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सफदर की याद : बलराज साहनी और मंटो ने इंसानी तहजीब को दिशा दी

सफदर की याद : बलराज साहनी और मंटो ने इंसानी तहजीब को दिशा दी (यह लेख जनवरी २०१३ में लिखा गया था। आज भी प्रासंगिक है।) शेष नारायण सिंह 24 साल पहले कुछ राजनीतिक गुंडों ने दिल्ली के कलाकार, सफ़दर हाशमी को बहुत ही क्रूर तरीके से मार डाला था। सफ़दर हाशमी पर हमला उस दिन हुआ जब वे मजदूरों …

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पता नहीं किनके लिये ‘मंटो’ फिल्म की पटकथा लिखी गई है ?

पता नहीं किनके लिये ‘मंटो’ फिल्म की पटकथा लिखी गई है ? लेखक की कहानियां और लेखक (फिल्म ‘मंटो’ पर एक प्रतिक्रिया ) –अरुण माहेश्वरी कल मंटो फिल्म देखी। पता नहीं किनके लिये इस फिल्म की पटकथा लिखी गई है। जिन्होंने मंटो की कहानियों को नहीं पढ़ा हैं और मंटो के साहित्य की चर्चा से परिचित नहीं है, हम नहीं …

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स्वतंत्रता दिवस : तय तो यह (नहीं) हुआ था

Narendra Modi new look

सबसे पहले बायां हाथ कटा फिर दोनों पैर लहूलुहान होते हुए टुकड़ों में कटते चले गए खून दर्द के धक्के खा-खाकर नसों से बाहर निकल आया था।  -शरद बिल्लौरे तय तो यही हुआ था, स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले से अपने भाषण में प्रधानमंत्री (Prime Minister’s speech from Red Fort on Independence Day) ने जिस तरह से पाक अधिकृत कश्मीर (Pakistan …

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बालिका सुधारगृह में तैयार की जातीं देवदासियां…

बालिका सुधारगृह में तैयार की जातीं देवदासियां… राजीव मित्तल बहुत शरीफ शब्द का इस्तेमाल किया है यहां मैंने… देवदासी…मंटो ने तो उपासनागृहों तक को नहीं बख्शा और उन्हें रंडीखाना बताया था, जहां ईश्वर की बोली लगायी जाती है.. बालिका सुधारगृह को क्या नाम देते मंटो.. सोचिये….खैर जाने दीजिए… यह 13 साल पुरानी रिपोर्ट है..कई ने पढ़ी भी होगी..लेकिन आज के …

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हिंदी पत्रकारिता पर विधवा विलाप का कोई अर्थ नहीं, प्रभाष जोशी ने क्या कहा था, सुनिये

हिंदी पत्रकारिता पर विधवा विलाप का कोई अर्थ नहीं, प्रभाष जोशी ने क्या कहा था, सुनिये राजीव मित्तल चंडीगढ़ में 1991 का वो महीना, जिसके एक दिन एक होटल में जनसत्ता की वर्षगांठ मनाने की रस्म बड़े बेमन से निभाई जा रही थी.. प्रभाष जोशी को तो होना ही था.. थे भी लेकिन अवसाद से घिरे हुए.. कुछ महीने पहले …

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#StandWithAMU : ये मेरा चमन, जिसे उजड़ने से बचाने को वे कलम कागज़ लेकर बन्दूक़ का सामना बखूबी कर रहे हैं

असरार-उल-हक़ मजाज़ के नाम दीपक विद्रोही की पाती जनाब असरार-उल-हक़ मजाज़ साहब आपको ये ख़त आपके जाने के कई बरसों बाद लिख रहा हूँ और जानता हूँ कि आप तक नहीं पहुँच सकता, लेकिन इसके बाद भी आप तक पहुँच ही जाएगा। मामला कुछ ऐसा है कि आप की कुलियात रखी हुई है, जिसे अब तक खोलने की ज़हमत नहीं …

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डरी हुई सरकार लोगों को डरा रही है, योगी सरकार के खिलाफ सड़क पर युवा करेगा विपक्ष का निर्माण

