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चौथा खंभा

गोदी मीडिया को नेशनल प्रेस डे पर जस्टिस काटजू ने दी ऐसे बधाई, सुलग जाएगी गोदी मीडिया की

Justice Markandey Katju

गोदी मीडिया को नेशनल प्रेस डे पर जस्टिस काटजू ने दी ऐसे बधाई, सुलग जाएगी गोदी मीडिया की नई दिल्ली, 16 नवंबर 2016. आज राष्ट्रीय प्रेस दिवस है (Today is national press day)। सर्वोच्च न्यायालय के अवकाशप्राप्त न्यायाधीश जस्टिस मार्कंडेय काटजू (Justice Markandey Katju, retired judge of the Supreme Court) ने इस मौके पर गोदी मीडिया को जिस तरह बधाई …

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आज की तारीख में काला दिवस के रूप में मने प्रेस दिवस

national press day राष्ट्रीय प्रेस दिवस

आज की तारीख में काला दिवस के रूप में मने प्रेस दिवस आज राष्ट्रीय प्रेस दिवस है (Today is national press day)। मेरे कई साथी जो मीडिया समूह में मालिकान और संपादकों की चाटुकारिता करते हुए मीडिया की जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ रहे हैं, उनमें से काफी मुझे नकारात्मक सोच का व्यक्ति बताने लगे हैं। मैं उनसे ही पूछता हूं …

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और भी शहर हैं इस मुल्क में दिल्ली के सिवा ?

India news in Hindi

और भी शहर हैं इस मुल्क में दिल्ली के सिवा ? राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में फैले ख़तरनाक वायु प्रदूषण की ख़बरें अभी लगभग सभी राष्ट्रीय टीवी चैनल्स पर चलनी कम भी नहीं हुई थीं कि अचानक दिल्ली में  गत 2 नवंबर को तीस हज़ारी से शुरू हुए पुलिस -वकील संघर्ष ने दिल्ली के वायु प्रदूषण के समाचार की जगह ले …

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बीबीसी : निर्भीक पत्रकारिता का सर्वोच्च स्वर

BBC

इस समय विश्व का अधिकांश भाग हिंसा, संकट, सत्ता संघर्ष, साम्प्रदायिक व जातीय हिंसा तथा तानाशाही आदि के जाल में बुरी तरह उलझा हुआ है। परिणाम स्वरूप अनेक देशों में आम लोगों के जान माल पर घोर संकट आया हुआ है। मानवाधिकारों का घोर हनन (Gross violation of human rights) हो रहा है। लाखों लोग विस्थापित होकर अपने घरों से …

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हमारी पत्रकारिता के पतन की पराकाष्ठा, धिक्कारिये इस तरह के नेताओं और पत्रकारों को

Imran Khan with Narendra Modi

कुबूलनामा ? हमारी पत्रकारिता के पतन की पराकाष्ठा देखिये। आज ‘अमर उजाला‘ की हैड लाइन है – ‘इमरान का कुबूलनामा, जंग हुई तो भारत से हार जायेगा पाकिस्तान’ और सब टाइटिल है – ‘पारंपरिक जंग के परमाणु युद्ध में बदलने की गीदड़ भभकी’ । खबर को भीतर पढ़ने पर इमरान को इस तरह कोट किया गया है – ‘मेरा मानना …

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नंदकिशोर नौटियाल : हिन्दी पत्रकारिता के भीष्म पितामह

नंदकिशोर नौटियाल : हिन्दी पत्रकारिता के भीष्म पितामह | Nandkishore Nautiyal: Bhishma Pitamah of Hindi Journalism

नंदकिशोर नौटियाल : हिन्दी पत्रकारिता के भीष्म पितामह | Nandkishore Nautiyal: Bhishma Pitamah of Hindi Journalism पत्रकारिता को व्यवसाय नहीं, मिशन समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार, हिंदी ब्लिट्ज व नूतन सवेरा के सम्पादक नंदकिशोर नौटियाल (Nandkishore Nautiyal) अब हमारे बीच नहीं है, सुनकर विश्वास नहीं होता, एक गहरी रिक्तता का अहसास हो रहा है। उनके निधन से राष्ट्र की हिंदी पत्रकारिता …

