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Search Results for: रवींद्र का दलित विमर्श

हिंदू राष्ट्र सिर्फ संघ परिवार का कार्यक्रम नहीं है

पलाश विश्वास बौद्धमय भारत के अंत के बाद ब्राह्मण धर्म के मनुस्मृति विधान की बहाली के लिए हिंदुत्व का पुनरूत्थान एक अटूट सिलसिला है, इसे समझे बिना नस्ली वर्चस्व के नरसंहारी राष्ट्रवाद का प्रतिरोध असंभव है। रवींद्र का दलित विमर्श औपनिवेशिक भारत में हिंदुत्व के उसी पुनरूत्थान के प्रतिरोध में है। 14 मई के बाद हमारी दुनिया सिरे से बदल …

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सामाजिक विषमता के खिलाफ मनुस्मृतिविरोधी लड़ाई को खत्म करना ही हिंदुत्ववादियों के हिंदू राष्ट्र का एजेंडा

रवींद्र का दलित विमर्श-30 गंगा और नर्मदा की मुक्तधारा को अवरुद्ध करने वाली दैवीसत्ता का फासिज्म आदिवासियों और किसानों के खिलाफ मुक्तधारा के लिए जल सत्याग्रह इसीलिए जारी रहेगा। पलाश विश्वास टिहरी बांध का उतना प्रबल विरोध नहीं हुआ और गंगा की अबाध जलधारा हमेशा के लिए नमामि गंगा के मंत्रोच्चार के बीच अवरुद्ध कर दी गयी। पुरानी टिहरी समेत …

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नर्मदा बांध विरोधी आंदोलन के खिलाफ दैवी सत्ता का आवाहन, हिटलर की आर्य विशुद्धता का सिद्धांत और नरहसंहार कार्यक्रम

रवींद्र का दलित विमर्श-27 ताशेर देश : मनुस्मृति व्यवस्था के फासीवाद पर तीखा प्रहार पलाश विश्वास नर्मदा बांध के खिलाफ आदिवासियों और किसानों के आंदोलन का दमन का सिलसिला जारी रखते हुए आज इसे देश के नाम समर्पित करते हुए दावा किया गया कि इसके निर्माण में विदेशी कर्ज की जगह मंदिरों के धन का इस्तेमाल किया गया है। यह …

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रवींद्र के खिलाफ भयंकर घृणा अभियान

रवींद्र का दलित विमर्श-24 पलाश विश्वास        रवींद्रनाथ टैगोर पर बचपन और किशोर वय में ही उत्तर भारत के कबीरदास और सूरदास के साहित्य का गहरा असर रहा है और संत सूफी साहित्यकारों के अनुकरण में ब्रजभाषा में उन्होंने भानुसिंह के छद्मनाम से बांग्ला लिपि में पदों की रचना की जो गीताजंलि से पहले की उनकी रचनाधर्मिता है  और ऐसा …

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महिमामंडन और चरित्रहनन के शिकार रवींद्रनाथ! फासीवादी राष्ट्रवाद के निशाने पर रवींद्र नाथ शुरू से हैं

रवींद्र का दलित विमर्श-22 पलाश विश्वास सवर्ण भद्रलोक विद्वतजनों ने नोबेल पुरस्कार पाने के बाद से लेकर अबतक रवींद्र के महिमामंडन के बहाने रवींद्र का लगातार चरित्र हनन किया है। रवींद्र साहित्य पर चर्चा अब रवींद्र के प्रेमसंंबंधों तक सीमाबद्ध हो गया है जैसे उनके लिखे साहित्य को वैदिकी धर्म के आध्यात्म और सत्तावर्ग के प्रेम रोमांस के नजरिये से …

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क्या यह हत्यारों का देश है? गौरी लंकेश की हत्या के बाद 25 कन्नड़, द्रविड़ साहित्यकार निशाने पर!

हम किस देश के वासी हैं? रवींद्र का दलित विमर्श-20 पलाश विश्वास इंडियन एक्सप्रेस की खबर है। गौरी लंकेश की हत्या के बाद कन्नड़ के 25 साहित्यकारों को जान के खतरे के मद्देनर सुरक्षा दी जा रही है। जाहिर है कि दाभोलकर, पनासरे, कुलबर्गी, रोहित वेमुला, गौरी लंकेश के बाद वध का यह सिलसिला खत्म नहीं होने जा रहा है। …

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गौरी लंकेश असुर संस्कृति की अनार्य सभ्यता की द्रविड़ प्रवक्ता थीं, इसीलिए उनका वध हुआ

  रवींद्र का दलित विमर्श-18 पलाश विश्वास                 कल हमने रवींद्र के दलित विमर्श के तहत रवींद्र के दो निबंधों जूता व्यवस्था और आचरण अत्याचार की चर्चा की थी। आचरण अत्याचार में जाति व्यवस्था की अस्पृश्यता पर प्रहार करते हुए रवींद्र ने लिखा है कि गाय मारने पर प्रायश्चित्त का विधान है लेकिन मनुष्य को मारने पर सामाजिक प्रतिष्ठा मिलती …

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संत कबीर को समझें तो रवींद्र और लालन फकीर को भी समझ लेंगे

