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कब्रिस्तान या श्मशान में तब्दील निजी अस्पतालों के शिकंजे से बचने के लिए मेहनतकशों के अपने अस्पताल जरूरी!

 

पलाश विश्वास

इस मुक्त बाजार में असल कब्रिस्तान और श्मशानघाट कारपोरेट पूंजी के हवाले स्वास्थ्य बाजार है। सार्वजनिक स्वास्थ्य से राष्ट्र का पल्ला झाड़ लेनेके बाद हम इसी कारपोरेट स्वास्थ्य बाजार के हवाले हैं।

जनस्वास्थ्य के लिए सरकारें अब स्वास्थ्य हब बना रही है।

गली गली गांव गांव मोहल्ला मोहल्ला नई संस्कृति का मकड़ जाल बुनते हुए बार रेस्तरां खोलने की तर्ज पर हेल्थ हब और हेल्थ टुरिज्म के बहाने हेल्थ सेक्टर में सरकार अधिगृहित जमीन मुफ्त में देकर या लीज पर,  कर्ज पर देकर आम जनता को जिंदा जलाने या दफनाने के लिए इन्हीं कब्रिस्ताऩों और श्मसान घाटों के हवाले कर रही हैं जनता की चुनी हुई सरकारें। मौत का वर्चस्व कायम है जिंदगी पर।

मुक्त बाजार से पहले तक अधिकांश जनता का सस्ता इलाज सरकारी अस्पतालों में बड़े पैमाने पर होता रहा है। साठ के दशक तक देहात के लोग इन अस्पतालों से भी दूर रहते थे। उस दौर का ब्यौरा हमारे साठ के दशक के साहित्य में दर्ज है। मसलन ताराशंकर बंद्योपाध्याय का आरोग्य निकेतन।

अभी 21 फरवरी को अमेरिका के कैलिफोर्निया के पालो आल्टा में विश्वप्रसिद्ध अर्थशास्त्री कैनेथ ऐरो का निधन हो गया,  जिन्हें 1972 में नोबेल पुरस्कार मिला था।

इन्हीं अर्थशास्त्री ऐरो ने 1963 में चेतावनी दी थी कि सारा समाज इस पर सहमत है कि स्वसाथ्य सेवा को सिर्फ बाजार के हवाले करने पर विचार किया ही नहीं जा सकता।

22 फरवरी को कोलकाता के टाउन हाल में निजी और कारपोरेट अस्पतालों के कर्णधारों को बुलाकर बंगाल की पोपुलिस्ट मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन अस्पतालों के कामकाज की समीक्षा और जनसुनवाई कर दी। उन अस्पतालों को लेकर लगातार तेज हो रहे विस्फोटक जनरोष की रोकथाम के बतौर। जिसमें इन अत्याधुनिक कब्रिस्तानों और श्मशानघाटों की भयंकर तस्वीरें सामने आयी हैं,  जो आज के तमाम तमाम अखबारों में छपा है।

बहरहाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने साफ शब्दों में यह एलान कर दिया है कि इलाज के नाम पर प्राइवेट अस्पतालों व नर्सिंग होम की लूट-खसोट नहीं चलेगी।

जाहिर है कि मुख्यमंत्री लूटखसोट का यह तंत्र जारी रखते हुए उसमें जनता को बतौर उपभोक्ता खुश करने के लिए उसमें सेवा को शोषणविहीन बनाने पर जोर दिया है। वे वैकल्पिक जन स्वास्थ्य आंदोलन खड़ा करके पूंजी और बाजार के खिलाफ खड़ा होने के मूड में नहीं है जो सत्ता राजनीति और समीकरण के हिसाब से सही भी है।

बुधवार को कोलकाता के ऐतिहासिक टाउनहॉल में महानगर और आसपास के इलाकों के प्राइवेट अस्पतालों व नर्सिंग होम के प्रतिनिधियों को बैठक में पेशी करके मुख्यमंत्री ने साफ साफ कहा कि उनके पास इस बात के सबूत हैं कि प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों के इलाज में लापरवाही व मनमानी की जाती है। मरीजों से अधिक बिल वसूला जाता है। यहां तक कि पैसे नहीं दिये जाने पर अस्पताल प्रबंधन परिजनों को शव तक ले जाने नहीं देता है।

मुख्यमंत्री ने सभी अस्पतालों और नर्सिंग होम का कच्चा चिठ्ठा सिलसिलेवार उन अस्पतालों के प्रतिनिधियों के सामने खोलकर कड़ी चेतावनी भी जारी की।

यह आम जनता की शिकायत की भाषा नहीं है। ममता बनर्जी बाहैसियत मुख्यमंत्री अपने संवैधानिक पद से ये शिकायत कर रही हैं तो सच का चेहरा कितना भयंकर होगा,  इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

दीदी ने तो फिरभी यह पहल की है,  बाकी देश में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के गोरखधंधे के खिलाफ सरकारें,  प्रशासन,  कानून का राज और राजनीति अखबारी चीखती सुर्खियों में रोजाना दर्ज होते नंगे सच के मुकाबले सिरे से खामोश हैं। यही नहीं,   इन सभी तत्वों की हेल्थ बिजनेस में बेशर्म हिस्सेदारी है।

बंगाल में अभी निजी अस्पतालों से नवजात शिशुओं की तस्करी का सिलसलेवार पर्दाफाश हो रहा है। अभी ताजा खुलासा से उत्तर बंगाल की एक बड़ी भाजपाई महिला नेता कटघरे में हैं तो बाकी राजनीति भी दूध से धुली नहीं है।