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तो ऐतिहासिक नहीं काल्पनिक पात्र है उमराव जान

Abhishek Bachchan-Aishwarya Rai's Umrao Jaan film

वाकया 2008 का है। मैं उन दिनों इंडियन एक्सप्रेस के लखनऊ ब्यूरो (Lucknow Bureau of Indian Express) में काम करता था। एक दिन अचानक एक खबर एक साथ कई हिंदी अखबारों में छपी कि ऐशबाग कब्रिस्तान में उमराव जान की कब्र (Umrao Jaan’s grave in Aishbagh cemetery) तोड़ कर रास्ता बना दिया गया है। ये खबर जल्द ही दिल्ली मीडिया …

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क्या ये पुण्य प्रसून का संघी था, जो बाहर आ गया ?

Punya Prasun Bajpai

पुण्य प्रसून क्यों किसी ‘उद्धारकर्ता‘ के झूठे अहंकार में फंस रहे है ? —अरुण माहेश्वरी कल रात ही धारा 370 को हटाये जाने के बारे में पुण्य प्रसून वाजपेयी की लंबी, लगभग पचास मिनट की वार्ता (Punya Prasoon Bajpai’s long, nearly fifty-minute talk about the removal of Article 370) को सुना। अपनी इस वार्ता में उन्होंने घुमा-फिरा कर, कश्मीर के …

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रवीश को विश्व के क्रूरतम हत्यारे के नाम का करोड़पति सम्मान मिल गया तो आप खुश होइए, मैं नहीं होता !

Ravish Kumar

मैं मीडिया के चमचमाते करोड़पति चेहरे रवीश को नहीं पसंद करता हूँ। इसकी जगह जल जंगल जमीन माफियाराज के खिलाफ़ लड़ाई में फर्जी मुकदमों के कारण जेल में बन्द, बेघर, बरबाद पत्रकारों को पसंद करता हूँ तो आपकी दिक्कत क्या है। हिन्दुस्तान में इंसान कम पाए जाते हैं। चाहे हत्यारे हों या हत्यारों के विरोधी सबके अपने अपने भगवान होते …

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साठ साल का देशबन्धु

Lalit Surjan ललित सुरजन। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, स्तंभकार व साहित्यकार हैं। देशबन्धु के प्रधान संपादक

‘प्रिंटर्स डेविल’ (Printer devils) याने छापाखाने का शैतान अखबार जगत (Newspaper industry) में और पुस्तकों की दुनिया में भी एक प्रचलित मुहावरा रहा है। छपी हुई सामग्री (Printed material) में कोई शब्द या अक्षर इधर का उधर हो जाए, फलत: अर्थ का अनर्थ होने की नौबत आ जाए तो उसे किसी अदृश्य शक्ति याने शैतान की कारगुजारी बता कर बच …

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लोग कोस रहे हैं/ यह विकृत मानसिकता वालों का कृत्य है/ मगर मैं पूछती हूँ क्या केवल यही सत्य है ??

रेप के मौसम नहीं होते.. उम्र-वुम्र ठिकाने भी नहीं… मंदिर-वंदिर, मस्जिद-वस्जिद, घर-रिश्तेदारी, इराने-वीराने किसी भी कारण ..किसी बहाने .. कहीं भी हो सकता है … चस्का है, लत है हिन्दुस्तान को रेप की .. शर्त लडकी है किसी भी खेप की .. सब चलती है … संविधान हर नये रेप पर नया क़ानून बनाता है … लागू हो गया लागू …

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देश नशे में है .. अफीम की खेती ही फूलेगी फलेगी…तमाशा ख़त्म हुआ ..चलो बजाओ…ताली…

kavita Arora डॉ. कविता अरोरा

महीनों से चल रहा मेला उखड़ने लगा.. खर्चे-वर्चे, हिसाब-विसाब, नफ़े-नुक़सान के कुछ क़िस्से कौन सा घाट किसके हिस्से… अब बस यही फ़ैसला होगा… बंदर बाट होगी काट छाँट होगी… बस कुछ दिन और चलेगा… पान की दुकानों पर बातें… लोगों की आपस में चंद मुलाक़ातें… उसके बाद सब सब कुछ भूल जायेंगे.. गली-गली के मुहाने लगे.. चुनावी चेहरों के पोस्टर …