लखनऊ 11 फरवरी 2018। शाहिद आजमी की शहादत की 8वीं बरसी पर रिहाई मंच ने सामाजिक न्याय के लिए संघर्षरत प्रदेश भर के नेताओं का सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन में योगी राज में दलितों, पिछड़ों और मुसलमानों के खिलाफ बढ़ती हिंसा और फर्जी मुठभेड़ों का मुद्दा छाया रहा है। सम्मेलन ने 9 सूत्रीय प्रस्ताव पारित करते हुए प्रदेश व्यापी आंदोलन …

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प्रतापगढ़ की राबिया मामले की हो निष्पक्ष जाँच – रिहाई मंच

शाहिद आज़मी की शहादत की आठवीं बरसी पर में लखनऊ रिहाई मंच करेगा 11 फरवरी को सम्मेलन लखनऊ निशातगंज के कैफ़ी आज़मी एकेडमी में दमन के खिलाफ आवाज़ बुलंद  करेगा युवा नेतृत्व जातीय- सांप्रदायिक हिंसा और फर्जी मुठभेड़ के खिलाफ होगा सम्मेलन लखनऊ 8 फ़रवरी 2018. रिहाई मंच शाहिद आज़मी की शहादत की आठवीं बरसी पर रिहाई मंच जातीय हिंसा, …

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11 फ़रवरी को जातीय- सांप्रदायिक हिंसा और फर्जी मुठभेड़ों के खिलाफ लखनऊ में सम्मेलन

शाहिद आज़मी की शहादत की आठवीं बरसी पर सामाजिक न्याय के लिए संघर्षरत दोस्तों की मुलाकात सम्मेलन में भीम आर्मी, अम्बेडकरवादी छात्र सभा, न्याय मंच बिहार, बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच, अम्बेडकर भगत सिंह विचार मंच, दलित–आदिवासी पिछड़ा अल्पसंख्यक न्याय मंच, भारतीय किसान यूनियन, जन मंच, भगत सिंह छात्र नौजवान सभा और विश्वविद्यालयों के नेता होंगे शामिल. लखनऊ 10 फ़रवरी 2018. …

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दक्षिण एशिया में जाति की समस्या और बाबा साहेब आंबेडकर

मज़हबी राज्यसत्ता कभी भी दलितों और वंचितों के साथ न्याय नहीं कर पायेगी विद्या भूषण रावत सर्वप्रथम मैं सर गंगा राम हेरिटेज फाउंडेशन का धन्यवाद करना चाहता हूँ कि उन्होंने बाबा साहेब आंबेडकर और जाति उन्मूलन कि सिद्धांत पर यहाँ ये कार्यक्रम आयोजित किया। लगभग 82 वर्ष पहले जात पात तोड़क मंडल, लाहौर ने डाक्टर आंबेडकर को जातियों का सम्पूर्ण …

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सेक्टर 7 में काबुलीवाला

राजीव मित्तल बहुत मायूसी में दिन गुज़र रहे थे इस बियाबान सेक्टर में..सब कुछ अनजान..रास्ते भी, लोग भी, मकान भी, मोड़ भी, चेहरे भी..और कल की घटना तो अब तक टोहके मार रही थी.. तीन बजे 26 सेक्टर के लिए उस उदास सड़क पर उससे भी ज़्यादा उदासी से कदम बढ़ा रहा था कि एक कार धड़ाक से बगल में …

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अमरनाथ तीर्थयात्रियों पर हमला : सलीम ने इसलिए नहीं बचाया कि वह मुसलमान था, बल्कि इंसान था

ईश मिश्र किसी भी निहत्थे इंसान या इंसानों के समूह पर हथियारबंद या झुंडबंद कायराना हमला सर्वथा, कठोरतम शब्दों में निंदनीय है। जो लोग कुछ रोज पहले गोरक्षकों के खूनी तांडव के विरोध में जंतर-मंतर पर 'नॉट इन माई नेम' तख्तियों के साथ प्रदर्शन में शामिल थे, वे फिर अमरनाथ तीर्थ यात्रियों पर कायराना हमले के विरुद्ध आवाज उठाने के …

