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राम पुनियानी

Ram Puniyani was a professor in biomedical engineering at the Indian Institute of Technology Bombay, and took voluntary retirement in December 2004 to work full time for communal harmony in India. He is involved with human rights activities from last two decades.He is associated with various secular and democratic initiatives like All India Secular Forum, Center for Study of Society and Secularism and ANHAD. He is Our esteemed columnist

Ambedkar’s Ideology: Religion, Nationalism and Indian Constitution

dr. bhimrao ambedkar

In order to gain larger legitimacy, RSS has been making claims of sorts. One of those that was made a few months back was that Gandhi was impressed by the functioning of RSS. Now on the heels of that comes another distortion that Ambedkar believed in Sangh ideology (Feb 15, 2015). This was stated by RSS Sarsanghchalak and Mohan Bhagwat. …

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समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता शब्द संविधान की उद्देश्यिका से गायब- हवा का रूख भांपने की कवायद

debate, thought, analysis,

क्या ‘सेक्युलर‘ शब्द को संविधान से हटा सकती है सरकार? शब्द केवल शब्द नहीं होते-विशेषकर तब, जबकि वे संविधान जैसी महत्वपूर्ण पुस्तक के हिस्से हों। वे हमारी प्रतिबद्धताओं और हमारे मूल्यों को इंगित करते हैं। हाल में, गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर, मोदी सरकार द्वारा जारी किये गए एक विज्ञापन में प्रकाशित संविधान की उद्देश्यिका से ‘धर्मनिरपेक्ष’ व ‘समाजवादी’ …

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भारतीय राष्ट्रवाद पर हिन्दुत्व की राजनीति का पहला बड़ा हमला था गांधी की हत्या

Godse's glorification in Gandhi's country?

समय बदल रहा है और इस परिवर्तन की गति काफी तीव्र है। पिछले कुछ दशकों में अधिकांश हिन्दू राष्ट्रवादियों को अपने नायक नाथूराम गोडसे के प्रति अपने प्रशंसाभाव को दबा-छिपाकर रखने की आदत-सी पड़ गई थी। कभी कभार, कुछ कार्यक्रमों में उसका गुणगान किया जाता था परंतु ऐसे कार्यक्रम बहुत छोटे पैमाने पर आयोजित होते थे और उनका अधिक प्रचार …

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राजनीति की बलिवेदी पर इतिहास की बलि

Ram Puniyani राम पुनियानी, लेखक आई.आई.टी. मुंबई में पढ़ाते थे और सन् 2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं।)

मुस्लिम शासकों के आगमन के बहुत पहले से भारत में शूद्रों को अछूत माना जाता था और वे समाज के सबसे दमित और शोषित वर्ग में शामिल थे। उत्तर-वैदिक गुप्तकाल के बाद से अछूत प्रथा और जाति व्यवस्था की क्रूरता और उसकी कठोरता में वृद्धि होती गई।

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Is the Face of Hinduism Changing?

Ram Puniyani राम पुनियानी, लेखक आई.आई.टी. मुंबई में पढ़ाते थे और सन् 2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं।)

Fali S Nariman recently made a very significant observation on the current political situation in India. The distinguished Constitutional jurist noted: “Hinduism has traditionally been the most tolerant of all Indian faiths. But, recurrent instances of religious tension, fanned by fanaticism and hate speech, have shown that the Hindu tradition of tolerance is showing signs of strain…my apprehension is that …

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बांटने वाली राजनीति के दो हथियार- नफरत फैलाने वाली भाषा और पितृसत्तात्मक मूल्य

dr. ram puniyani

पिछले आम चुनाव में विजय हासिल करने के बाद से भाजपा का चुनावी मुकाबलों में प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा है। आम चुनाव के बाद हुये उपचुनावों में पार्टी को करारी मात खानी पड़ी है। बिहार में भाजपा को परास्त करने में लालू-नीतीश मॉडल काम आया। उत्तरप्रदेश में उपचुनाव में क्या इस मॉडल को राज्य की राजनैतिक पार्टियां अपना सकीं …

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Does love know Religious boundaries?