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देश में आग लगाने का षड़यंत्र : पत्रकार जब चारण हो जाए तो समझ लीजिये देश पर संकट है

Vidya Bhushan Rawat

अंबेडकरवादी मानवाधिकार कार्यकर्ता (Ambedkarwadi human rights activist) विद्या भूषण रावत (Vidya Bhushan Rawat) का यह आलेख “उत्पीड़न की संस्कृति के विकल्प की जरूरत : पत्रकार जब चारण हो जाए तो समझ लीजिये देश पर संकट है” मूलतः 10 जुलाई 2018 को प्रकाशित हुआ था। यह लेख आज भी प्रासंगिक है। हस्तक्षेप के पाठकों के लिए पुनर्प्रकाशन …. पिछले दो हफ्तों …

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वादा फ़रामोशी : सरकारी वादों की मुकम्मल पड़ताल

Vada Faroshi Facts not fictions based on RTI शशि शेखर, संजॉय बसु और नीरज कुमार की किताब 'वादा फ़रामोशी पढ़िए'

राहुल गांधी (Rahul Gandhi), कॉमरेड कन्हैया कुमार (Comrade Kanhaiya Kumar), आरजेडी नेता तेजस्वी यादव (RJD leader Tejashwi Yadav), समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Samajwadi Party President Akhilesh Yadav), जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन और झारखंड कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार, इन तमाम नेताओँ में एक बात कॉमन है। ये नेता अपनी हर सभा में कहते हैं कि मोदी …

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मोदी का 10 एकड़ में छपा इंटरव्यू पर तस्वीर पुरानी, रवीश ने कहा इंटरव्यू जमा नहीं

Ravish Kumar

नई दिल्ली, 17 अप्रैल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister, Narendra Modi) के एक अंग्रेजी अखबार (English newspaper) में प्रकाशित दो पेज के साक्षात्कार पर एनडीटीवी के एंकर (NDTV anchor) रवीश कुमार (Ravish Kumar) ने चुटकी लेते हुए कहा है प्रधानमंत्री छवि प्रबंधन को लेकर काफ़ी सतर्क रहते हैं। पुरानी तस्वीरों के साथ नया इंटरव्यू जमा नहीं। रवीश कुमार ने अपने …

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हरिवंश बोले हमारा देश गंभीर आर्थिक परेशानियों में है आज के पत्रकार देश की आर्थिक स्थिति के बारे में सही बात लिखने से बचते हैं

Story of Comprehensive Editors Zubani of Harivansh महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में 'पुरोधा संपादकों की कहानी: हरिवंश की जुबानी' कार्यक्रम में व्याख्यान देते हरिवंश। उनके दाएं हैं राजेश लेहकपुरे, प्रो. कृपाशंकर चौबे, प्रो. गिरीश्वर मिश्र, प्रो. कृष्ण कुमार सिंह और प्रो. अरुण कुमार त्रिपाठी।

वर्धा। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा (Mahatma Gandhi International Hindi University, Wardha) में ‘पुरोधा संपादकों की कहानी: हरिवंश की जुबानी’ कार्यक्रम 27 से 29 मार्च 2019 तक आयोजित किया गया। हरिवंश ने हिंदी विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के पहले दिन 27 मार्च 2019 की शाम गणेश मंत्री के कृतित्व व व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। दूसरे …

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तो स्वार्थ सिद्धि कर रहा है मोदी विरोधी मीडिया भी

National news

17वीं लोकसभा के चुनाव प्रचार (17th Lok Sabha election campaign) ने जोर पकड़ लिया है। मोदी के पांच साल के शासन (Modi’s five year rule) में संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाएं खतरे में (Constitution and democratic institutions in danger) पड़ गए हैं। इतना ही नहीं सामाजिक ताना-बाना भी बिखर रहा है। आर एस एस और भाजपा (RSS and BJP) द्वारा बाकायदा …