  रवींद्र का दलित विमर्श-19 लालन फकीर  का मनेर मानुष गीतांजलि का प्राणेर मानुष। ज्यों-की -त्यों धरि दीन्हीं चदरिया। । पलाश विश्वास बौद्धमय बंगाल का अवसान ग्यारहवीं शताब्दी में हुआ। आठवीं सदी से लेकर ग्यारहवीं सदी तक बंगाल में बौद्ध पाल राजाओं का शासन रहा जिसका ग्यारहवीं सदी में सेन वंश के अभ्युत्थान के साथ अंत हुआ। सेन वंश के …

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मानवाधिकार के हनन के खिलाफ आवाज उठाना हिंदू और मुस्लिम राष्ट्रवाद दोनों के लिए राष्ट्रद्रोह है

  पलाश विश्वास आज सुबह हमारे एक पुराने मित्र, सरकारी अस्पताल के अधीक्षक पद से रिटायर शरणार्थी नेता ने फोन करके कहा कि आप हिंदुत्व के खिलाफ हैं और बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के बारे में कुछ भी नहीं लिखते। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आप लोग तो रोहिंग्या मुसलमानों के बारे में लिखेंगे और असम …

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नस्ली वर्चस्व का परमाणु राष्ट्रवाद अब हाइड्रोजन बम है

  रवींद्र का दलित विमर्श-सत्रह पलाश विश्वास नस्ली वर्चस्व के फासीवादी नाजी निरंकुश राष्ट्रवाद पश्चिम से और खासतौर पर यूरोप के साम्राज्यवादी राष्ट्रों से आयातित सबसे खतरनाक हाइड्रोजन बम है। फासीवादी अंध राष्ट्रवाद की कीमत जापान को हिरोशिमा और नागासाकी के परमाणु विध्वंस से चुकानी पड़ी है। रवींद्र नाथ ने जापान यात्रा के दौरान इस अंध राष्ट्रवाद के खिलाफ जापानियों …

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राष्ट्र मेहनतकश अवर्ण बहुजन बहुसंख्य जनगण की निगरानी, उनके दमन, उत्पीड़न सफाये और मानवाधिकार हनन का सैन्य तंत्र है

  रक्तकरबी(Red Oleanders)- राष्ट्रवाद वहीं है जो कुलीन सवर्ण सत्ता वर्ग का हित है। रवींद्र दलित विमर्श : 14 पलाश विश्वास मुझे नेट पर हिंदी में रक्तकरबी से संबंधित कोई सामग्री नहीं मिली है। अगर किसी के पास संबंधित सामग्री की जानकारी है तो कृपया शेयर करें। टीवी पर नोटबंदी पर बहस को लेकर हंसी आ रही थी क्योंकि मीडिया …

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सभ्यता का संकट : फर्जी तानाशाह बहुजन नायक नायिकाओं का सृजन और विसर्जन मनुस्मृति राजनीति की सोशल इंजीनियरिंग है

  रवींद्र का दलित विमर्श-15 पलाश विश्वास बंगाल के नबाव के दरबारी दो पूर्वज गोमांस की गंध सूंघने का आरोप में मुसलमान बना दिये गये थे तो रवींद्र के पूर्वज अछूत पीराली ब्राह्मण बन गये थे। नोबेल पुरस्कार मिलने से पहले सामाजिक बहिष्कार की वजह से अपने बचपन की अस्पृश्यता यंत्रणा पर उन्होंने कोई दलित आत्मकथा नहीं लिखी लेकिन उनकी …

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युद्ध अपराधियों के सत्ता संघर्ष में भारतवर्ष लापता… यह जनगणमन का भारतवर्ष नहीं

  रवींद्र का दलित विमर्श-11 जैसे भारतवर्ष है ही नहीं , जो मारकाट खूनखराबा करते रहे हैं, सिर्फ वे ही हैं। पलाश विश्वास रवींद्र नाथ टैगोर ने भारतवर्षेर इतिहास में लिखा था कि मारकाट खूनखराबा के इतिहास के नजरिये से देखें तो जैसे भारतवर्ष है ही नहीं, जो मारकाट खूनखराबा करते हैं, सिर्फ वे ही हैं। नस्ली दृष्टि से हम …

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भारत माता की जयजयकार करते हुए, वंदे मातरम गाते हुए देश की हत्या का यह युद्ध अपराध है

  रवींद्र का दलित विमर्श -10 पलाश विश्वास बेहद जल्दी में लिख रहा हूं और टाइपिंग में वर्तनी व्याकरण की गलतियां हो सकती है। हम आज रवींद्र पर अपनी चर्चा को थोड़ी विलंबित करने की सोच रहे थे। क्योंकि अभी तक वह संवाद शुरु नहीं हो सका है, जो हमारा मकसद है। कल ही हमने भारत के भविष्य की चर्चा …

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पुरखों के भारतवर्ष की हत्या कर रहा है डिजिटल हिंदू कारपोरेट सैन्य राष्ट्र!

