Articles by ललित सुरजन

Mahatma Gandhi statue in the Parliament premises. (File Photo: IANS)

प्रकाश भी थे और प्रकाश स्तंभ भी महात्मा गांधी

महात्मा गांधी – विराट व्यक्तित्व को समझने की अधूरी कोशिश… The great personality of Mahatma Gandhi महात्मा गांधी के विराट व्यक्तित्व की थाह पाना असंभव है। विश्वकवि रवींद्रनाथ ठाकुर उनके सहचर मित्र थे तो उपन्यास…


jawahar lal nehru

भगत सिंह ने जवाहरलाल नेहरू को अपना नेता क्यों माना? सुभाषचंद्र बोस ने महात्मा गांधी को ”राष्ट्रपिता” का संबोधन क्यों दिया?

स्वाधीनता और जनतंत्र का रिश्ता | Relation of freedom and democracy आज हम आज़ादी के बहत्तर साल पूरे कर स्वाधीन मुल्क के तिहत्तरवें वर्ष में पहला कदम रख रहे हैं। इस मुबारक मौके पर एक…


Lalit Surjan ललित सुरजन। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, स्तंभकार व साहित्यकार हैं। देशबन्धु के प्रधान संपादक

साठ साल का देशबन्धु

‘प्रिंटर्स डेविल’ (Printer devils) याने छापाखाने का शैतान अखबार जगत (Newspaper industry) में और पुस्तकों की दुनिया में भी एक प्रचलित मुहावरा रहा है। छपी हुई सामग्री (Printed material) में कोई शब्द या अक्षर इधर…


Narendra Modi An important message to the nation

संघ-भाजपा हारे, मोदी जीते, अहम् ब्रह्मास्मि मोदीवाद का पहला सूत्र

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान ने एक वाक्य में पूरी कहानी कह दी है कि  ”यह मोदीवाद की जीत है।” इसके साथ ही उन्होंने…


Narendra Modi An important message to the nation

नरेंद्र मोदी को न एनडीए की परवाह है, न भाजपा की, और न पितृसंस्था संघ की

एक ओर अभूतपूर्व शोर-शराबा, दूसरी तरफ असाधारण चुप्पी। सत्रहवीं लोकसभा (Seventh Lok Sabha) के चुनावी परिदृश्य (Electoral scenario) को शायद इस एक वाक्य में समेटा जा सकता है! इतना शोर क्यों है, कारण समझना शायद…


Lalit Surjan ललित सुरजन। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, स्तंभकार व साहित्यकार हैं। देशबन्धु के प्रधान संपादक

‘न्याय’ : भाजपा की शंका के मुकाबले कांग्रेस के वायदे पर एतबार क्यों है ?

[siteorigin_widget class=”ai_widget”][/siteorigin_widget] ‘न्याय’ : भाजपा की शंका के मुकाबले कांग्रेस के वायदे पर एतबार क्यों है ? कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (Congress President Rahul Gandhi) ने न्यूनतम आय योजना (Minimum income plan) अर्थात ‘न्याय‘ लागू…


valentine day

वेलेन्टाइन डे का भारतीयकरण और विरोध

आज जब यह कॉलम (Column) छपेगा तब वेलेंटाइन डे (Valentine’s Day) लिए ठीक एक सप्ताह बाकी बचेगा। यह रोचक संयोग है कि इस वर्ष वेलेंटाइन डे और बसंत पंचमी (Basant Panchami) दोनों पर्व एक साथ…


Lalit Surjan ललित सुरजन। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, स्तंभकार व साहित्यकार हैं। देशबन्धु के प्रधान संपादक

हम जैसे पत्रकारों के लिए यही उचित है कि चुनाव यदि युद्ध है तो वर्तमान सत्ता के विरुद्ध न लिखें

हम जैसे पत्रकारों के लिए यही उचित है कि चुनाव यदि युद्ध है तो वर्तमान सत्ता के विरुद्ध न लिखें ललित सुरजन आसन्न विधानसभा चुनावों के संदर्भ में अन्यत्र प्रकाशित इस टिप्पणी का जायजा लीजिए-…


Modi in UNGA

अडवाणी हों या मोदी : क्या फर्क पड़ता है?

मोदी और अडवाणी, दोनों ने राजधर्म का पालन नहीं किया… Both Modi and Advani did not follow Rajdharma… यह बहुप्रचारित है कि भारतीय जनता पार्टी, भारतीय संस्कृति की संरक्षक, संवाहक और संपोषक है। उसकी यह…


Lalit Surjan ललित सुरजन। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, स्तंभकार व साहित्यकार हैं। देशबन्धु के प्रधान संपादक

प्रचंड और बाबूराम भट्टराई जनतान्त्रिक राजनीति में आ सकते हैं तो भारत के माओवादियों क्यों नहीं

नक्सली हिंसा : नजरिया अपना-अपना Prachanda and Baburam Bhattarai can enter democratic politics, so why not the Maoists of India ? भारत, जैसा कि नाम से ही अभिव्यंजित होता है, बुद्धिमानों का देश है। इसीलिये इस…