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पत्रकार शिव इंदर सिंह ‘जगजीत सिंह आनंद पुरस्कार’ से सम्मानित

Journalist Shiv Inder Singh honored with 'Jagjit Singh Anand Award'

चंडीगढ़। पंजाबी के नामवर पत्रकार और पंजाबी की लोकप्रिय वेबसाइट (Popular web site of Punjabi) ‘सूही सवेर‘ (Suhi Saver) के मुख्य संपादक शिव इंदर सिंह (Shiv Inder Singh) को पत्रकारिता में प्रशंसनीय कार्य के लिए साल 2018 का जगजीत सिंह आनंद पुरस्कार (Jagjeet Singh Anand award) प्राप्त हुआ है। क्या है जगजीत सिंह आनंद पुरस्कार What is Jagjit Singh Anand …

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कामचोर नहीं हैं… बीएसएनएल के कर्मचारी

BSNL

जब कभी भी कर्मचारियों के, मेरा मतलब शासकीय, अर्द्ध शासकीय कार्यालयों और कारखानों के कर्मचारियों (Employees of government, semi government offices and factories) के कामचोरी की बात होती है तो मुझे थोड़ा आश्चर्य होता है। इन्हीं कर्मचारियों की बदौलत देश ने इतनी औद्योगिक और आर्थिक तरक्की (Industrial and economic promotion) की है। इन्हीं ने भारत के सार्वजनिक क्षेत्र को, औद्योगिक क्षेत्र को निर्माण और वित्तीय क्षेत्र …

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पुण्य प्रसून प्रकरण और प्रतिष्ठित पत्रकारिता के संकट पर एक सोच

Punya Prasun Bajpai

पुण्य प्रसून वाजपेयी (Punya Prasun Bajpai) ने जबसे मोदी सरकार की कमियों और घोटालों(Modi Government’s scandals and shortcomings) पर खुल कर बोलना शुरू किया है, तभी से एक पेशेवर पत्रकार (Professional journalist) के रूप में उनका जीवन अस्थिर बना हुआ है। पुण्य प्रसून की प्रतिष्ठा के कारण उन्हें नई-नई जगह पर नियुक्तियाँ मिलती गई, लेकिन वे कहीं भी स्थिर नहीं रह पा रहे हैं। यही …

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मीडिया…म्यांमार, मोदी सरकार और 56 इंच हवा…

Modi go back

मीडिया के मित्रों और भक्तों ने पिछले कुछ महीनों मे जिस तरह से 56 इंची जुमले को हकीकत मे बदलने का बीड़ा उठाया है, उससे मोदी सरकार को इस तरह की शर्मिंदगी होना लाज़िमी है । पिछले दो दिनों में मीडिया मे म्यांमार सीमा के पास सेना के कॅवर्ट (खुफिया) ऑपरेशन का जिस तरह से ‘ऑपरेशन’ किया जा रहा था …

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एक ख़ास तरह के अंधराष्ट्रवाद के शिकार थे राजेन्द्र माथुर

Rajendra Mathur राजेंद्र माथुर,

राजेन्द्र माथुर की पत्रकारिता (Rajendra Mathur’s journalism) पर वरिष्ठ पत्रकार श्री आनंद स्वरूप वर्मा जी (senior journalist Mr. Anand Swaroop Verma) का यह लेख 1987 में ‘हंस’ में छपा था. वर्मा जी का राजेंद्र माथुर के संदर्भ में राय है, “उनकी भाषा बहुत शानदार थी लेकिन एक ख़ास तरह के अंधराष्ट्रवाद से वह ग्रस्त थे यद्यपि माथुर साहब का राष्ट्रवाद …

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हम जैसे पत्रकारों के लिए यही उचित है कि चुनाव यदि युद्ध है तो वर्तमान सत्ता के विरुद्ध न लिखें

Lalit Surjan ललित सुरजन। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, स्तंभकार व साहित्यकार हैं। देशबन्धु के प्रधान संपादक

