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चौथा खंभा

Critical News of Journalism – The Fourth Pillar of Democracy, Opinion, and Media Education
लोकतंत्र का चौथा खंभा पत्रकारिता जगत की आलोचनात्मक खबरें, ओपिनियन, और मीडिया शिक्षा

गोदी मीडिया को नेशनल प्रेस डे पर जस्टिस काटजू ने दी ऐसे बधाई, सुलग जाएगी गोदी मीडिया की

Justice Markandey Katju

गोदी मीडिया को नेशनल प्रेस डे पर जस्टिस काटजू ने दी ऐसे बधाई, सुलग जाएगी गोदी मीडिया की नई दिल्ली, 16 नवंबर 2016. आज राष्ट्रीय प्रेस दिवस है (Today is national press day)। सर्वोच्च न्यायालय के अवकाशप्राप्त न्यायाधीश जस्टिस मार्कंडेय काटजू (Justice Markandey Katju, retired judge of the Supreme Court) ने इस मौके पर गोदी मीडिया को जिस तरह बधाई …

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आज की तारीख में काला दिवस के रूप में मने प्रेस दिवस

national press day राष्ट्रीय प्रेस दिवस

आज की तारीख में काला दिवस के रूप में मने प्रेस दिवस आज राष्ट्रीय प्रेस दिवस है (Today is national press day)। मेरे कई साथी जो मीडिया समूह में मालिकान और संपादकों की चाटुकारिता करते हुए मीडिया की जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ रहे हैं, उनमें से काफी मुझे नकारात्मक सोच का व्यक्ति बताने लगे हैं। मैं उनसे ही पूछता हूं …

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और भी शहर हैं इस मुल्क में दिल्ली के सिवा ?

India news in Hindi

और भी शहर हैं इस मुल्क में दिल्ली के सिवा ? राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में फैले ख़तरनाक वायु प्रदूषण की ख़बरें अभी लगभग सभी राष्ट्रीय टीवी चैनल्स पर चलनी कम भी नहीं हुई थीं कि अचानक दिल्ली में  गत 2 नवंबर को तीस हज़ारी से शुरू हुए पुलिस -वकील संघर्ष ने दिल्ली के वायु प्रदूषण के समाचार की जगह ले …

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बीबीसी : निर्भीक पत्रकारिता का सर्वोच्च स्वर

BBC

इस समय विश्व का अधिकांश भाग हिंसा, संकट, सत्ता संघर्ष, साम्प्रदायिक व जातीय हिंसा तथा तानाशाही आदि के जाल में बुरी तरह उलझा हुआ है। परिणाम स्वरूप अनेक देशों में आम लोगों के जान माल पर घोर संकट आया हुआ है। मानवाधिकारों का घोर हनन (Gross violation of human rights) हो रहा है। लाखों लोग विस्थापित होकर अपने घरों से …

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हमारी पत्रकारिता के पतन की पराकाष्ठा, धिक्कारिये इस तरह के नेताओं और पत्रकारों को

Imran Khan with Narendra Modi

कुबूलनामा ? हमारी पत्रकारिता के पतन की पराकाष्ठा देखिये। आज ‘अमर उजाला‘ की हैड लाइन है – ‘इमरान का कुबूलनामा, जंग हुई तो भारत से हार जायेगा पाकिस्तान’ और सब टाइटिल है – ‘पारंपरिक जंग के परमाणु युद्ध में बदलने की गीदड़ भभकी’ । खबर को भीतर पढ़ने पर इमरान को इस तरह कोट किया गया है – ‘मेरा मानना …

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नंदकिशोर नौटियाल : हिन्दी पत्रकारिता के भीष्म पितामह

नंदकिशोर नौटियाल : हिन्दी पत्रकारिता के भीष्म पितामह | Nandkishore Nautiyal: Bhishma Pitamah of Hindi Journalism

नंदकिशोर नौटियाल : हिन्दी पत्रकारिता के भीष्म पितामह | Nandkishore Nautiyal: Bhishma Pitamah of Hindi Journalism पत्रकारिता को व्यवसाय नहीं, मिशन समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार, हिंदी ब्लिट्ज व नूतन सवेरा के सम्पादक नंदकिशोर नौटियाल (Nandkishore Nautiyal) अब हमारे बीच नहीं है, सुनकर विश्वास नहीं होता, एक गहरी रिक्तता का अहसास हो रहा है। उनके निधन से राष्ट्र की हिंदी पत्रकारिता …

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तो ऐतिहासिक नहीं काल्पनिक पात्र है उमराव जान

Abhishek Bachchan-Aishwarya Rai's Umrao Jaan film

वाकया 2008 का है। मैं उन दिनों इंडियन एक्सप्रेस के लखनऊ ब्यूरो (Lucknow Bureau of Indian Express) में काम करता था। एक दिन अचानक एक खबर एक साथ कई हिंदी अखबारों में छपी कि ऐशबाग कब्रिस्तान में उमराव जान की कब्र (Umrao Jaan’s grave in Aishbagh cemetery) तोड़ कर रास्ता बना दिया गया है। ये खबर जल्द ही दिल्ली मीडिया …

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क्या ये पुण्य प्रसून का संघी था, जो बाहर आ गया ?

Punya Prasun Bajpai

पुण्य प्रसून क्यों किसी ‘उद्धारकर्ता‘ के झूठे अहंकार में फंस रहे है ? —अरुण माहेश्वरी कल रात ही धारा 370 को हटाये जाने के बारे में पुण्य प्रसून वाजपेयी की लंबी, लगभग पचास मिनट की वार्ता (Punya Prasoon Bajpai’s long, nearly fifty-minute talk about the removal of Article 370) को सुना। अपनी इस वार्ता में उन्होंने घुमा-फिरा कर, कश्मीर के …

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रवीश को विश्व के क्रूरतम हत्यारे के नाम का करोड़पति सम्मान मिल गया तो आप खुश होइए, मैं नहीं होता !

Ravish Kumar

मैं मीडिया के चमचमाते करोड़पति चेहरे रवीश को नहीं पसंद करता हूँ। इसकी जगह जल जंगल जमीन माफियाराज के खिलाफ़ लड़ाई में फर्जी मुकदमों के कारण जेल में बन्द, बेघर, बरबाद पत्रकारों को पसंद करता हूँ तो आपकी दिक्कत क्या है। हिन्दुस्तान में इंसान कम पाए जाते हैं। चाहे हत्यारे हों या हत्यारों के विरोधी सबके अपने अपने भगवान होते …

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साठ साल का देशबन्धु

Lalit Surjan ललित सुरजन। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, स्तंभकार व साहित्यकार हैं। देशबन्धु के प्रधान संपादक

‘प्रिंटर्स डेविल’ (Printer devils) याने छापाखाने का शैतान अखबार जगत (Newspaper industry) में और पुस्तकों की दुनिया में भी एक प्रचलित मुहावरा रहा है। छपी हुई सामग्री (Printed material) में कोई शब्द या अक्षर इधर का उधर हो जाए, फलत: अर्थ का अनर्थ होने की नौबत आ जाए तो उसे किसी अदृश्य शक्ति याने शैतान की कारगुजारी बता कर बच …

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