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भारत की आजादी में खान अब्दुल गफ्फार खान के रोल को भुलाया नहीं जा सकता

बुशरा खानम फहाद

वतन की ख़ाक से मर कर भी हम को उन्स बाक़ी है

मज़ा दामान-ए-मादर का है इस मिट्टी के दामन में

बादशाह खां Badshah Khan और फ्रंटियर गांधी Frontier Gandhi के नाम से मशहूर.. भारत रत्न ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान Bharat Ratna Khan Abdul Ghafar Khan की आज यौमे वफ़ात है।

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गांधी जी के सबसे अज़ीज़ दोस्त, अहिंसा के पुजारी, एक सच्चे राष्ट्रवादी थे बादशाह खां। डॉ. राजेंद्र प्रसाद जब संविधान सभा के प्रेसिडेंट बने, तो उनके स्वागत में सात लोगों ने अंग्रेजी में भाषण दिया। बादशाह खां अकेले थे, जो हिंदी में बोले।

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भारत की आजादी में खान अब्दुल गफ्फार खान के रोल को भुलाया नहीं जा सकता है। उन्होंने महात्मा गांधी के साथ मिलकर अहिंसा आंदोलन की शुरुआत की।

अपने जीवन के 42 साल ब्रिटिश राज और फिर पाकिस्तान की जेलों में गुज़ार दिए। जेल में उन्होंने बहुत ज़ुल्म का बर्दाश्त किए। अक्सर उनके पैरों में लोहे की बेड़ियां बंधी होती थीं।

आज का दिन हमें मौक़ा देता है उनकी क़ुर्बानियों को याद करने का।

(बुशरा खानम फहाद, चर्चित टीवी पत्रकार हैं। इस समय वे ज़ी सलाम उर्दू समाचार चैनल में सीनियर एंकर हैं।)

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