हम जैसे पत्रकारों के लिए यही उचित है कि चुनाव यदि युद्ध है तो वर्तमान सत्ता के विरुद्ध न लिखें ललित सुरजन आसन्न विधानसभा चुनावों के संदर्भ में अन्यत्र प्रकाशित इस टिप्पणी का जायजा लीजिए- ”इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के मुकाबले कांग्रेस पार्टी की साख दांव पर लगी है। राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस प्रतिपक्ष में है। …

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यूँ तो मुझे ….. खुद छूना था उसे … छू ..भी लेती …. पर क्या करूँ ….

kavita Arora डॉ. कविता अरोरा

डॉ. कविता अरोरा कल शाम छत पर … बारिशों के रूके पानी में शफ़क घोल रहीं थी अपने रंग … कि मैंने कलाई थाम लीं … फँसा दी साँझ की गुलाबी उँगलियों में उँगलियाँ अपनी और उँगलियाँ कस लीं … भिंची मुट्ठियाँ खुल गयीं साँझ की और मुट्ठियों के बेताब …लाल ..पीले.. गुलाबी ..सिन्दूरी रंग उतर आयें हथेलियों पर मेरी …

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प्रेस की आज़ादी : क्या योगी और वसुंधरा भी प्रधानमंत्री की नसीहत से सबक लेंगे !

Shesh Narain Singh शेष नारायण सिंह

पत्रकारिता के बुनियादी सवालों पर नए विचार की ज़रूरत Need a new idea on journalistic fundamental questions शेष नारायण सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चेन्नई में एक तमिल अखबार के कार्यक्रम में मीडिया को समाज को बदलने का साधन बताकर अभिव्यक्ति की आजादी को फिर चर्चा में ला दिया है। प्रधानमंत्री ने चेन्नई में कहा कि ‘आज समाचारपत्र सिर्फ खबर …

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यूपी वालों, चाहो तो देश बचा लो! दंगाबाजों को सत्ता से बाहर धकेलो…

Palash Biswas पलाश विश्वास पलाश विश्वास। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। हिंदी में पत्रकारिता करते हैं, अंग्रेजी के लोकप्रिय ब्लॉगर हैं। “अमेरिका से सावधान “उपन्यास के लेखक। अमर उजाला समेत कई अखबारों से होते हुए अब जनसत्ता कोलकाता में ठिकाना

नोटबंदी (Demonetization) के खिलाफ राजनीतिक मोर्चाबंदी (Political barricade) का चेहरा ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) का रहा है। नोटबंदी के खिलाफ शुरू से उनके जिहादी तेवर हैं। हम शुरू से चिटफंड परिदृश्य (Chitfund scenario) में दीदी मोदी युगलबंदी (Didi Modi Jugalbandi) के तहत 2011 से बंगाल में तेजी से वाम कांग्रेस के सफाये के साथ आम जनता के हिंदुत्वकरण के परिप्रेक्ष्य …

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डरा हुआ पत्रकार मरा हुआ नागरिक बनाता है

Ravish Kumar

पटियाला हाउस कोर्ट में मारपीट : मुख्य न्यायाधीश के नाम वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार का खुला खत पटियाला हाउस कोर्ट जैसी घटना से तय करना मुश्किल हो जाएगा कि जज कौन है। आदरणीय भारत के प्रधान न्यायाधीश, मुझे उम्मीद है कि पटियाला हाउस कोर्ट में पत्रकारों, वकीलों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की घटना से आपका नागरिक और न्यायाधीश …

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राजेंद्र माथुर ने हाशिमपुरा की खबर क्यों नहीं छापी ?

Rajendra Mathur राजेंद्र माथुर,

राजेंद्र माथुर पंजाब में आतंकवाद के दौरान हिंदुवादी नजरिये से काम कर रहे थे। समयांतर के संपादक पंकज बिष्ट के साथ 10-11 दिनों पहले 26 मार्च को विभूति नारायण राय से नोएडा में उनके घर पर हाशिमपुरा केस के सिलसिले में लंबी बातचीत हुई थी। हाशिमपुरा के मुसलमान युवकों को घरों से इतनी बड़ी संख्या में उठाकर हिरासत में लेने के बाद …

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देशद्रोह, अदालत और मीडिया : मीडिया के एक हिस्से की नकारात्मक भूमिका सामने आ चुकी है

