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योगीराज की कृपा : जंतर-मंतर पर दलितों ने लगाए आजादी के नारे

चंद्रशेखर ने कहा, मनुवाद को जबाव देना नक्सलवाद है, तो मैं नक्सली हूं

 नई दिल्ली। राजधानी का जंतर-मंतर आज नीले और तिरंगे झंड़ों के पटा था। देशभर के हजारों दलित युवा यहां जमा थे, जो जय भीम के साथ साथ ब्राम्हणवाद और संघवाद के आजादी के नारे लगा रहे थे। मौका भीम आर्मी की ओर से आयोजित प्रदर्शन का था, जिससे नेता चंद्रशेखर आजाद रावण पर सहारनपुर में हुई हिंसा के बाद आपराधिक मुदकमे दर्ज किए गए। इस आंदोलन को समर्थन देने गुजरात ऊना आंदोलन के नेता जिग्नेश मेवानी, जेएनयू नेता कन्हैया कुमार और खालिद उमर भी पहुंचे थे।

यहां पहुंचे दलित युवाओं में महिलाओं की संख्या काफी अधिक थी, तमाम युवा चंद्रशेखर का मुखौटा लगाए हुए थे। चंद्रशेखर ने यहां यह भी घोषणा की, कि उनकी गिरफ्तारी की स्थिति में भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन सिंह को नेतृत्व सौंपा जाएगा, जिससे आंदोलन जारी रहे।

आज के आंदोलन में बड़ी संख्या में दलित हिस्सा लेंगे, इस बात के कयास पहले से ही लगाए जा रहे थे। शुरु में यह खबर भी थी, कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली है, पर आंदोलनकारी प्रदर्शन करने पर अड़े हैं। यहां पहुंचने वाले दलितों की संख्या को लेकर ही पुलिस पहले से मुस्तैद थी, हालांकि आयोजकों का आरोप है, कि पुलिस ने उनके तमाम समर्थकों को दिल्ली की सीमा में आने से पहले ही रोक लिया, ये समर्थक आगरा, मथुरा, मेरठ से आ रहे थे।

इस आयोजन में ब्राम्हणवाद के खिलाफ जमकर भाषणवाजी की गई, यहां तक, कि यहां आए जिन युवाओँ के हाथ में भगवान के नाम पर धागे बंधे थे या जिन युवाओं ने कड़े पहन रखे थे, वे उन्होंने उतारकर फैंक दिए। ये युवा अपने नेता चंद्रशेखर को देखने आई थी और वे जैसे ही मंच पर आए युवाओं का समूह जय भीम-जय भीम के नारे लगाने लगे।

चंद्रशेखर ने भी युवाओं का स्वागत स्वीकार करते हुए संबोधन शुरू किया।

चंद्रशेखर के हाथ में चोट लगी हुई थी जिसकी वजह से उन्होंने अपने हाथ में पट्टी बांध रखी थी। चंद्रशेखर ने बताया कि वो इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए चार मंजिला इमारत कूद कर आए हैं। 

सरकार को चेतावनी देते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि अगर दलित समाज की शर्तों को नहीं माना गया तो देश के ज्यादातर दलित एक साथ 23 तारीख को बौद्ध धर्म अपना लेंगे। इसके बाद उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में दलितों के बौद्ध अपनाने से कच्छाधारी मनुवादियों का हलक सूख जाएगा।

अपने उपर लग रहे नक्सली कनेक्शन के आरोप पर चंद्रशेखर का कहना था कि मुझे स्वीकार्य है नक्सली होना। अगर अपने समाज के उत्थान का काम करना, अपनी बहन-बेटियों को सुरक्षा देना, मनुवादियों के अत्याचार का जवाब देना नक्सली है तो मुझे स्वीकार्य है नक्सली होना।

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