गांधी जी के ऊपर दो अमरीकी लेखकों की पुस्तकों का विमोचन 31 को

Mahatma Gandhi 1

Release of books by two American authors on Gandhiji on 31

नई दिल्ली, 28 अक्तूबर 2019। गांधी जी पर दो विदेशी लेखकों की किताबों का विमोचन आगामी 31 अक्टूबर को गांधी शांति प्रतिष्ठान में होगा।

पिछले दिनों गांधी शांति प्रतिष्ठान की पत्रिका “गांधी-मार्ग का विशेषांक” जेम्स डबल्यू. डगलस की किताब का सार बताती ‘गांधी: अकथनीय सत्य का ताप’ पर प्रकाशित हुआ था, जो काफी चर्चित रहा।

जेम्स डब्ल्यू. “जिम” डगलस (James W. “Jim” Douglass) एक अमेरिकी लेखक, कार्यकर्ता और ईसाई धर्मशास्त्री हैं। वह सांता क्लारा विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। उन्होंने और उनकी पत्नी, शेली डगलस ने, पोल्स्बो, वाशिंगटन में अहिंसक कार्रवाई के लिए ग्राउंड ज़ीरो सेंटर और बर्मिंघम, अलबामा में एक कैथोलिक वर्कर हाउस मैरीलैंड हाउस की स्थापना की। जेम्स डगलस की गांधी हत्या पर किताब “Gandhi and the Unspeakable: His Final Experiment with Truth” काफी चर्चित है।

एक अन्य अमेरिकी लेखक रॉबर्ट एल्सबर्ग ओर्बिस बुक्स के मुख्य और प्रकाशक के संपादक हैं।

गांधी को व्यापक रूप से बीसवीं शताब्दी के महान नैतिक पैगंबरों में से एक माना जाता है। रॉबर्ट एल्सबर्ग की पुस्तक लीड काइंडली लाइट : गांधी ऑन क्रिश्यनटी ! (Gandhi on Cristianity By Robert Ellsberg) यीशु और ईसाई धर्म के साथ गांधीजीका जुड़ाव पर केंद्रित है। एक आस्थावान सनातनी हिंदू के रूप में, गांधी जी ईसाई हठधर्मिता को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन यीशु में उन्होंने इतिहास और अहिंसा के महान पैगंबरों में से एक को पहचान लिया था।

दोनों किताबों के दक्षिण एशियाई संस्करण के प्रकाशन का अधिकार गुजरात की प्रकाशन संस्था यज्ञ प्रकाशन के पास है, जिसने इन दोनों ही किताबों का भारतीय संस्करण अभी-अभी प्रकाशित किया है।

31 अक्टूबर को दोनों किताबों का विमोचन गांधि शांति प्रतिष्ठान दिल्ली में होगा, जिसमें रॉबर्ट एल्सबर्ग व उनकी पत्नी मोनिका उपस्थित रहेंगी। इन अमरीकी गांधी अध्येताओं के बीच पुल का काम कर रहे भारतीय अमरीकी अध्येता मोहन त्रिवेदी व समाजशास्त्री आशीष नंदी भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे।

रॉबर्ट एल्सबर्ग परसों गुजरात में थे।

रॉबर्ट एल्सबर्ग महान गांधीवादी नारायण देसाई की बेटी डॉ. उमा गाडेकर, (जिनके खुद के पिता, महादेव देसाई, गांधी के वफादार सचिव थे, और जिनकी मृत्यु जेल में महात्मा की बांहों में हुई थी।) से मिले।