  रवींद्र का दलित विमर्श- नौ रवींद्र अपने जीवन में भारत के भविष्य को लेकर इतने चिंतित क्यों थे? खंडित राष्ट्रीयता, विभाजन की नियति और फासीवाद की दस्तक इसकी मुख्य वजहें हैं। पलाश विश्वास हमने समकालीन ज्वलंत सवालों के संदर्भ में रवींद्र के दलित विमर्श पर संवाद का प्रस्ताव रखा था। इसी सिलसिले में रवींद्र की भारत परिकल्पना की आज …

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समूचे रवींद्र साहित्य पर बौद्धमय भारत की अमिट छाप

रवींद्र का दलित विमर्श-छह समूचे रवींद्र साहित्य की दिशा और समूची रवींद्र रचनाधर्मिता,  उनकी जीवनदृष्टि पर उसी बौद्धमय भारत की अमिट छाप है। पलाश विश्वास चंडाल आंदोलन के भूगोल में रवींद्र की जड़ें है जो पीर फकीर बाउल साधु संतों की जमीन है और उसके साथ ही बौद्धमय भारत की निरंतता के साथ लगातार जल जंगल जमीन के हकहकूक का …

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भारत शूद्रों का ही देश है

  रवींद्र का दलित विमर्श- पांच पलाश विश्वास नस्ली राष्ट्रवाद की जड़ें कितनी गहरी होती हैं अमेरिका में नस्ली हिंसा की ताजा घटनाओं से उसके सबूत मिलते हैं। अमेरिकी राष्ट्रवाद पर अब भी श्वेत आंतकवाद हावी है जो अमेरिकी साम्राज्यवाद का मौलिक चरित्र है, जिससे वह कभी मुक्त हुआ ही नहीं है। बाराक ओबामा के अश्वेत राष्ट्रपति की हैसियत से …

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रवींद्र की चंडालिका में बौद्धमय भारत की गूंज है तो नस्ली रंगभेद के खिलाफ निरंतर जारी चंडाल आंदोलन की आग भी है

  रवींद्र का दलित विमर्श-चार पलाश विश्वास रवींद्र की रचनाधर्मिता सिरे से सामाजिक यथार्थ की जमीन पर आधारित है।वे भारतीय समाज की सबसे बड़ी समस्या असमानता और अन्याय के नस्ली भेदभाव को कमानते रहे हैं और इसीलिए उनका धर्म मनुष्यता का धर्म है और उनका जीवन दर्शन भी मनुष्यता का दर्शन है।रवींद्र की चंडालिका में बौद्धमय भारत की गूंज है …

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आर्यावर्त का भूगोल भारत का भूगोल नहीं है

मनुष्यता ही मनुष्य का धर्म,  मनुष्यता ही इतिहास भूगोल रवींद्र का दलित विमर्श -एक पलाश विश्वास (सत्ता की राजनीति हमारे इतिहास, जीवन दर्शन, संस्कृति, मातृभाषा, लोक, जनपद और जीवन यापन पर हावी है। जिन शाश्वत मूल्यों पर आधारित है भारत की सभ्यता, उन्हें सिरे से बदलने की कोशिश हो रही है। ब्रिटिश हुकूमत के साम्राज्यवाद के खिलाफ भारतीय जनता के …

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संघ परिवार को बंगाल की चुनौती : हिंदुत्व और हिंदू राष्ट्रवाद के कट्टर विरोधी रवींद्र नाथ को निषिद्ध करके दिखाये

पलाश विश्वास संदर्भः आज रवींद्र नाथ को प्रतिबंधित करने की चुनौती देता हुआ बांग्ला दैनिक आनंद बाजार पत्रिका में प्रकाशित सेमंती घोष का अत्यंत प्रासंगिक आलेख, जिसके मुताबिक रवींद्र नाथ का व्यक्तित्व कृतित्व संघ परिवार और उसके हिंदू राष्ट्रवाद के लिए सबसे बड़ा खतरा है।  उनके मुताबिक रवींद्रनाथ का लिखा,  कहा हर शब्द विशुद्धता के नस्ली ब्राह्मणावादी हिंदू राष्ट्रवाद के …

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अच्छे दिन : जनसंख्या सफाये के लिए इससे बेहतर राजकाज और राजधर्म नहीं हो सकता

पलाश विश्वास प्रायोजित घटनाओं और वारदातों की क्रिया प्रतिक्रिया में कयामती फिजां की तस्वीरें सिरे से गायब हैं। सुनहले दिनों के तीन साल पूरे होने के बाद रोजी रोटी का जो अभूतपूर्व संकट खड़ा हो गया है, डिजिटल इंडिया के नागरिकों, बेनागरिकों की नजर उसपर नहीं है। सारी नजरें सरहद पर है। दुश्मन को फतह करने का मौका बनाया जा …

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गाय के बराबर अधिकार तो मिलें, नागरिक-मानवाधिकार हों या न हों ! गोभक्तों में तब्दील है पूरा देश

पलाश विश्वास मैं चिंतित हूं मंदाक्रांता सेन के लिए, जिन्हें असहिष्णुता और धर्मोन्माद के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए, उनकी रचनात्मकता के लिए पहले ही गैंग रेप की धमकी दी जा चुकी है, जिस पर अभी तक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है और बिना डरी उस बहादुर कवियत्री रामनवमी के दिन बजरंगी सशस्त्र शक्ति परीक्षण के विरुद्ध विद्वतजनों के …

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कारपोरेट प्रायोजित युद्धोन्माद : हम परमाणु विध्वंस का रास्ता चुन रहे

