जनसंसद में शामिल हों और परमाणु ऊर्जा के खिलाफ चल रहे संघर्ष का हिस्सा बनें। आइए, हम एकजुट हो जाएं और सरकार को मौजूदा परमाणु नीति को रदद करने के लिए बाध्य कर दें।
चुटका परमाणु विरोधी संघर्ष समिति, अखिल भारतीय परामणु ऊर्जा विरोधी जन पहल, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (म.प्र.), गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (म.प्र.), भारत की कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी-लेनिनवादी (म.प्र.), भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन,शिक्षा अधिकार मंच, भोपाल, मध्य प्रदेश महिला मंच
 संपर्क – नौरतन दूबे (चुटका)- 9691375233य विजय (भोपाल)- 9981773205, लोकेश (भोपाल)- 9407549240

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