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राहुल गांधी की बातों पर भाजपा की बौखलाहट उसकी घटिया मानसिकता का परिचायक

राहुल गांधी की बातों पर भाजपा की बौखलाहट उसकी घटिया मानसिकता का परिचायक

जगदीश्वर चतुर्वेदी

राहुल गांधी ने पिछले दिनों कई महत्वपूर्ण भाषण विदेशों में दिए, जिस पर भाजपा-बौखलाई हुई है और वे तर्क दे रहे हैं कि राहुल गांधी विदेशों में देश की निंदा कर रहे हैं।

इस प्रसंग में पहली बात यह कि भारत के सामयिक राजनीतिक परिदृश्य की सच्चाई बताना निंदा नहीं है। निंदा और सत्यकथन में अंतर समझने की जरूरत है। इससे भी बड़ी बात यह कि भारत में मीडिया पर जिस तरह के मोदी सरकार ने दवाब पैदा किए हैं, उससे विपक्ष के लिए मीडिया में स्पेस ही नहीं मिल रहा। हर तरह से सभी किस्म के मीडिया को आतंकित करके रखा जा रहा है। ऐसी अवस्था में देश के बाहर बोलना और बताना बेहद जरूरी है, इससे विदेश में रहने वाले भारतीयों और विदेश की सरकारों को भारत के बारे में संतुलित नजरिया बनाने में मदद मिलेगी।

इन सबसे भिन्न बात यह कि आज के दौर में राष्ट्र की सीमाएं नीतियों, अभिव्यक्ति और व्यापार के मामले में खत्म हो चुकी हैं। भारत के प्रत्येक नागरिक के पास पहले सीमाओं में रहकर कहने की आजादी थी, लेकिन आज ऐसा नहीं है। विदेशों में रहने वाले नागरिकों को भारत के बारे में जानने का लोकतांत्रिक हक है, उस हक से मोदी सरकार वंचित किए हुए है, वह बाहर जाने वालों से कहती है कि बाहर जाएं लेकिन सरकार के खिलाफ न बोलें, जो बोलता है उसे परेशान किया गया, लेकिन राहुल गांधी तो सामान्य नागरिक नहीं हैं, वे कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। इस पार्टी ने चार दशक से भी ज्यादा समय भारत पर शासन किया है। उसके दुनिया के तमाम देशों के राजनीतिक दलों से बिरादराना संबंध हैं। कांग्रेस की आधुनिक भारत के निर्माण में केन्द्रीय भूमिका रही है। भारत लंबे समय से विश्व क्षितिज पर तीसरी दुनिया के देशों की ओर से नीतिगत मामलों में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है। जाहिर है ये वे नीतियां रही हैं जिनको कांग्रेस ने बनाया। इसलिए कांग्रेस अध्यक्ष की बातों को विदेशों में गंभीरता से लेते हैं।

भारत में भाजपा के नेतागण अपने बयानों के जरिए जिस तरह की घटिया मानसिकता का परिचय दे रहे हैं वह अपने आप में निंदनीय है।

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