कारपोरेट प्रायोजित युद्धोन्माद में निष्णात हम भारतीय नागरिक परमाणु विध्वंस का रास्ता चुन रहे हैं और यह हमारे इतिहास और भूगोल का सबसे बड़ा संकट है। नवजागरण की जमीन पश्चिम की रेनेशां कतई नहीं है! यह सिंधु घाटी और बौद्धमय भारत, चार्वाक दर्शन, संत फकीर पीर बाउल, किसान आदिवासी आंदोलनों की निरंतरता है! पलाश विश्वास ईस्ट इंडिया कंपनी के राजकाज …

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राष्ट्र कहां है? विभाजन और विखंडन राष्ट्र का सच है

राष्ट्र कहां है? पलाश विश्वास हमने खाड़ी युद्ध शुरु होते न होते लिखना शुरू किया था अमेरिका से सावधान। अब बूढ़ा हो गया हूं और आय के स्रोत बंद हो जाने के बाद सड़कों पर हूं। सर पर छत भी नहीं है और हमारे लिए सारे दरवाजे, खिड़कियां और रोशनदान तक बंद हैं। देश-विदेश के लाखों लोगों के साथ निरंतर …

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दिलों में मुहब्बत नहीं तो कायनात में यह कैसी बहार?

रवींद्र जयंती के मौके पर भी सियासती मजहब और मजहबी सियासत के शिकंजे में इंसानियत का मुल्क? अब रवीन्द्र जयंती के साथ सूखे के सर्वग्रासी माहौल में भुखमरी के बादलों को धता बताकर फिर वृष्टि है और कालवैशाखी भी है। बंगाल की गली गली में फिर वही रवींद्र संगीत है।   पलाश विश्वास आज मां दिवस (मदर्स डे) है और …

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हिंदू राष्ट्र बनकर भी हम क्यों बन गये पाकिस्तान, अमेरिका का उपनिवेश?

हम उनसे अलग कहां हैं हिंदू राष्ट्र बनकर भी हम क्यों बन गये पाकिस्तान, अमेरिका का उपनिवेश? पाकिस्तान की इस बच्ची ने जो कहा है उसे एक बार जरूर सुनें! #Extension Oil War #Reforms#IMF#World Bank #Mandal VS #Kamandal#Manusmriti वेदमंत्र में हर मुश्किल आसान, हिंदुत्व एजेंडा फिर क्यों मुक्त बाजार और सुधार पर खामोशी क्यों समता और समामाजिक न्याय और हमारे …

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बहुजनों का आत्मघाती जातिवाद ही मनुस्मृति शासन को बहाल रखे है

अरुंधति राय ने जो असल एजेंडा ब्राह्मणवाद का बताया है, उसका आशय ब्राह्मणों को गाली नहीं है आज का वीडियो टाक मैं अपनी पुरानी भूमंडलीकरण कविताओं के पाठ से शुरू कर रहा हूं और कोशिश रहेगी कि अरुंधति राय ने जो असल एजेंडा ब्राह्मणवाद का बताया है, उसका आशय ब्राह्मणों को गाली नहीं है, हम यह जरूर साफ करें। अव्वल …

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इतिहास केसरिया बनाने वाले चेहरे बेनकाब हैं जो दुनिया मनुस्मृति बनाना चाहते हैं!

ग्रीक त्रासदी घात लगाये मौत की तरह सर पर खड़ी है! स्वयंभू ब्राह्मण और नवब्राह्मण ब्राह्मणतांत्रिक गिरोह के सिपाहसालार मनसबदार से लेकर चक्रकर्ती महाराज कल्कि अवतार तक आदतन तानाशाह हैं। वे इतिहास, ज्ञान विज्ञान, गणित, अर्थशास्त्र को वैदिकी बनाने चले हैं और दरअसल मिथकों को नये सिरे से रच रहे हैं। मसलन ताजातरीन मिथक विकास, सामायोजन, डिजिटल भारत और बोतल …

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संस्थागत फासीवाद भारत को अंधकार और सर्वनाश की ओर ले जा रहा है!

संस्थागत फासीवाद भारत को अंधकार और सर्वनाश की ओर ले जा रहा है! निजी विरोध से इसे रोकना मुश्किल है, जबकि संगठनात्मक ढांचे में हम जनता को लामबंद करने की कोशिश नहीं कर लेते! पलाश विश्वास सर्वोच्च न्यायालय के आदेश लागू कभी होते नहीं हैं और सरकारें अदालती फैसलों की अवमानना में सबसे आगे हैं। संवैधानिक पदों का भयंकर दुरुपयोग …

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सर कलम कर दो लब आजाद रहेंगे! हिटलर के राजकाज में भी संस्कृतिकर्मी प्रतिरोध के मोर्चे पर लामबंद थे

अछूत रवींद्रनाथ का दलित विमर्श Out caste Tagore Poetry is all about Universal Brotherhood which makes India the greatest ever Ocean which merges so many streams of Humanity! आप हमारा गला भले काट दो, सर कलम कर दो लब आजाद रहेंगे! क्योंकि हिटलर के राजकाज में भी जर्मनी के संस्कृतिकर्मी भी प्रतिरोध के मोर्चे पर लामबंद सर कटवाने को तैयार …

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हिंदू साम्राज्यवाद का पुनरूत्थान का समय है कारपोरेट मुक्तबाजार

कोलकाता में मौसम बेहद बदल गया है और नवंबर से ही सर्दी होने लगी है। हम लोग सालाना अतिवृष्टि अनावृष्टि बाढ़, सूखा, भूकंप, भूस्खलन की मानवरची आपदाओं के मध्य अपने-अपने सीमेट के जंगल में रायल बेंगाल टाइगर की तरह विलुप्तप्राय होते रहने की नियति के बावजूद मुक्तबाजारी कार्निवाल में मदहोश हैं। जो अमेरिका हम बन रहे हैं, वहॉँ सर्वव्यापी बर्फ …

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कॉरपोरेट राज की मर्यादाओं का उल्ल्ंघन क्यों होना चाहिए?

