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आत्महत्यामुक्त भारत के लिए किसानों की हुंकार, मन्दसौर से चम्पारण तक किसान यात्रा का ऐलान

Farmers roar for suicide-free India, Kisan Yatra announced from Mandsaur to Champaran

नई दिल्ली। देश के 150 किसान संगठनों ने एक स्वर में घोषणा की है कि किसानों के कर्ज़ा मुक्ति और समर्थन मूल्य को लेकर होगा देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा। इसको लेकर 6 जुलाई को मन्दसौर से किसान यात्रा निकाली जाएगी, जिसका समापन 2 अक्टूबर को चम्पारण में होगा।

आज आल इंडिया किसान संघर्ष कोआर्डिनेशन कमिटी की बैठक मंदसौर में शहीद हुए किसानों को श्रद्धांजलि देकर शुरू हुई, जिसका संचालन बी एम सिंह ने किया।

सांसद राजू शेट्टी ने कहा कि मोदीजी ने समर्थन मूल्य को वायदा किया था वह पूरा नहीं किया। जब लोग सर्वोच्य न्यायालय गए तब सरकार ने इंकार कर दिया, सरकार की मंशा ठीक नहीं है।

बैठक में तय हुआ कि कर्जा माफी और समर्थन मूल्य केवल दो मुद्दों को लेकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन किया जाएगा।

सभी वक्ताओं ने महेंद्र सिंह टिकैत, नंदुलस्वामी और शरद जोशी जैसे किसान नेताओं के योगदान को याद किया।

बी एम सिंह ने कहा कि देश के किसान हमारी ओर देख रहे हैं। देश के किसान संगठनों की एकता किसान चाहता है, हमें एक होना होगा, सभी किसानों का पूरा कर्ज़ा माफ होना चाहिए।

हन्नान मुल्ला ने कहा कि हम युद्ध के दौरान इकट्ठे हुए हैं। तूअर (अरहर) का समर्थन मूल्य जो तय किया उस पर खरीद नहीं की जा रही है, सभी पार्टियों को इन मुद्दों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

तमिलनाडू से कन्नू ने कहा कि किसान को गुलाम माना जाता है, कर्मचारियों को 7 वां वेतन आयोग बन जाता है, लेकिन किसान की न्यूनतम आय तक तय नहीं है। बीमा की इकाई किसान का खेत होना चाहिए

मध्य प्रदेश् किसान संघर्ष समिति के डॉ सुनीलम ने कहा कि हमारा उद्देश्य वर्तमान किसान की लूट और अत्याचार पर् आधारित व्यवस्था को बदलना है क्योंकि यह व्यवस्था किसान, किसानी और गाँव को नष्ट करना चाहती है।

बैठक में फिलहाल आंदोलन को संगठित करने के किये कर्ज़ा मुक्ति और सभी कृषि उत्पादों की लागत से डेढ़ गुना समर्थन मूल्य पर् खरीद के मुद्दे पर् राष्ट्रव्यापी आंदोलन का फैसला किया गया है। गोली चालन के दोषी अधिकारियों पर हत्या के मुकदमा दर्ज करने, किसानों पर् लादे गए फर्जी मुकदमे वापस लेने, सभी फसलों का फसल बीमा कर द्वारा प्रीमियम भरे जाने आदि मुद्दों को जोड़ने की अपील की गई।

स्वामी अग्निवेश ने करो या मरो की तर्ज पर आंदोलन चलाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि हमें आत्महत्या मुक्त भारत्त के निर्माण के लिए मिलकर काम करना है।

राजस्थान के रामपाल जाट ने कहा कि देश के हर गांव को बंद कर किसानों को अपनी ताकत दिखानी चाहिए

बैठक में 150 किसान संगठनों ने भाग लिया। किसान असोसियेशन, भारतीय किसान संगठन, किसान मजदूर किसान मोर्चा, किसान मज़दूर संघर्ष मोर्चा, भारतीय किसान संयुक्त महासंघ,किसान संघर्ष एकता, किसान प्रजा संगठन, किसान मज़दूर संगठन, केरळ किसान संगठन,आल इंडिया मज़दूर संघ,किसान यूनियन लखोवाल,राष्ट्रीय मज़दूर संयुक्त यूनियन,भारतीय किसान यूनियन ( धारीवाल नयन),किसान यूनियन,गैर राजनीतिक, किसान सेना के वक्ताओं ने अपने विचार रखे ।

किसानों संगठनों ने समर्थन मूल्य तय करते समय कुशल मज़दूर का रेट की दर पर् मज़दूरी लगाने,आत्महत्या करने वाले परिवार को 10 लाख रुपए, किसान शहीद परिवारों को 1 करोड़ रुपये मुआबजा दिए जाने के मुद्दों को आंदोलन में जोड़ने का सुझाव दिया।

आल इंडिया किसान संघर्ष कोआर्डिनेशन कमिटी नाम तय किया गया, कमिटी के कार्य संचालन के लिए 10 सदस्यों की समिति का गठन किया गया, जिसमें बी एम सिंह, राजू शेट्टी, अइय्या कननु, हन्नान मुल्ला, योगेंद्र यादव, रामपाल जाट, डॉ सुनीलम्, चन्द्रशेखर, कविता कुरुनघंटी, डॉ दर्शनपाल को शामिल किया गया है ।

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