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संविधान नहीं नवउदारवाद का अभिरक्षक राष्ट्रपति

प्रेम सिंह  एक बार फिर नवउदारवाद        पिछली बार की तरह इस बार भी राष्ट्रपति चुनाव लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। राष्ट्र के सर्वोच्च संवैधनिक प्रमुख के चुनाव के अवसर पर चर्चा होना अच्छी बात है। इस अवसर पर चर्चा के कई बिंदु हो सकते है। मसलन, चर्चा में पिछले राष्ट्रपतियों के चुनाव, समझदारी और विशेष कार्यों का …

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हिन्दू कालेज में ‘जनता पागल हो गई है’, ‘खोल दो’

  दिल्ली।  हिन्दू कालेज की हिन्दी नाट्य संस्था 'अभिरंग' द्वारा कालेज पार्लियामेंट के वार्षिक समारोह 'मुशायरा' के अन्तर्गत दो नाटकों का मंचन किया गया। भारत विभाजन के प्रसंग में सआदत हसन मंटो की प्रसिद्ध कहानी 'खोल दो' तथा शिवराम के चर्चित नाटक 'जनता पागल हो गई है' का मंचन हिन्दू कालेज के खचाखच भरे प्रेक्षागृह में हुआ। राजसत्ता और पूँजीवादी …

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पुरस्कार के बहाने शुभम श्री की कविता ‘पोएट्री मैनेजमेंट’-यह कविता ‘कविता’ के धंधे पर सवाल उठाती है

शैलेन्द्र कुमार शुक्ल शुभम श्री की कविता ‘पोएट्री मैनेजमेंट’ को अभी भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार से नवाजा गया। पुरस्कार की घोषणा के बाद कविता पर लगातार विवाद जारी है। बौद्धिक खेमे के लोग सहमति और असहमति लगातार दर्ज करा रहे हैं। उनकी इस कविता को उभरते आलोचक कविता न मनाने की पेशकश कर रहे हैं वहीं कुछ सजग साहित्यिक इसमें …

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कामरेड जसपाल सिंह रंधावा, खैराबाद-धर्मान्धता की पराकाष्ठा के माहौल में आदमी जब इंसान बना

मुलाकात : कामरेड जसपाल सिंह रंधावा, खैराबाद अमृतसर से कनाडा तक एक सफ़र  (उत्तरी अमेरिका में पिछले २५ सालों से अधिक समय से भगत सिंह का शहीदी दिवस मानने वाली संस्था इंडो कनेडियन वर्कर्स एसोसिएशन की एक बैठक के बाद उसके एक बुजुर्ग सदस्य जसपाल सिंह रंधावा ने बस यूं ही पंजाब से जुड़े अपने अनुभवों को गैर रस्मी तौर …

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सलाम इन्तिज़ार हुसैन साहिब

प्रख्यात उर्दू कथाकार इन्तिज़ार हुसैन का इन्तिकाल [button-red url=”#” target=”_self” position=”left”]चंचल[/button-red] पाकिस्तान के अदब का बड़ा हिस्सा अपनी जमीन से उखड़ा हुआ रहा है। कहने को उसके मुल्क का नाम पाकिस्तान रहा, और ये लोग सिद्दत से इस कोशिश में भी रहे कि लाख बदहाली हो लेकिन अपने मुल्क पाकिस्तान को इन लोगों ने बेहुर्मत कभी नहीं किया, न ही …

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बहुजनों का आत्मघाती जातिवाद ही मनुस्मृति शासन को बहाल रखे है

अरुंधति राय ने जो असल एजेंडा ब्राह्मणवाद का बताया है, उसका आशय ब्राह्मणों को गाली नहीं है आज का वीडियो टाक मैं अपनी पुरानी भूमंडलीकरण कविताओं के पाठ से शुरू कर रहा हूं और कोशिश रहेगी कि अरुंधति राय ने जो असल एजेंडा ब्राह्मणवाद का बताया है, उसका आशय ब्राह्मणों को गाली नहीं है, हम यह जरूर साफ करें। अव्वल …