इस जड़ यथास्थिति का मुरजिम कौन?  पलाश विश्वास   विडंबना तो यह है कि मनुस्मृति बंदोबस्त के धारक वाहक और हिंदू राष्ट्रवाद के प्रमुख सिपाहसालार सत्ता की दोनों ध्रुवों पर तमाम अनुसूचित, आदिवासी और पिछड़े क्षत्रप हैं, सामाजिक न्याय और समता के सिद्दांतों को अमली जामा पहनाने का एजंडा चुनने के बजाय जिन्होंने आरक्षित राजनीति चुन ली। इसके विपरीत अघोषित …

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हिंदू राष्ट्र का यह धर्मोन्माद किसान, आदिवासी, स्त्री और दलितों के खिलाफ इसे हम सिर्फ मुसलमानों के खिलाफ समझने की भूल कर रहे

Palash Biswas पलाश विश्वास पलाश विश्वास। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। हिंदी में पत्रकारिता करते हैं, अंग्रेजी के लोकप्रिय ब्लॉगर हैं। “अमेरिका से सावधान “उपन्यास के लेखक। अमर उजाला समेत कई अखबारों से होते हुए अब जनसत्ता कोलकाता में ठिकाना

वंदेमातरम् की मातृभूमि अब विशुद्ध पितृभूमि है, जहां काबुलीवाला जैसा पिता कोई नहीं काबुलीवाला, मुसलमानीर गल्पो और आजाद भारत में मुसलमान रवींद्र का दलित विमर्श-33 रवींद्रनाथ की कहानियों में सतह से उठती मनुष्यता का सामाजिक यथार्थ, भाववाद या आध्यात्म नहीं! आजाद निरंकुश हिंदू राष्ट्र का यह धर्मोन्माद भारत के किसानों, आदिवासियों, स्त्रियों और दलितों के खिलाफ है, इसे हम सिर्फ …

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बांग्लादेश में रवींद्र और शरत को पाठ्यक्रम से बाहर निकालने के इस्लामी राष्ट्रवाद खिलाफ आंदोलन तेज

कट्टरपंथ के खिलाफ आसान नहीं होती कोई लड़ाई। लालन फकीर और रवींद्रनाथ की रचनाओं को पाठ्यक्रम से निकालने के खिलाफ बांग्लादेश में आंदोलन तेज हो रहा है और रवींद्र और प्रेमचंद समेत तमाम साहित्यकारों को पाठ्यक्रम से निकालने और समूचा इतिहास को वैदिकी साहित्य में बदलने के खिलाफ भारत में अभी कोई आंदोलन शुरू नहीं किया जा सका है। रवींद्र का …

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अंधेर नगरी में सत्यानाश फौजदार का राजकाज! रवींद्र प्रेमचंद के बाद निशाने पर भारतेंदु?

Bharatendu Harishchandra

क्या वैदिकी सभ्यता का प्रतीक न होने की वजह से अशोक चक्र को भी हटा देंगे? रवींद्र का दलित विमर्श-28 पलाश विश्वास डिजिटल इंडिया में इन दिनों जो वेदों, उपनिषदों, पुराणों, स्मृतियों, महाकाव्यों के वैदिकी साहित्य में लिखा है, सिर्फ वही सच है और बाकी भारतीय इतिहास, हड़प्पा मोहंजोदोड़ो सिंधु घाटी की सभ्यता, अनार्य द्रविड़ शक हुण कुषाण खस पठान …

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धर्मोन्माद में न आस्था है और न धर्म, यह नस्ली वर्चस्व का अश्लील नंगा कार्निवाल है

विषमता की अस्पृश्यता के पुरोहित तंत्र के विरुद्ध समानता और न्याय की आवाज ही रवींद्र रचनाधर्मिता है। इसीलिए उत्पीड़ित अपमानित मनुष्यता के लिए न्याय और समानता की उनकी मांग उनकी कविताओं, गीतों, उपन्यासों और कहानियों से लेकर गीताजंलि के सूफी बाउल आध्यात्म और रक्त करबी और चंडालिका जैसी नृत्य नाटिकाओं का मुख्य स्वर है। उनकी प्रार्थना अपने मोक्ष के लिए …

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संविधान पर पुनर्विचार आरएसएस का ‘हिडेन एजेंडा’ है’!

