शब्द

Chand Kavita

मरजाने चाँद के सदके… मेरे कोठे दिया बारियाँ…

….कार्तिक पूर्णिमा की शाम से.. वो गंगा के तट पर है… मौजों में परछावे डालता.. सिरते दीप को निहारता.. सुर्ख़ आँखों वाला चाँद.. कच्ची नींद का जागा झींका.. माथे पर ढेर सी रोलियों का टीका……

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Jan Sahitya parv

संकीर्णता ने हिंदी साहित्य को बंजर और साम्यवाद को मध्यमवर्गीय बना दिया

संकीर्णता ने हिंदी साहित्य को बंजर और साम्यवाद को मध्यमवर्गीय बना दिया जयपुर, 16 नवंबर 2019. जनवादी लेखक संघ और जनसंस्कृति मंच द्वारा देराश्री शिक्षक सदन, राजस्थान विश्वविद्यालय में आयोजित किये जा रहे जन साहित्य…


Gaon ka kosa

.इस छोर… ढूँढता हूँ मैं … गुमशुदा ख़ुशियों का सिरा … उस छोर मेरी तलाश में है … इक गाँव सिरफिरा….

ऊँची रिहायशी बिल्डिंगों की खिड़कियों से झाँकूँ तो शहर बौना लगता है… चींटियों सी रेंगती कारें और खिलौने से मकाँ.. हवाओ के सफ़र से मैं भी मानने लगा हूँ कि क़द बढ़ गया है मेरा……


Dr. Kavita Arora on Deepawali Diya

बाज़ार में पसरा… ये जश्न.. किसका जश्न है…? कोई मामूली बात नहीं… यह राम की घर वापसी का प्रश्न है

बड़ी हसरत से तकते हैं शक्लों को मिट्टी के दिये… बाज़ार के कोनों से… और फिर उदासी ओढ़ कर सोचते हैं अक्सर… क्या उस नदी ने झूठ बोला था… इक उम्र तलक सरयू ने बांची..कथा…


अनिल कुमार पुष्कर : कवि और आलोचक

देह-विमर्श के मसालों और सेहतमंद स्त्रीवादी मसालों में फर्क क्या है

स्त्रीवादी बनाम देहवादी विमर्श पर एक टिप्पणी A commentary on feminist versus sexist discourse हिन्दुस्तान में कई तरह के मसालों को बनाने की तमाम विधियाँ लम्बे समय से ईजाद की जाती रही हैं. जिस तरह…


Literature news साहित्य

विचार के बिना अधूरी होती है रचना

प्रलेसं के एक दिवसीय रचना शिविर में कविता, कहानी, लेखन पर हुआ विमर्श वरिष्ठ रचनाकारों से रू-ब-रू हुए युवा लेखक तेजी से बदलते समाज में रचनाकारों की दृष्टि और भूमिका पर हुई चर्चा भोपाल। बेहतर…


Modi Gandhi ji

बेटे से बतरस : डेढ़ सदी के बाद फजीहत/ किससे मांगें आदर बेटा

बेटे से बतरस : डेढ़ सदी के बाद फजीहत/ किससे मांगें आदर बेटा ************ वे नेशन के फादर बेटा करके बने अनादर बेटा * उनके पांव बहुत हैं लंबे छोटी निकली चादर बेटा * माफी…


'जाग मछन्दर जाग' वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि सुभाष राय की दूसरी पुस्तक है।

सुभाष राय की चिंताओं, सरोकार और लेखकीय दृष्टि से परिचित कराती एक पुस्तक ‘ जाग मछन्दर जाग’

( ‘जाग मछन्दर जाग‘ वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि सुभाष राय की दूसरी पुस्तक है। इसके पहले बोधि प्रकाशन से प्रकाशित उनका कविता संग्रह ‘सलीब पर सच‘ काफी चर्चित रहा। ‘जाग मछन्दर जाग’ अमन प्रकाशन कानपुर…


Main Ek Karsewak Tha book by Bhanwar Meghwanshi

‘मैं एक कारसेवक था’ : आत्मकथा के बहाने मानवता की जरूरी लड़ाई की किताब !!

“मेरी कहानियां, मेरे परिवार की कहानियां – वे भारत में कहानियां थी ही नहीं. वो तो ज़िंदगी थी.जब नए मुल्क में मेरे नए दोस्त बने, तब ही यह हुआ कि मेरे परिवार के साथ जो…


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गुजरात के गधे : लेकिन राजा से कहा था बारिश होगी, बारिश होगी, बारिश होगी

गुजरात के गधे  Asses of gujrat                 राजा का मन खराब है, रात को नींद नहीं कोई सुनता नहीं बात, पुलिस को गोली चलाने को कहा है पुलिस चुन-चुनकर…