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#धर्म के नाम #राष्ट्रद्रोह का जलजला है प्रलयंकर यह #बलात्कार #सुनामी

#CALIBAN#Mandate#ISIS Execution unabated #Pay Scales #Manto# Reforms# Tempest# Avatar#Toba Tek Singh ”Manto’ relevant when free speech not easy in India,  Pakistan’! Seventh Pay Commission result! पलाश विश्वास जनसत्ता निकले बत्तीस साल और हम भी डिजिटल! प्रमोशन एक्सटेंशन फिर हारी पहचान या फिर कर्मफल, फिक्र न करें बेमतलब मेरी जान, हम तो निमित्तमात्र हैं, मरे हुए है। कब जिंदा थे हम …

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फासिज्म मुकम्मल है और परिंदों को भी चहचहाने की इजाजत नहीं हैं!

कल हमसे अपने डाक्साहब मांधाता सिंह ने पूछा कि आप अमुक लेखक को जानते हैं जिनकी सैकड़ों किताबें छपी हैं और वे अनेक भाषाओं के विद्वान हैं। हमने पूछा कि उनने लिखा क्या है। जाहिर सी बात है कि विद्वता की पांत में हम कहीं नहीं हैं और न भद्रलोक संस्कृति के सौंदर्यबोध और भाषाशास्त्र और अनुशासन से मुझे कोई …

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इंसानों के खून का प्यासा नागपुरी गिरोह खूंखार मुद्रा में आ चुका है

मोदी का विकास माने कद्दू मोदी का विकास देश को 1947 की स्थिति में ले जाना चाहता है वर्तमान समय में देश की मानसिक हालत 1947 के आस पास पहुँच गयी है और सही मायने में भारत पाकिस्तान विभाजन की जिस त्रासदी का वर्णन भीष्म साहनी ने अपने उपन्यास तमस में किया था या सहादत अली मंटो ने अपनी कहानी …

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कबीर दास होते तो क्या उन्हें मजहबी लफंगे बख्श देते?

फासीवाद का विरोध उतना आसान भी नहीं है, दोस्तों। जन्माष्टमी से बड़ा किसी अध्यापक का जन्मदिन न हो, हिंदू राष्ट्र ने चाकचौबंद इंतजाम किया और जन्मष्टमी से एक दिन पहले, देश के सबसे बड़े शिक्षक का जनमदिन मना लिया गया। निर्णायक लड़ाई हर हाल में जनता लड़ती है। बन सको तो बन जाओ जनता के हथियार। पलाश विश्वास फासीवाद का …

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टिटवाल का कुत्ता और पत्रकारिता की प्रीति जिंटा

एक दिन में पच्चीस हज़ार करोड़ स्वाहा हो गए …. स्वाहा हो जाने के बाद कौन सा वैदिक मन्त्र पढ़ा जाता है …. पता नहीं….. मुंह से एक बार जय हो ज़रूर निकला….. जब सभी चैनल सियारी मुद्रा में स्वाहा स्वाहा कर रहे थे तो रवीश कुमार कैमरामैन को साथ लेकर मज़दूर बस्ती की ओर निकल लिए ….. और अपने …

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फ़ोन पर लड़की, चैनल पर नमो-नमो

पतली गली से कटने का कष्ट या तो मंटो ने झेला या अपन ने…. कहाँ तो ससुरे ग़ुलाम कश्मीर के मुजफ्फराबाद तक से फ़ोन आते थे, सर जी हमें अपना स्टिंगर ही बना लीजिये…… सुना है आपके साथ काम करने में बहुत मज़ा आता है…… एकाध एके चाहेंगे तो भिजवा देंगे…… और अब……. दिन में 18 घंटे फ़ोन से लगे …

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इस्मत चुग़ताई ने खुद बदनामियां झेल कर औरत को उसका हक़ दिलाया

लखनऊ में तारीख़ १४ अगस्त २०१५ में इस्मत चुग़ताई के जन्म शताब्दी समारोह के सिलसिले में इप्टा, लखनऊ ने ‘महत्व इस्मत चुग़ताई’ कार्यक्रम आयोजित किया। अध्यक्षता जेएनयू के पूर्व प्रोफ़ेसर और उर्दू इल्म-ओ-अदब में बहैसियत समालोचक दख़ल रखने वाले शारिब रुदौलवी ने की। अलावा उनके मंच पर आबिद सुहैल, रतन सिंह, सबीहा अनवर, वीरेंद्र यादव और शबनम रिज़वी की मौज़ूदगी …

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फिर हर आदमखोर आखिर मारा जाता है कभी न कभी!