Palash Biswas पलाश विश्वास पलाश विश्वास। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। हिंदी में पत्रकारिता करते हैं, अंग्रेजी के लोकप्रिय ब्लॉगर हैं। “अमेरिका से सावधान “उपन्यास के लेखक। अमर उजाला समेत कई अखबारों से होते हुए अब जनसत्ता कोलकाता में ठिकाना

कॉपीराइट मुक्त रवीद्रनाथ टैगौर (Copyright Free Rabindranath Tagore) अब मुक्त बाजार के आइकन (Free market icons) में तब्दील हैं। उनके वाणिज्यिक विपणन से उसी नस्ली वर्ण वर्ग वर्चस्व के राष्ट्रवाद को मजबूत किया जा रहा है जिसका रवींद्रनाथ आजीवन विरोध करते रहे हैं। रवींद्र का दलित विमर्श-23 पलाश विश्वास चर्यापद के बाद आठवीं सदी से लेकर ग्यारवीं सदी के इतिहास …

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राष्ट्रवाद आस्था का नहीं, राजनीति का मामला है इसीलिए दूध घी की नदियां अब खून की नदियों में तब्दील

rabindranath tagore

रवींद्र का दलित विमर्श-21 पलाश विश्वास पांच अक्तूबर को मैं नई दिल्ली रवाना हो रहा हूं और वहां से गांव बसंतीपुर पहुंचना है। आगे क्या होगा, कह नहीं सकते। कोलकाता में बने रहना मुश्किल हो गया है और कोलकाता छोड़ना उससे मुश्किल तो गांव लौटना शायद सबसे ज्यादा मुश्किल। मैंने जिंदगी से लिखने पढ़ने की आजादी के सिवाय कुछ नहीं …

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भारतमाता का दुर्गावतार नस्ली मनुस्मृति राष्ट्रवाद का प्रतीक है तो महिषासुर वध आदिवासी भूगोल का सच

Palash Biswas पलाश विश्वास पलाश विश्वास। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। हिंदी में पत्रकारिता करते हैं, अंग्रेजी के लोकप्रिय ब्लॉगर हैं। “अमेरिका से सावधान “उपन्यास के लेखक। अमर उजाला समेत कई अखबारों से होते हुए अब जनसत्ता कोलकाता में ठिकाना

            দুই ছিল মোর ভুঁই, আর সবই গেছে ঋণে। বাবু বলিলেন, ‘বুঝেছ উপেন? এ জমি লইব কিনে। ‘ কহিলাম আমি, ‘তুমি ভূস্বামী, ভূমির অন্ত নাই – চেয়ে দেখো মোর আছে বড়জোর মরিবার মতো ঠাঁই। শুনি রাজা কহে, ‘বাপু, জানো তো হে, করেছি বাগানখানা, পেলে দুই বিঘে প্রস্থে ও দিঘে সমান হইবে টানা – ওটা দিতে হবে। ‘  (दो बीघा जमीन …

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राम के नाम रामराज्य का स्वराज अब भगवा आतंकवाद में तब्दील है।

Palash Biswas पलाश विश्वास पलाश विश्वास। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। हिंदी में पत्रकारिता करते हैं, अंग्रेजी के लोकप्रिय ब्लॉगर हैं। “अमेरिका से सावधान “उपन्यास के लेखक। अमर उजाला समेत कई अखबारों से होते हुए अब जनसत्ता कोलकाता में ठिकाना

ब्राह्मणों की भूमिका, अनार्यों की देन और हिंदुत्व के भगवा एजंडे में भारत तीर्थ के आदिवासी! रवींद्र का दलित विमर्श : तेरह पलाश विश्वास संविधान सभा में जयपाल सिंह मुंडा ने कहा थाः “आज़ादी की इस लड़ाई में हम सबको एक साथ चलना चाहिए। पिछले छह हजार साल से अगर इस देश में किसी का शोषण हुआ है तो वे …

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अनेकता में एकता का विमर्श ही रवींद्र रचनाधर्मिता है और यही मनुष्यता का आध्यात्मिक उत्कर्ष भी।

Palash Biswas पलाश विश्वास पलाश विश्वास। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। हिंदी में पत्रकारिता करते हैं, अंग्रेजी के लोकप्रिय ब्लॉगर हैं। “अमेरिका से सावधान “उपन्यास के लेखक। अमर उजाला समेत कई अखबारों से होते हुए अब जनसत्ता कोलकाता में ठिकाना

देश के करोड़ों अछूतों की तरह रवींद्र नाथ भी अछूत है जिन्हें मंदिर में प्रवेशाधिकार नहीं मिलता और वे धर्मस्थल में कैद ईश्वर की जगह मनुष्यता के उत्कर्ष के आध्यात्म में ही ईश्वर की खोज करते हैं। यही उनकी गीताजंलि है।

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हिंदुत्व का एजेंडा फर्जी, यह देश बेचने का नरसंहारी एजेंडा

Palash Biswas पलाश विश्वास पलाश विश्वास। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। हिंदी में पत्रकारिता करते हैं, अंग्रेजी के लोकप्रिय ब्लॉगर हैं। “अमेरिका से सावधान “उपन्यास के लेखक। अमर उजाला समेत कई अखबारों से होते हुए अब जनसत्ता कोलकाता में ठिकाना

हमें हिंदुत्व के बजाये फासीवादी नरसंहारी मुक्तबाजार के किले पर हमला करना चाहिए,  क्योंकि हिंदुत्व के नकली किले पर हमले से वे जनता को वानरसेना में तब्दील करने में कामयाब हैं मराठी और बांग्ला के बाद आप चाहें तो हर भाषा और हर बोली में होगा हस्तक्षेप। Hindutva agenda fake, Narcissistic agenda to sell this country पलाश विश्वास नागपुर यात्रा …

