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जगदीश्वर चतुर्वेदी

जगदीश्वर चतुर्वेदी। लेखक कोलकाता विश्वविद्यालय के अवकाशप्राप्त प्रोफेसर व जवाहर लाल नेहरूविश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष हैं। वे हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।

जनता के राम, जनता के हवाले : विहिप ने ने मंदिर निर्माण के नाम पर करोड़ों का जो चंदा वसूला है उसे वह तुरंत भारत सरकार के खजाने में जमा कराए

Jagadishwar Chaturvedi at Barabanki

जनता के राम, जनता के हवाले : विहिप ने ने मंदिर निर्माण के नाम पर करोड़ों का जो चंदा वसूला है उसे वह तुरंत भारत सरकार के खजाने में जमा कराए It becomes the responsibility of the central government that no VHP person be placed in the trust अब राममंदिर केन्द्र सरकार निर्मित ट्रस्ट बनाएगा। मंदिर की जगह भी कोर्ट …

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संघ के लोग तो अनपढ़ता के मास्टर हैं, उनके जमाने में शिक्षा का ढांचा टूटना है, जेएनयू उदाहरण है

JNU photo tweeted bu Umar Khalid

RSS's future agenda of education is nationalism, spiritualism, Indianism, Hinduism and illiteracy. मीडिया इस मूसलाधार मूल्य वर्षा में जेएनयू के प्रति घृणा का छोंक लेकर शामिल हुआ है।

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मोदीजी इंदिरा जी कुर्बानी को छिपा नहीं सकते, श्री मती गांधी की कुर्बानी तो देश की फिक्स्ड डिपोजिट है

Indira Gandhi

मोदीजी इंदिरा जी कुर्बानी को छिपा नहीं सकते, श्री मती गांधी की कुर्बानी तो देश की फिक्स्ड डिपोजिट है Modiji cannot hide Indira ji sacrifice कल्पना कीजिए आज के ही दिन श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या (Assassination of indira gandhi) के बजाय किसी आरएसएस सदस्य पीएम की हत्या हुई होती तो क्या आज मोदी सरकार पटेल पटेल जप रही होती …

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जब मोदी-आरएसएस से देश को खतरा नहीं है तो ओवैसी से कैसे खतरा हो सकता है!

Jagadishwar Chaturvedi on Haryana elections

जब मोदी-आरएसएस से देश को खतरा नहीं है तो ओवैसी से कैसे खतरा हो सकता है! नरेंद्र मोदी अकेले पीएम हैं जिन्होंने जनादेश को धनादेश के जरिए बार बार पलटा है। धनादेश और शासकीय आतंक से दो अस्त्र हैं उनके पास, इनके जरिए वे रोज लोकतंत्र की जड़ों में मट्ठा डाल रहे हैं। मोदी शासन में जिस तरह गुलाम भाषा, …

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मित्रों ! मार्क्सवाद को जान तो लो ! ध्यान रहे देश में लोकतंत्र संकट में है क्रांति नहीं

Karl Marx

फेसबुक पर युवाओं की सक्रियता खुशी देती है और उनकी तेज प्रतिक्रिया ऊर्जा देती है लेकिन यदि वह प्रतिक्रिया मार्क्सवादी विभ्रमों और विकृतियों की शिकार हो या वामपंथी बचकानेपन की शिकार हो तो मार्क्स-एंगेल्स का पाठ फिर से पढ़ने -पढ़ाने को मजबूर करती है। Excitement of internet Marx lovers हमारे नेट मार्क्स प्रेमियों की उत्तेजना यदि सच में सही है …

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गीता, आरएसएस और नेहरू : क्या संघ परिवार आज किसी संकट से गुजर रहा है ?

Geeta RSS and Nehru Is the Sangh Parivar going through a crisis today

भाजपा-आरएसएस के सत्ता में आने के बाद श्रीमद्भगवद्गीता (Shrimad Bhagavad Gita) को लेकर देश में अचानक बहस हो रही है और इस बहस को पैदा करने में संघ समर्थित संतों-महंतों और-मीडिया की बड़ी भूमिका है। इवेंट बनेगा तो मीडिया हो-हल्ला होगा! इवेंट बनाना मासकल्चर का अंग है जबकि गीता संस्कृति का अंग है। गीता जयन्ती (Geeta Jayanti) के मौके पर …

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देश को कश्मीर बनाओ !!

Amit Shah Narendtra Modi

पीएम मोदी और आरएसएस (PM Modi and RSS) को मिलकर देश के सभी विपक्षी नेताओं, कार्यकर्ताओं को हमेशा के लिए जेल में डाल देना चाहिए!! ये सभी लोग बेहद घटिया, लुटेरे, भ्रष्ट आदि हैं!! भ्रष्ट लोगों की जगह जेल है। देश को इस समय पीएम मोदी और आरएसएस की सख्त जरूरत है। घट-घट से उठी आवाज विपक्ष को मारो हजार …

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भारत ने युद्ध नहीं बुद्ध दिए, पर मोदी के तो आदर्श ट्रम्प हैं बुद्ध नहीं

Modi in UNGA

ट्रंप का जो व्यक्ति प्रचार करे वह बुद्ध का कभी अनुयायी नहीं हो सकता पीएम मोदी ने अपने साढ़े पांच साल के कार्यकाल में भारतीय उपमहाद्वीप में शांति स्थापना के लिए कोई पहल नहीं की, उलटे पहले के शांतिप्रिय माहौल को पाकिस्तान के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए खराब किया है। यह वे शांति के पक्षधर कभी नहीं रहे, उन्होंने हमेशा …

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ह्यूस्टन में मोदी के पाखंड – 50 दिन में कश्मीर जाकर कश्मीरियों से मिलने के लिए समय निकाल नहीं पाए

Trump got 16 percent

पीएम अब तक 50 दिन में कश्मीर जाकर कश्मीरियों से मिलने के लिए समय निकाल नहीं पाए, लेकिन अमेरिका में कश्मीरी पंडितों से मिलने का उनको समय मिल गया ! सवाल यह है कश्मीरी कहां रहते हैं ? कश्मीर में या अमेरिका में ? 370 हटाने के बहाने जुल्म कश्मीर में हो रहा है या अमेरिका में ! पीएम ! …

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मैं तो हिन्दी के बिना जी नहीं सकता, पर सरकार को जलसे की जरूरत क्यों है ॽ

Jagadishwar Chaturvedi

आज 14 सितम्बर है। सारे देश में केन्द्र सरकार के दफ्तरों में हिन्दी दिवस का दिन है। सरकार की आदत है वह कोई काम जलसे के बिना नहीं करती। सरकार की नजर प्रचार पर होती है वह जितना हिन्दी भाषा में काम करती है, उससे ज्यादा ढोल पीटती है। सरकार को भाषा से कम प्रचार से ज्यादा प्रेम है, हम …

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