अखबार के साथ रोटी फ्री बांटना शुरु करें अब। मांस का दरिया समेट लें। गौरतलब है कि हर पेट के लिए अगर रोटी हो मयस्सर तो समझ लो, सारे वाद विवाद गैरजरूरी है कि वहींच हो गयी क्रांति। समझ लो। पलाश विश्वास अमां यार, ये क्या गजब ढा दिया कि बोतली पुरानी बदल दी। नई बोतल है तो शैंपेन वैंपेन …

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विभाजन की लकीरें

विभाजन की लकीरें सआदत हसन मंटो ने अपनी मशहूर रचना ‘टोबा टेक सिंह’ में एक मेंटल हॉस्पिटल का जिक्र करते हुए बताया था कि सन् 1947 में सिर्फ हिन्दुस्तान के लोग और ज़मीन नहीं बँटे थे, बल्कि मानसिक रोगियों का भी विभाजन हुआ था। दरअसल कहानी में ये मानसिक रोगी तथाकथित होशमंदों के प्रतीक थे। भारतीय उपमहाद्वीप के उस विभाजन …

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कथनी और करनी का विभेद नवारुण दा का जीवनदर्शन नहीं रहा

हमारे नवारुण दा और उन्हें हम जैसे जानते हैं पलाश विश्वास शुरू में ही यह साफ कर दिया जाये कि नवारुण भट्टाचार्य का रचनाकर्म सिर्फ जनप्रतिबद्ध साहित्य नहीं है,  वह बुनियादी तौर पर प्रतिरोध का साहित्य है और वंचितों का साहित्य भी। मंगलेश डबराल के सौजन्य से यह मृत्यु उपत्यका मेरा देश नहीं है,  के बागी कवि जिस नवारुण को …

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हारने, शहादत के लिए नहीं, मोर्चा फतह करने के लिए एक मुकम्मल लड़ाई लड़ते हैं नवारुणदा के पात्र

हमारे नवारुण दा और उन्हें हम जैसे जानते हैं-2 पलाश विश्वास वर्चस्ववादी बंगीय समाज में इस रचनादृष्टि के लिए कोई स्पेस अभी तैयार हुआ ही नहीं है। आदिवासी जनविद्रोह को कथावस्तु बतौर पेश करने वाली उनकी मां महाश्वेता दी भी सत्ता हेजेमनी के खिलाफ इतना डट कर युद्धरत नहीं रही हैं और न उनके साहित्य में वह अंत्यज अस्पृश्य जीवन …

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नवारुणदा के बहाने- फिलवक्त प्रभाष जोशी से बड़े पत्रकार हैं ओम थानवी !

नवारुणदा के बहाने- फिलवक्त प्रभाष जोशी से बड़े पत्रकार हैं ओम थानवी ! नवारुणदा, हम फैताड़ु फौज के साथ लामबंद हैं और इस छिनाल कयामत के खिलाफ कोई बैरिकेड जरूर बनायेंगे, यकीनन। पलाश विश्वास आज की दिनचर्या की शुरुआत मैंने फेसबुक वाल पर अविरल मूत्रपातमध्ये इस पोस्ट के साथ शुरु की हैः Forgive me my male friends. I decided top-most …

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जीवंत रंगमंच में अग्निकांड या फिर आगजनी?