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विसर्जन : देवी नहीं है, कहीं कोई देवी नहीं है, देवता के नाम मनुष्यता खोता मनुष्य

रवींद्र का दलित विमर्श-32 দেবতার নামে মনুষ্যত্ব হারায় মানুষ पलाश विश्वास वैसे भी धर्मोन्मादी राष्ट्रवाद की सुनामी के मध्य मनुस्मृति विरोधी रवींद्र के दलित विमर्श को जारी रखने में भारी कठिनाई हो रही। रवींद्र के दलित विमर्श और उससे संदर्भ सामग्री शेयर करने पर बार-बार रोक लग रही है। दैवी सत्ता और राजसत्ता के देवी पक्ष में देवी के अस्तित्व …

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क्यों नस्ली नाजी फासीवाद के निशाने पर थे गांधी और टैगोर? हिटलर समर्थक हिंदुत्ववादियों ने की थी टैगोर की हत्या की साजिश

  रवींद्र का दलित विमर्श-बारह पलाश विश्वास विकीपीडिया में राजनीतिक विचारों के लिए हिंदू जर्मन क्रांतिकारियों की तरफ से रवींद्र नाथ की ह्त्या की साजिश के बारे में थोड़ा उल्लेख है। बंगाल में अनुशीलन समिति और देशभर में सक्रिय गदर पार्टी के क्रांतिकारियों के साथ ब्रिटिश साम्राज्यवाद के लिए सबसे बड़ी चुनौती जर्मनी के संबंध थे। हिंदुत्व के एजंडे के …

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हिंदुत्व के पुनरुत्थान के साथ भारत अमेरिकी उपनिवेश में तब्दील, हिटलर जैसे हारा, वैसे हमारा लाड़ला झूठा तानाशाह भी हारेगा

ब्लेअर बाबू ने मान लिया युद्ध अपराध माफी भी मांग ली, हम किस किसको माफ करेंगे? गधोंं को चरने की आजादी है और पालतू कुत्तों को खुशहाल जिंदगी जीने की इजाजत है! तय करें कि गधा बनेंगे कि कुत्ता या इंसान! लाल नील एका के बिना कयामत का यह मंजर नहीं बदलेगा और अधर्म अपकर्म के अपराधी राष्ट्र और धर्म …

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राजसत्ता, धर्मसत्ता, राष्ट्रवाद और शरणार्थी समस्या के संदर्भ में रोहिंग्या मुसलमान और गुलामी की विरासत

कोलकाता में रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन में लाखों मुसलमानों ने रैली की (Millions of Muslims rally in support of Rohingya Muslims in Kolkata) और इस रैली के बाद बंगाल में रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर नये सिरे से धर्मोन्मादी ध्रुवीकरण (Religion polarization) तेज हुआ है। भारत में सिर्फ मुसलमान ही म्यांमार में नरसंहार और मानवाधिकार हनन के खिलाफ मुखर है, ऐसा …

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मजहबी सियासत के हिंदुत्व एजंडे से मिलेगी आजादी स्त्री को?

Palash Biswas पलाश विश्वास पलाश विश्वास। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। हिंदी में पत्रकारिता करते हैं, अंग्रेजी के लोकप्रिय ब्लॉगर हैं। “अमेरिका से सावधान “उपन्यास के लेखक। अमर उजाला समेत कई अखबारों से होते हुए अब जनसत्ता कोलकाता में ठिकाना

तीन तलाक की प्रथा खत्म हो गयी है, यह दावा करना जल्दबाजी होगी। इसी सिलिसिले सामाजिक, मजहबी बदलाव की किसी हलचल के बिना सियासती सरगर्मियां हैरतअंगेज हैं। जश्न मानने से पहले हकीकत की तस्वीरों के अलग अलग रुख को जरुर देख लें। फिजां में बिछी बारुदी सुरंगों का भी तनिक जायजा ले लीजिये। रवींद्र का दलित विमर्श-आठ पलाश विश्वास सवाल यह …

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इस राष्ट्रवाद के मसीहा तो हिटलर और मुसोलिनी हैं

Palash Biswas पलाश विश्वास पलाश विश्वास। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। हिंदी में पत्रकारिता करते हैं, अंग्रेजी के लोकप्रिय ब्लॉगर हैं। “अमेरिका से सावधान “उपन्यास के लेखक। अमर उजाला समेत कई अखबारों से होते हुए अब जनसत्ता कोलकाता में ठिकाना

भारत का इतिहास लोकतंत्र का इतिहास है। भारत का इतिहास लोकगणराज्य का इतिहास है। धर्म और आस्था चाहे जो हो, भारत में धर्म कर्म लोक संस्कृति, परंपरा और रीति रिवाजों के लोकतंत्र के मुताबिक होता रहा है। रवींद्र का दलित विमर्श-सात पलाश विश्वास मनुस्मृति के कठोर अनुशासन के बावजूद, अस्पृश्यता और बहिस्कार के वर्ण वर्ग वर्चस्व नस्ली रंगभेद के बावजूद सहिष्णुता और …

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फिर दर्द होता है तो चीखना मजबूरी भी है