Kanhaiya Kumar

दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि जो चैनल कन्हैया कुमार को देशद्रोही बता रहे थे (The channel was describing Kanhaiya Kumar as a traitor), उन्होंने वह भाषण नहीं दिखाया जिसमें उसने फिर कहा, हमें आजादी चाहिये भूख से, गरीबी से जातिवाद से और भारत को लूटने वालों से। अंबरीश कुमार जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार देशद्रोह के आरोप से जमानत (JNU …

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औरत ही औरत की दुश्मन नहीं होती क्योंकि औरत कट्टर नहीं होती

National News

Woman is not the enemy of woman because woman is not staunch आरिफा एविस ‘क्योंकि औरत कट्टर नहीं होती’ डॉ. शिखा कौशिक ‘नूतन’ द्वारा लिखा गया लघु कथा संग्रह (Short story collection) है जिसमें स्त्री और पुरुष की गैर बराबरी के विभिन्न पहलुओं को छोटी-छोटी कहानियों के माध्यम से सशक्त रूप में उजागर किया है। इस संग्रह में हमारे समाज …

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तटस्थ हो जाइये और किसी का फैन मत बनिये, क्योंकि फैन लोकतंत्र का नया गुंडा है

Ravish Kumar

ऑनलाइन गुंडाराज राजनीतिक संस्कृति की देन है आप मीडिया के आज़ाद स्पेस के लिए बोलेंगे या नहीं ? आप किसी पत्रकार के लिए आगे आएँगे या नहीं ? पत्रकारों को ख़ासकर कई महिला पत्रकारों को गालियाँ दी गईं। ये कौन सा समाज है जो गालियों के गुंडाराज को स्वीकार कर रहा है। दोस्तों, मैं 2013 से इस बारे में लिख …

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थानवी ने 26 साल तक जनसत्ता की संपादकी करते हुए भी रीढ़ बचाये रखी

om thanvi

Om Thanvi is the elder editor than Prabhash Joshi. ओम थानवी का कमाल यही है कि उनने छब्बीस साल तक जनसत्ता की संपादकीय (Editor of Jansatta) करते हुए भी रीढ़ बचाये रखी है कमसकम ओम थानवी पाखंडी नहीं थे और न बगुला भगत थे। जैसे दूसरे जीवित मृत मसीहा रहे हैं। दुनिया जानती है कि न हम अस्मिता की दीवार …

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ओम थानवी जी, मैं आज भी बेरोज़गार हूं

om thanvi

ओम थानवी रिटायर हो गए। हर आदमी एक न एक दिन रिटायर होता है। उसके बाद लोग उसे अपने-अपने तरीके से याद करते हैं। मैं कैसे याद करूं? मैं पहली बार 2003 में जनसत्‍ता में छपा राजेंद्र राजन के माध्‍यम से, उसके बाद लगातार छपता रहा। प्रसून लतांत, प्रमोद द्विवेदी, अरविंद शेष, सूर्यनाथजी, प्रभात रंजन, यहां तक कि मरहूम अशोक …

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पत्रकारों और कितना लात खाओगे? मालिकों के दलाल संपादकों से लेकर माफिया तक आपको लतियाने में लगे हैं.

opinion

शाहजहांपुर में पत्रकार को जिंदा जला दिया गया. अपराधी खुले घूम रहे हैं. सपा नेता रामगोपाल यादव आरोपी माफिया मंत्री के बचाव में ही उतर आए हैं. कह रहे हैं कि सिर्फ एफआईआर दर्ज होने से कोई अपराधी नहीं हो जाता. सरकार पूरे सुकून में है और बेशर्मी से बयानबाजी कर रही है. पत्रकार जगेंद्र सिंह को जलाने का श्रेय …

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रवीश कुमार जी मत भूलिए कि ऐसी भावुकता अंतत: अपराधी के पक्ष में जाती है

Ravish Kumar

रवीश कुमार जी बस वह एक गलती है और ये बाकी की हरकतें क्या हैं पुण्य कर्म! टेलीविजन चैनलों से अधिक भ्रामक कुछ नहीं है इस देश में। अगर सलमान खान सजायाफ्ता मुजरिम हैं तो वह कौन है जिससे हमदर्दी दिखाने के चक्कर में ये चैनल दुबले हुए जा रहे हैं। अगर सलमान खान का दिल दरिया है तो वह तंग …