नवारुण दा के बागी साहित्य के मंचन के लिए मशहूर रंगकर्मी सुमन मुखोपाध्याय और बागी नाटककार कौशिक सेन के नाटकों के मंचन के मध्य अकादमी में लगी आग पलाश विश्वास अकादमी आफ फाइन आर्ट्स, कोलकाता में आग लगने के बाद सुमन मुखोपाध्याय के वक्तव्य पर गौर करें कि उन्होंने कहा है कि अजीब बात है कि मेरे और कोशिक के …

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वास्ता नहीं उस रब से, जो कायनात पर कहर बरपाये

देश के कोने-कोने में कश्मीर और गुजरात सजाये जा रहे हैं पलाश विश्वास उस रब से वास्ता नहीं, जो कायनात पर कहर बरपाये। उस मजहब से कोई नाता नहीं जिसका इंसानियत से सरोकार न हो। वह राजनीति किसी काम की नहीं है, जो मनुष्य और प्रकृति के पक्ष में खड़ी नहीं होती। वह विचारधारा पाखंड है, जिसमें सामाजिक यथार्थ के …

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शहीद भगतसिंह अमर रहे ! इंकलाब जिन्दाबाद !! क्रांति अमर रहे !!!

श्रीराम तिवारी  आज से 83 साल पहले आज ही के दिन साम्राज्यवादी अंग्रेज हुक्मरानों द्वारा महज एक खास क्रांतिकारी अर्थात् शहीद भगतसिंह ही नहीं अपितु एक कालजयी शानदार विचारधारा को भी फांसी दी गई थी। जो लोग भगतसिंह को केवल एक क्रांतिकारी या शहीद मानते हैं उनकी निष्ठा को नमन। किन्तु वास्तव में भगतसिंह एक महानतम विचारक, चिंतक, प्रगतिशील साहित्यकार, …

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वाह रे अय्यर

नई दिल्ली। प्रोफ़ेसर चमन लाल की गणना स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों पर गम्भीर काम करने स्कॉलर्स में होती है। उधर पूर्व नौकरशाह और कांग्रेस के भौंपू सांसद मणिशंकर अय्यर पढ़े लिखे राजनेताओं में शुमार किए जाते हैं लेकिन एक घटना के बाद अय्यर का जो रूप सामने आया है वह हैरान करने वाला है। दरअसल प्रोफ़ेसर चमन लाल ने अय्यर को …

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एक सफ़दर- अनेक सफ़दर- हरेक सफ़दर

सफ़दर हाशमी- शहादत के पच्चीस बरस; “मजदूर वर्ग और संस्कृति” सांस्कृतिक वर्चस्व का हमला और तीखा और सर्वग्रासी हुआ है वैश्वीकरण के इस दौर में बादल सरोज एक जनवरी 1989 को साहिबाबाद की मजदूर बस्ती में सीटू की हड़ताल तैयारी मुहिम में मजदूरों को जगाने में जुटे जन नाट्य मंच के एक नुक्कड़ नाटक पर जघन्य कायराना हमले में सफदर …

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वर्धा में ‘मृच्छकटिक’

संस्कृत के कालजयी नाटक ‘मृच्छकटिक’ का हिंदी वि.वि.में मंचन चौदह सौ वर्ष के सामाजिक परिदृश्‍य को छात्रों ने किया प्रस्‍तुत बी. एस. मिरगे वर्धा, दि.31 अक्‍तूबर 2013: इतिहास में करीब चौदह सौ बरस पहले राजा व नाटककार शूद्रक द्वारा रचित संस्कृत के कालजयी नाटक ‘मृच्छकटिक’ (मिट्टी की गाड़ी) का मंचन महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के नाट्यकला एवं फ़िल्म …

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वी एन राय को हिमालय साहित्य सृजन सम्मान

हिमालय अंतरराष्ट्रीय महोत्सव 2013 अमित विश्‍वास महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय के कुलपति एवं ख्यातिलब्ध साहित्यकार विभूति नारायण राय को हिंदी साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिये हिमालय हेरिटेज रिसर्च एवं डेवलपमेंट सोसाइटी, सिक्किम द्वारा वर्ष 2013 का हिमालय अंतरराष्ट्रीय साहित्य सृजन सम्मान प्रदान किया गया है। यह सम्मान श्री राय को हिमालय अंतरराष्ट्रीय महोत्सव 2013 के अवसर …