पलाश विश्वास सत्ता समीकरण और सत्ता संघर्ष मीडिया का रोजनामचा हो सकता है, लेकिन यह रोजनामचा ही समूचा विमर्श में तब्दील हो जाये, तो शायद संवाद की कोई गुंजाइश नहीं बचती। आम जनता की दिनचर्या, उनकी तकलीफों, उनकी समस्याओं में किसी की कोई दिलचस्पी नजर नहीं आती तो सारे बुनियादी सवाल और मुद्दे जिन बुनियादी आर्थिक सवालों से जुड़े हैं, …

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महाश्वेतादी की राजकीय अंत्येष्टि : हम अंतिम दर्शन भी नहीं कर सकते क्योंकि वे पूरी तरह सत्तावर्ग के कब्जे में हैं

हिंदुत्व का पुनरूत्थान का मतलब नवजागरण की विरासत से बेदखली है। इसी तरह टुकड़ा टुकड़ा मरते जाना नियति है क्योंकि फिजां कयामत है! जनम से जाति धर्म नस्ल कुछ भी हो, जनप्रतिबद्ध सामाजिक कार्यकर्ता हुए तो आप अछूत और बहिष्कृत हैं! पलाश विश्वास विरासत से बेदखली का कितना ख्याल है हमें? इसी तरह टुकड़ा टुकड़ा मरते जाना नियति है क्योंकि …

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संसदीय सहमति बिना देश को जो ग्लोबल युद्ध में झोंक रहे, वे ही असली राष्ट्रद्रोही हैं

अंध राष्ट्रवाद के आवाहन के लिए जनादेश के बिना, संसदीय सहमति के बिना देश को जो ग्लोबल कारगिल युद्ध में झोंक रहे हैं, वे ही दरअसल राष्ट्रद्रोही हैं, कोई और नहीं। महामहिम के विचारों के रंग भी शायद बदलने लगे हैं, यह खतरनाक है। पलाश विश्वास यह आलेख लिखने से पहले जो महामहिम राष्ट्र को बार-बार संबोधित करके देश में …

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फासीवाद हारा नहीं है अभी आगे फिर मंडल बनाम कमंडल महाभारत है

 ऋत्विक घटक की बगावत, उनका सामाजिक यथार्थ और उनकी फिल्म सुवर्णरेखा! Subarnarekha – Bengali Full Movie – Ritwik Ghatak’s Film – Abhi Bhattacharya | Madhabi Mukhopadhya ऋत्विक घटक ने ब्राह्मण गिरोह के उन्हीं चेहरों को तभी बेनकाब कर दिया था, यही उनका अपराध है। यही भारत विभाजन की त्रासदी है जो दलितों, पिछड़ों, आदिवसियों और भारतीय स्त्री की त्रासदी है …

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मैदान छोड़ना नहीं, पीठ दिखाना नहीं, फासीवाद हारने लगा है!

देश को जोड़ लें, दुनिया जोड़ लें, कोई अकेला भी नहीं है! पलाश विश्वास दाभोलकार, पनसारे और कलबुर्गी के हत्यारे, बाबरी विध्वंस, भोपाल गैस त्रासदी.देश विदेश दंगों और आतंकी हमलों, सिखों के नरसंहार, गुजरात के दंगों, सलवा जुड़ुम और आफस्पा, टोटल प्राइवेटेजाइशेन, टोटल विनिवेश, टोटल एफडीआी के सौदागर तमाम हारने लगे हैं, हमारा यकीन भी कीजिये। जिनने इस महादेश को …

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मुक्त बाजार में हम बाराती, बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना

मकान कहीं कोई नहीं है दोस्तों,  हर कहीं अब दुकान ही दुकान है। शिक्षा दुकान। दीक्षा दुकान। धर्म दुकान। राजनीति दुकान।  चिकित्सा दुकान। समाज दुकान। व्यवस्था दुकान। सरकार दुकान। घर परिवार दुकान। रिश्ते नाते दुकान। साहित्य संस्कृति सभ्यता लोक और मातृभाषा तक दुकानें। इन दुकानों में कारोबार है। मनुष्यता लेकिन कहीं नहीं है। 2007- 2008 में अपने मोहल्ले में सात …

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जब तक रोटी के प्रश्नों पर रखा रहेगा पत्थर/ कोई मत ख्वाब सजाना तुम

Palash Biswas पलाश विश्वास पलाश विश्वास। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। हिंदी में पत्रकारिता करते हैं, अंग्रेजी के लोकप्रिय ब्लॉगर हैं। “अमेरिका से सावधान “उपन्यास के लेखक। अमर उजाला समेत कई अखबारों से होते हुए अब जनसत्ता कोलकाता में ठिकाना

जब तक रोटी के प्रश्नों पर रखा रहेगा पत्थर कोई मत ख्वाब सजाना तुम मेरी गली में खुशी खोजते अगर कभी जो आना आज फिर एकमुश्त हिमपात, भूस्खलन, भूकंप और जलप्रलय के बीचोंबीच फंसा हूं और मेरे देश में दिशाएं गायब हैं। रिजर्व बैंक के मान्यवर गवर्नर राजन साहेब नयी परिभाषाओं और आंकड़ों के हवाले विकास के अर्थशास्त्र का पाठ …

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