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Baba Saheb Ambedkar The biggest hero of the social revolution in India बाबा साहेब अंबेडकर : भारत में सामाजिक क्रांति के सबसे बड़े नायक

डॉ भीमराव अंबेडकर का संदेश, भाजपा-आरएसएस मुक्त देश!

डॉ भीमराव अंबेडकर का संदेश, भाजपा-आरएसएस मुक्त देश!

“भाजपा भगाओ-संविधान बचाओ!” के नारों के साथ बिहार के भागलपुर जिला में डॉ. भीमराव अंबेडकर संदेश यात्रा

भागलपुर, 31 दिसंबर। सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार के बैनर तले 10 दिवसीय डॉ. भीमराव अंबेडकर संदेश यात्रा आज भागलपुर शहर में संपन्न हुआ. यात्रा के अंतिम दिन भागलपुर स्टेशन चौक पर यात्री जत्थे के साथ जिला के विभिन्न क्षेत्रों से लोगों का जुटान हुआ.

डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद सभा हुई. सभा के बाद जुलूस की शक्ल में सैकड़ों लोग घंटाघर चौक पर शहीद भगत सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए तिलकामांझी चौक पहुंचे और वहां पर शहीद तिलकामांझी की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद संक्षिप्त सभा के साथ 10 दिवसीय यात्रा के समापन की घोषणा हुई.

स्टेशन चौक पर तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर डॉ. विलक्षण रविदास और वरिष्ठ समाजकर्मी एनुल होदा ने यात्रियों का स्वागत व अभिनंदन किया.

इस मौके पर डॉ. विलक्षण रविदास ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज संविधान विरोधी ताकतें केन्द्र की सरकार पर काबिज हैं. ये ताकतें संविधान व सामाजिक न्याय पर हमला कर रही है.

डॉ. अंबेडकर के वारिसों को संविधान विरोधी ताकतों को उखाड़ फेंकने के लिए आगे बढ़ना है.

उन्होंने कहा कि डॉ अंबेडकर ने संविधान सभा के अंतिम भाषण में सामाजिक-आर्थिक विषमता मिटाने का कार्यभार पेश किया था.डॉ अंबेडकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि हमने राजनीतिक समानता हासिल कर ली है,लेकिन सामाजिक-आर्थिक जीवन में विषमता कायम है.इस विषमता को मिटाकर ही लोकतंत्र को मजबूत किया जा सकता है.संविधान की रक्षा की गारंटी की जा सकती है.

उन्होंने कहा कि हमारे हुक्मरानों ने इस दिशा में ईमानदारी से कोशिश नहीं की.सत्ता-शासन पर मनुवादी ताकतों के शिकंजा कायम रहने के कारण आजादी पूरी नहीं हुई है,लोकतंत्र का विस्तार नहीं हुआ है. हमें पूरी आजादी व वास्तविक लोकतंत्र के लिए लड़ना होगा.

उन्होंने आरएसएस-भाजपा और कांग्रेस को मनुवाद और पूंजीपतियों का संरक्षक करार देते हुए इन शक्तियों को खदेड़ने का आह्वान किया.

सभा को संबोधित करते हुए सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार की कोर कमिटी के सदस्य रिंकु यादव और गौतम कुमार प्रीतम ने कहा कि आरक्षण दलितों-पिछड़ों का संवैधानिक अधिकार है. सत्ता-शासन की संस्थाओं में दलितों-पिछड़ों की संख्यानुपात में भागीदारी की गारंटी के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई. आज भी विभिन्न संस्थाओं में दलितों-पिछड़ों का समुचित प्रतिनिधित्व नहीं है. आरक्षण की सीमा को 50% से 69% करने के साथ न्यायपालिका व निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू करने की जरूरत है. इस देश में लोकतंत्र को मजबूत करने व सामाजिक अन्याय को मिटाने के लिए यह बेहद जरूरी है.

दोनों नेताओं ने कहा कि समाज और राज पर मनुवादी शक्तियों का शिकंजा मजबूत हुआ है.

डॉ अंबेडकर के विचारों की रौशनी में सामाजिक न्याय आंदोलन को तेज करने के साथ नये सिरे से बहुजनों की एकता गढ़ते हुए मनुवादी शक्तियों को मुंहतोड़ जवाब देना है.संविधान को बचाने और संवैधानिक अधिकारों के साथ सामाजिक न्याय की लड़ाई स्थापित राजनीतिक पार्टियों व राजनेताओं के भरोसे नहीं लड़ी जा सकती है.

सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार के कोर कमिटी के सदस्य रामानंद पासवान और अंजनी ने कहा कि भूमि सुधार व एक समान शिक्षा संविधान को जमीन पर उतारने व सामाजिक न्याय की गारंटी का महत्वपूर्ण एजेंडा है. लेकिन दलितों-पिछड़ों का वोट लेकर दिल्ली-पटना की सरकार चलाने वाली पार्टियों के लिए यह एजेंडा नहीं है. बिहार सरकार अविलंब भूमि सुधार आयोग और कॉमन स्कूल सिस्टम आयोग की सिफारिशों को लागू करे और दलितों-बहुजनों को भूमि व शिक्षा के अधिकार की गारंटी करे.

दोनों नेताओं ने कहा कि निजीकरण ने दलितों-वंचितों की वंचना बढ़ाई है.नरेन्द्र मोदी की सरकार घोर पूंजीपति पक्षधर व सामाजिक न्याय विरोधी है.अंबानी-अडानी के दलाल नंबर-1 नरेन्द्र मोदी को उखाड़ फेंकना होगा.

सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार की कोर कमिटी के सदस्य अर्जुन शर्मा और शंकर बिंद ने कहा कि केन्द्र की सरकार में नरेन्द्र मोदी के आने और भाजपा-आर.एस.एस. के मजबूत होने से दलितों-अतिपिछड़ों-मुसलमानों व महिलाओं पर जुल्म चरम पर है. जुल्मी ताकतों को पीछे धकेलने और संविधान व लोकतंत्र बचाने के लिए गांव-गांव से भाजपा-आर.एस.एस. को खदेड़ना होगा. मनुवादी-सांप्रदायिक जहर व कहर को मिटाना होगा.

सभा को संबोधित किया -फूले-अंबेडकर युवा मंच के अजय राम, अंश देव निराला, सामाजिक न्याय आंदोलन के विजय कुमार दास, मिथलेश विश्वास, विभूति, सोनम, संजीव, अभिषेक आनंद, सूरज,महेश अंबेडकर, अखिलेश रविदास, नसीब रविदास, अमोद दास, विभूति दास, योगेंद्र दास, बरूण दास, पॉली पासवान, साजन,राजेश,रणजीत रजक, सद्दाम,नंदन सहित कई एक ने.

सभा व जुलूस में सैकड़ों मौजूद थे.

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