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कुछ लोग दलित साहित्‍य की क्‍लोनिंग कर रहे हैं – प्रो. तुलसीराम

नंदी का बयान एकदम गलत है लेकिन मुकदमें चलाकर ऐसे सवाल हल नहीं हो सकते बी. एस. मिरगे   वर्धा, (सआदत हसन मंटो कक्ष)। दलित साहित्‍य में नेतृत्‍व का प्रश्‍न खड़ा हो गया है। भारतीय साहित्‍य में दलित साहित्‍य के प्रभाव को देखते हुए कुछ लोग दलित साहित्‍य की क्‍लोनिंग कर रहे हैं। यह मानना है सुविख्‍यात चिंतक प्रो. तुलसीराम …

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साहित्यक लम्पटों का शराबोत्सव

भंवर मेघवंशी बीस जनवरी से जयपुर में हूं, गले में जयपुर लिटरेचर फेस्टीवल का आईकार्ड लटका कर डिग्गी पैलेस में भारी भीड़ के बीच धक्के खा रहा हूं, कभी फ्रन्ट लोन, कभी मुगल टेंट, कभी दरबार हाल तो कभी बैठक के टेंट में मारा मारा फिर रहा हूं। ज्यादातर बातचीत अंग्रेजी भाषा में हो रही है वह भी विदेशी  लहजे में, …

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जैली

सआदत हसन मंटो   सुबह छह बजे पैट्रोल पंप के पास हाथ गाड़ी में बर्फ बेचने वाले को छुरा घोंपा गया। सात बजे तक उसकी लाश सड़क पर गुड़मुड़ी हुई पड़ी रही और उस पर बर्फ पानी बन टपकती रही। सवा सात बजे पुलिस लाश उठा कर ले गयी..बर्फ और खून वहीं सड़क पर पड़े रहे। फिर एक टांगा पास …

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व्यंग्य – आओ वार्ता करें

रतन जैसवानी वार्ता करना अच्छी बात है, कहावत है कि कुछ चीजों का हल सिर्फ वार्ता से ही संभव है। जैसे कोई आपको गालियां दे, तो उसे भला बुरा कहने की बजाय वार्ता कीजिए, पीट-पाट दे तो भी वार्ता करिए और अगर आपको धोबी पछाड़ देकर अस्पताल भी पहुंचा दे, तब भी वार्ता करना ही उचित है ! क्योंकि हम …

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बनारसी तहजीब का दस्तावेज़ है काशी का अस्सी

शेष नारायण सिंह अपने  देश में  साहित्यिक  रचनाओं को आधार बनाकर फ़िल्में बनाने का फैशन नहीं है लेकिन हर दौर में कोई फिल्मकार ऐसा आता है जो यह पंगा लेता है . ज़्यादातर फ़िल्में बाज़ार में पिट जाती हैं लेकिन कला की दुनिया में उनका नाम होता है . मुंशी प्रेमचंद, सआदत हसन मंटो , अमृत लाल नागर, फणीश्वर नाथ रेणु, अमृता  प्रीतम जैसे …

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बुंदेलखंड में बने विदर्भ जैसे हालात

अंबरीश कुमार लखनऊ , । सूखे और भूखे बुंदेलखंड में विदर्भ जैसे हालत पैदा हो रहे है । पिछले तीस दिन तीन किसान खुदकुशी कर चुके है। वर्ष २००९ २०१० का का आंकड़ा भी कोई कम नही था और इस साल की शुरुआत तीन किसानो की खुदकुशी से हो चुकी है । कड़ाके की ठंढ के बाद दिन में बढती …

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रोमांस को हर मोड़ पर आवाज़ दी नक्श लायलपुरी के गीतों ने

[button-red url=”#” target=”_self” position=”left”] शेष नारायण सिंह[/button-red] गीतकार नक्श लायलपुरी की नज्मों का एक संकलन आया है। ‘आँगन आँगन बरसे गीत’ नाम की यह किताब उर्दू में है। पिछले 50 से भी ज्यादा बरसों से हिन्दी फिल्मों में उर्दू के गीत लिख रहे नक्श लायलपुरी एक अच्छे शायर हैं। कविता को पूरी तरह से समझते हैं लेकन जीवनयापन के लिए फ़िल्मी गीत …