Ram Puniyani राम पुनियानी, लेखक आई.आई.टी. मुंबई में पढ़ाते थे और सन् 2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं।)

Communal politics, communal violence all over used women’s bodies as the site of contestation and community honor. This is the worst expression of patriarchal values inherent in the communal politics. We recall that it was the presentation of a road accident between boys of two religious communities that was propagated as an issue of the honor of ‘our girl’ being …

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क्या मोदी की तुलना हिटलर से की जा सकती है?

Modi in UNGA

दुनिया के सबसे बड़े प्रजातन्त्र का भविष्य डावांडोल है The future of the world’s largest democracy is turbulent सन् 2014 के आम चुनाव (2014 general election) में नरेन्द्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से, देश के बुद्धिजीवियों व राजनैतिक समीक्षकों में इस मुद्दे पर बहस चल रही है कि आने वाले दिन कैसे होंगे। क्या वे ‘अच्छे‘ होंगे …

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पिंक रेवोल्यूशन- एक बार फिर राजनीति में पहचान से जुड़े मुद्दे

COW

मजबूत नेता नहीं होता तानाशाहीपूर्ण और एकाधिकारी विघटनकारी राजनीति के पुरोधाओं ने यह वायदा किया था कि इस (2014) चुनाव में वे केवल विकास और सुशासन से जुड़े मुद्दों पर बात करेंगे। परन्तु यह शायद केवल कहने भर के लिये था। जहाँ गुजरात के विकास, मजबूत नेता, सुशासन आदि के बारे में जमकर प्रचार किया जा रहा है वहीं ऐसा …

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समकालीन दलित राजनीति और अम्बेडकर का जाति उन्मूलन का लक्ष्य

Contemporary Dalit Politics and Ambedkar’s Aim for Caste Elimination गत 28 फरवरी 2014 को लोक जनशक्ति पार्टी (एल.जे.पी.) के अध्यक्ष रामविलास पासवान अपनी पार्टी सहित, राजग गठबंधन में शामिल हो गये। ये वही पासवान हैं, जो 12 साल पहले, गुजरात में कत्ल-ओ-गारत शुरू होते ही राजग गठबंधन से यह कहते हुये बाहर हो गये थे कि गुजरात में हो रही …

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Liberal Hinduism v/s Sectarian Hindutva

opinion, debate

‘Hinduism is Brahmanic theology’ Banning or attacking the books in current times has been aplenty. There have been many reasons given for this intolerant attitude by different social-political groups. The cases of Satanic Verses by Salman Rushdie, Taslima Nasreen’s Lajja, book on Sonia Gandhi Red Saree, A.K. Ramanujan’s Three Hundred Ramayans are some of the major examples. There is a …

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आईए, अनुच्छेद 370 को समझें

Article 370

धार्मिक राष्ट्रवाद के नशे में गाफिल रहने वालों को आमजनों की क्षेत्रीय व नस्लीय आकांक्षाएं दिखलाई नहीं देतीं। विभिन्न रंगों के अति राष्ट्रवादी भी इसी दृष्टिदोष से पीड़ित रहते हैं। भारतीय संघ के गठन के साथ ही, हिमाचल प्रदेश, उत्तरपूर्वी राज्यों और जम्मूकश्मीर के संघ में विलय का प्रश्न चुनौती बनकर उभरा। इन सभी चुनौतियों का अलगअलग ढँग से मुकाबला …

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बीमार क्यों है राष्ट्रीय एकता परिषद?

Ram Puniyani राम पुनियानी, लेखक आई.आई.टी. मुंबई में पढ़ाते थे और सन् 2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं।)

राष्ट्रीय एकता परिषद (National integration Council) की 23 सितम्बर 2013 को दिल्ली में आयोजित बैठक बेनतीजा और निराशाजनक रही। मुजफ्फरनगर दंगों की पृष्ठभूमि (Background of Muzaffarnagar Riots) और देश में एक वर्ष के भीतर होने वाले आम चुनावों के परिप्रेक्ष्य में यह उम्मीद थी कि सरकार इस बैठक में ऐसी कोई आचार संहिता प्रस्तुत करेगी, जिसका पालन सभी से अपेक्षित …

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