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हम जैसे साधारण पत्रकार सत्ता की धौंस या किसी ‘आतंक’ से नहीं डरते

national press day राष्ट्रीय प्रेस दिवस

हम जैसे साधारण पत्रकार सत्ता की धौंस या किसी ‘आतंक’ से नहीं डरते। जब तक सांस है, सेक्युलर लोकतांत्रिक भारत और उसकी अवाम के पक्ष में लिखते-बोलते रहेंगे। आप में से जिन मित्रों ने मुझे किसी चैनल पर बहस में हिस्सेदारी करते देखा है, उनमें शायद ही कोई कहेगा कि मैं बहस के किसी अन्य हिस्सेदार को किसी तरह डिस्टर्ब …

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शिवसेना अध्यक्ष को कड़क आवाज में डाँट दिया शेष जी ने

Shesh Narain Singh शेष नारायण सिंह

क्या सांसदों को ऐसा करना चाहिये था ? क्या उन्हें इसकी सजा मिलेगी ? (Should MPs have to do this? Will they get the punishment?) यही सवाल था एबीपी न्यूज की एंकर नेहा पंत (ABP News anchor Neha Pant,) का, जिस पर भाजपा के सुधांशु मित्तल (BJP’s Sudhanshu Mittal) ने बेहद काबिले कबूल बयान दिया हालांकि उनका झुकाव पानी की …

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पत्रकारिता की स्वतन्त्रता पाना है तो जरूरी है स्वामित्व के ढाँचे पर पुनर्विचार

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पत्रकार के रूप में व्यक्ति का नजरिया महत्वपूर्ण हो जाता है पत्रकारिता की स्वतन्त्रता और पेशेवराना रवैये के आदर्शों को पाना है तो स्वामित्व के ढाँचे पर हमें पुनर्विचार करना होगा बुनियादी नीतिगत समस्या मीडिया की Basic policy problem of media किसी भी पेशे की जन उपयोगिता बनाये रखने के लिये उसकी आचार संहिता बनायी जाती है, लेकिन औपचारिक प्रशिक्षण …

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ज्योतिर्मय डे की याद में सोनभद्र में लगाये गये 10000 पौधे

Tulsi basil

सोनभद्र 4 जुलाई (विजय विनीत) मुंबई में 11 जून को प्रख्यात पत्रकार जे डे की हत्या (The killing of noted journalist J. Day) के विरोध में  उप्र के सोनभद्र में सैकड़ों लोगों ने जुलूस निकाल कर हत्यारों को फांसी देने की मांग की। इस अवसर पर जनपद के कई गावों में जे डे की याद में 10000 फलदार पौधे लगाये …

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फ्री मीडिया: इस आजादी के मायने क्या हैं?

Press Freedom

उस दिन हम लोग दिल्ली से निकलने वाली एक वैकल्पिक अंग्रेजी साप्ताहिक (alternative english weekly) के दफ्तर में बैठ थे। सम्पादक महोदय ने सरकार के खिलाफ एक तीखा और लम्बा लेख दिखाते हुए कहा, अब तो कुछ भी लिख दीजिए खुली आजादी है, पहले इससे हल्के लेख लिख मैं जेल चला जाता था। ये बात उन्होंने एक लम्बी सांस छोड़ते …

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समाचार जगत की महात्रासदी : बी बी सी रेडियो सेवा बंद होना

BBC

Major tragedy of news world: BBC radio service shut down बी बी सी अर्थात, ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन के प्रमुख पीटर हॉक्स (Peter Hawkes, head of the British Broadcasting Corporation) द्वारा की गई एक अप्रत्याशित घोषणा के अनुसार भारत में सर्वाधिक लोकप्रिय बीबीसी रेडियो सर्विस के हिंदी प्रसारण सहित मैसोडोनिया, सर्बिया, अल्बानिया, रूस, यूक्रेन तुर्की, मेड्रिन, स्पेनिश, वियतनामी तथा अजेरी भाषा …

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