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अथ श्री कांदादेवः कथा, व्यंग्य

रतन जैसवानी कांदादेव अर्थात प्याज देवता, मराठी मानुश बोले तो कांदा और छत्तीसगढ़िया में गोंदली, अंगरेजी में ओनियन, सिंधी बोली में बसर वगैरह-वगैरह। रोज-रोज कांदादेव संबंधी लेख, व्यंग्य, कविता, कहानी, गजल, मुहावरे सुन-सुन के इसकी महिमा से मैं भी नहीं बच पाया। इकलौती पत्नी ने भी ताना मार ही दिया कि बड़े कलमकार बने फिरते हो, पर प्याज देवता के …

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30 साल का “सहमत”

Shesh Narain Singh शेष नारायण सिंह

सफदर हाशमी मेमोरियल ट्रस्ट -Safdar Hashmi Memorial Trust (सहमत) के तीस साल पूरे हो गए। इन तीस वर्षों में सहमत ने संस्कृति के मोर्चे (Culture front) पर फासिस्ट ताकतों (Fascist forces) के खिलाफ एक बहुत बड़े वर्ग को मंच दिया है। इस साल भी 1 जनवरी 2019 को सहमत की तरफ से एक सांस्कृतिक उत्सव का आयोजन किया गया है। सहमत …

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और कितने टोबा टेकसिंह ?

Saadat Hasan Manto was a Pakistani writer, playwright and author born in Ludhiana, British India. Writing mainly in the Urdu language, he produced 22 collections of short stories, a novel, five series of radio plays, three collections of essays and two collections of personal sketches.

और कितने टोबा टेकसिंह ”””””””””””””””’ ज़मीन बँट चुकी मुल्क का बँटवारा पूरा हुआ मंटो तुमनें लिखा ‘उधर खरदार तारों के पीछे हिंदुस्तान था इधर वैसे ही तारों के पीछे पाकिस्तान दरमियान में ज़मीन के उस टुकड़े पर जिसका कोई नाम नहीं था टोबा टेक सिंह पड़ा था’ टोबा टेकसिंह याने बिशन सिंह गाँव टोबा टेकसिंह का पागल किसान पड़ा है …

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जाने कब कौन किसे मार दे काफिर कह के…

Javed Anis जावेद अनीस, लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।

मजहबी आतंक के खिलाफ बगावत की जरूरत Rebellion needed against religious terror दिसम्बर 2012 को दिल्ली में “निर्भया काण्ड” ने सभी भारतीयों को गम और गुस्से से उबाल दिया था और इस हैवानियत को देख सुन कर पूरी दुनिया सहम सी गयी थी। नियति का खेल देखिये एक बार फिर सोलह दिसम्बर का दिन इंसानियत पर भारी साबित हुआ और …

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नेहरू जमाने का पटाक्षेप, लेकिन इसकी कीमत क्या, इसे भी बूझ लीजिये, बंधु!

Palash Biswas पलाश विश्वास पलाश विश्वास। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। हिंदी में पत्रकारिता करते हैं, अंग्रेजी के लोकप्रिय ब्लॉगर हैं। “अमेरिका से सावधान “उपन्यास के लेखक। अमर उजाला समेत कई अखबारों से होते हुए अब जनसत्ता कोलकाता में ठिकाना

नेहरु जमाने का पटाक्षेप, लेकिन इसकी कीमत क्या, इसे भी बूझ लीजिये, बंधु! दरअसल दो दलीय वेस्टमिन्स्टर शैली (Two-party westminster style) की लोकतांत्रिक वर्चस्ववादी (Democratic supremacist) इस राज्यतंत्र (Monarchy) में संघ परिवार (RSS) का जैसे कभी अंत हुआ नहीं है, वैसे ही कांग्रेस का अंत भी असंभव है (The end of Congress is also impossible)। नेहरु गांधी वंश (Nehru Gandhi …

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