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धारा 341 से न हटा धार्मिक प्रतिबन्ध तो कांग्रेस को सत्ता में नहीं आने देंगे- आमिर रशादी मदनी

संविधान की  धारा 341 से धार्मिक प्रतिबन्ध हटाने की मांग को लेकर जंतर मंतर पर राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के अनिश्चित कालीन धरना व क्रमिक अनशन का सोलहवां  दिन ..

नई दिल्ली- दलित शोसित समाज के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए संविधान की धारा 341 (Article 341 of the constitution) के माध्यम से प्रदत्त आरक्षण के अधिकार में 10 अगस्त 1950 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की सरकार के जरिये संविधान संशोधन अध्यादेश के माध्यम से लगाये गए धार्मिक प्रतिबन्ध को समाप्त करने की मांग को लेकर 17 फरवरी 2014 से दिल्ली के जंतर मंतर पर राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल द्वारा  दिया जा रहा धरना एवं क्रमिक अनशन आज सोलहवे दिन जारी रहा। बड़ी संख्या में देश के कोने-कोने से आये राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के कार्यकर्ताओ ने भाग लेकर जबर्दस्त प्रदर्शन किया।

इस अवसर पर प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल (Rashtriya Ulama Council) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी मदनी कहा कि संविधान समिति ने भारत को एक सम्प्रभु, समाजवादी तथा धर्म निरपेक्ष गणतंत्र बनाया था संविधान निर्माताओं ने देश के अछूतों, दलितों एवं कमज़ोर वर्ग के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए अंग्रेज़ सरकार के जरिये बनाये गए कानून के भांति उन्हें अनुसूचित जाति में सम्मलित करके उनकी जन संख्या के अनुपात में विधान मण्डल, सरकारी सेवाओं और शैक्षिक संस्थाओ में उनका समुचित प्रतिनिधि सुनिश्चित करने के लिए संविधान की धारा 341 के तहत आरक्षण की व्यवस्था (Arrangement of reservation under section 341 of the constitution) की थी तथा अनुसूचित जाति की सूची में सभी धर्मों के मानने वाले दलित समाज के लोग सम्मलित थे।

उन्होंने कहा कि संविधान लागू होने के बाद प्रधानमंत्री पण्डित ज्वाहर लाल नेहरू ने संविधान की अनुछेद 341 की धारा का सहारा लेकर 10 अगस्त 1950 को एक अध्यादेश पास कराया कि अनुसूचित जाति के लोगो में केवल उन्हीं को आरक्षण तथा अन्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा जो हिन्दू हों। अनुसूचित जाति के किसी ऐसे व्यक्ति को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा जो गैर हिन्दू है, सिख समुदाय के दलितों ने इस असंवैधानिक अन्याय पूर्ण एवं दमन कारी के विरुद्ध अपने अधिकार की लड़ाई लड़ी तब 1956 में इस अध्यादेश में संशोधन करके हिंदू व सिख होना अनिवार्य करार दिया गया। पण्डित ज्वाहर लाल नेहरू, गैर हिन्दू- गैर सिख दलित जाति के लोगों के हितों का गला घोंटने से ही संतुष्टि नहीं हुई, वर्ष 1958 में पुनः इस अध्यादेश को संशोधन कराते यह बढ़ोतरी भी कि जिन दलितों के पूर्वज कभी हिदू धर्म से निकल गए थे यदि वह पुनः हिन्दू धर्म स्वीकार करें तो उन्हें भी आरक्षण व अन्य सुविधायें मिलेंगी। 1990 में इस अध्यादेश में एक संशोधन करके इसमें बौद्ध दलितों को भी सम्मलित कर दिया गया। इस प्रकार मुस्लिम एवं ईसाई दलित आज भी अपने आरक्षण के संवैधानिक अधिकार से वंचित हैं जिसे असंवैधानिक तरीके से छीन लिया गया है जो कि संविधान की धारा 14 ,15 ,16 और 25 के विपरीत है।

उन्होंने यह भी कहा कि हम  इस असंवैधानिक अन्याय पूर्ण एवं काले कानून को भारत के संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों का हनन और संविधान की मंशा की विरुद्ध मानते हैं तथा हम ने मांग की है कि तत्काल धारा 341 से धार्मिक प्रतिबन्ध हटा कर मुसलमानों और ईसाइयों को आरक्षण का अधिकार (right to reservation to Muslims and Christians) बहाल किया जाये, जिसको लेकर हम यह आंदोलन चला रहे हैं, परन्तु 16 दिन हो गये सरकार ने हमारी इस जायज़ मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार ने समय रहते हमारी मांग को नहीं माना और धारा 341 से धार्मिक प्रतिबन्ध को समाप्त नहीं किया तो हम आगामी लोकसभा चुनाव में किसी भी हाल में कांग्रेस को सत्ता में आने नहीं देंगे। अब हमें भयभीत करके वोट बैंक नहीं बनाया जा सकता।

मौलाना आमिर रशादी ने बताया कि धारा 341 से धार्मिक प्रतिबन्ध हटाये जाने को लेकर सपा, बसपा, एनसीपी, सीपीआई , सीपीएम, आरजेडी, जनता दल आदि सहित किसी भी राजनैतिक पार्टियो का आचरण कभी गम्भीर नहीं रहा। उन्होंने देश की सभी छोटी बड़ी राजनैतिक पार्टियो को पत्र लिख कर उनसे इस संबंध में अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करने को कहा तथा यह भी कहा है कि जल्द ही उनका प्रतिनिधि मण्डल इस मुद्दे को लेकर इन पार्टियों के नेताओं से मिलेगा और उनसे इस पर स्पष्टी करण की मांग करेगा।

मिडिया प्रभारी, डॉ० निजामुद्दीन खान ने बताया कि अपने पूर्ण घोषित कार्यक्रमनुसार बड़ी संख्या में राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के कार्यकर्ताओ ने धारा 341 से धार्मिक प्रतिबन्ध हटाने की मांग को लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी मदनी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का घेराव करने के लिए जंतर मंतर से प्रधानमंत्री की ओर मार्च किया परन्तु दिल्ली प्रशासन ने भारी पुलिस  बल लगा कर पार्लियामेंट थाने के निकट उन्हें रोक लिया इस बींच प्रदर्शन कारियो एवं पुलिस के बीच काफी नोक झोंक हुई तथा प्रदर्शन कारी वहीं धरने पर बैठ गए और काफी देर तक सरकार विरोधी नारे लगाते रहे। बाद में भारी सुरक्षा के बींच कौंसिल का एक प्रतिनिधि मण्डल ने प्रधान मंत्री आवास जाकर अपनी मांग के सम्बन्ध में ज्ञापन दिया। प्रदर्शन में आल इण्डिया गरीब मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अजीमुद्दीन वाइज़ अपने सैकड़ो साथियों साथ सम्मलित हुए। मुस्लिम पोलिटिकल कौंसिल के डॉ० हफ़ीज़ राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के राष्ट्रीय कोषाध्य्क्ष मौलाना शहाब अख्तर क़ासमी, राष्ट्रीय सचिव मुफ़्ती खालिद बंगाल ,युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुक्तदा हुसैन खैरी रज़वी,दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष एस० एम्० नूरुल्लाह उत्तर प्रदेश के युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष नूरुल हुदा अंसारी, अनिल सिंह ,महमूद आलम ,मौलाना हस्सन अहमद क़ासमी ,अंसार अहमद ,शहाबुद्दीन ,इज़हार ,मुमताज़ अहमद अंसारी,सहित बड़ी संख्या में लोगो ने भाग लिया।

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