बहरहाल मुख्यमंत्री ने कहा कि वह काफी दिनों से प्राइवेट अस्पतालों के साथ इन मुद्दों पर बैठक करना चाहती थीं। जाहि्र है कि सीएमआरआइ में इलाज में लापरवाही से मरीज की मौत के बाद भारी हिंसा के बाद की घटना के बाद यह बैठक जरूरी हो गयी थी।

हाल के जनरोष और हिंसा की घटनाओं के सिलसिले में दीदी ने कहा कि किसी की मौत पर परिजनों का दुखी होना स्वाभाविक है,   पर कानून हाथ में लिये जाने का समर्थन नहीं किया जा सकता है।

दीदी ने बाकायदा आंकडे पेश करते हुए कहा कि राज्य में 2,  088 नर्सिंग होम हैं। केवल महानगर में नर्सिंग होम की संख्या 370 है। मां माटी मानुष की सरकार ने 942 नर्सिंग होम में सर्वे करवाया था,   जिसमें से 70 को कारण बताओं नोटिस जारी किया गया। वहीं,   33 का लाइसेंस रद्द कर दिया गया। नर्सिंग होम वालों की लूट-खसोट से परेशान होकर पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर ने भी एक सर्वे करवाया था,   जिसमें भी प्राइवेट अस्पतालों की काफी गलतियां सामने आयीं।

बैठक के ब्यौरे के मुताबिक मुख्यमंत्री ने कहा कि हद तो यह है कि स्वास्थ्य स्कीम के द्वारा जारी किये गये बीमा पर भी ये लोग मरीजों से पैसे वसूलते हैं। स्वच्छता व को-ऑर्डिनेशन का सख्त अभाव है। बिल बढ़ा कर लिया जाता है। यहां तक कि इलाज के बगैर भी बिल वसूलने की घटना नजर आती है। मरीजों पर महंगा टेस्ट करवाने के लिए दबाव डाला जाता है। बगैर जरूरत मरीज को वेंटिलेशन व ऑपरेशन थियेटर में डाल दिया जाता है। इससे बड़ा अनैतिक काम और नहीं हो सकता है। मरीजों को उनके मामले का विवरण नहीं दिया जाता है.। तय पैकेज पर एक्सट्रा पैकेज लेने का मामला भी सामने आया है।

मुख्यमंत्री ने टाउन हॉल में मौजूद सभी बड़े नामी अस्पतालों के प्रतिनिधियों की एक एक करके क्लास लगायी।

दीदी के जबाव तलब के जबाव भी बेहद दिलचस्प हैं।

मसलन दीदी ने अपोलो अस्पताल के प्रतिनिधि को संबोधित करते हुए कहा कि सबसे अधिक शिकायत आप लोगों के खिलाफ हैं। यहां गैरजरूरी टेस्ट आम है। मरीजों व उनके परिजनों को तरह-तरह से परेशान किया जाता है। उन पर महंगा टेस्ट करवाने के लिए दबाव बनाया जाता है। 35-40 लाख रुपये का बिल बना दिया जाता है। इतना बिल तो फाइव स्टार होटल में रहने पर भी नहीं बनता है। आखिर आम लोग लाखों रुपये बिल का भुगतान कैसे करेंगे?

अपोलो अस्पताल के प्रतिनिधि ने मुख्यमंत्री के इस विस्फोटक बयान पर जबाव में सफाई दी कि वे लोग साफ-सुथरा बिल बनाते हैं। चूंकि काफी महंगे यंत्र लगाये हैं और कुछ विशेष प्रोटोकॉल है,   तो इसलिए खर्च कुछ ज्यादा होता है।

ब्यौरे के मुताबिक मुख्यमंत्री बेलव्यू अस्पताल के प्रतिनिधि को लताड़ लगाते हुए कहा कि आपके यहां स्वास्थ्य परिसेवा का स्तर पहले के मुकाबले निम्न हो गया है। सीध दीदी ने कहां कि ऊपर से जिस प्रकार आप लोग मोटा बिल बना रहे हैं,   उससे मैं संतुष्ट नहीं हूं। इस पर बेलव्यू के प्रतिनिधि ने कहा कि हमारे यहां की नर्सें अक्सर दूसरे अस्पतालें में चली जाती हैं,   जिससे हमारी स्वास्थ्य सेवा प्रभावित हुई हैं।

सीएमआरआइ अस्पताल की क्लास लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आपके यहां मरीजों से काफी ज्यादा बिल लिया जाता है। जिससे वहां जानेवाले रोगियों व उनके परिजनों को काफी परेशानी होती है। पिछले दिन सीएमआरआइ में जो घटना हुई,   वह ठीक नहीं थी,   पुलिस ने एक्शन लिया है,   पर आप लोग भी सेवा पर अधिक ध्यान दो। गौरतलब है कि इसी हिंसा के मद्देनजर यह पेशी हुई है।

रूबी अस्पताल को लताड़ लगाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आपके यहां काफी चार्ज लिया जाता है,   उसे ठीक करें। साथ ही आप के यहां मरीजों को उनके इलाज से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया जाता है,   जो ठीक नहीं है।

मुख्यमंत्री ने सबसे कड़ा प्रहार मेडिका अस्पताल पर किया,   इस अस्पताल का प्रतिनिधि जब अपनी बात कहने के लिए खड़ा हुआ,   तो मुख्यमंत्री ने उन्हें कहा कि आपके यहां किडनी रैकेट किस तरह चल रहा है?

मुख्यमंत्री के इस बात हतप्रभ मेडिका के प्रतिनिधि ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है। हमारा किडनी रैकेट से कोई लेना-देना नहीं है। मुख्यमंत्री ने उनकी बात को काटते हुए कहा कि किडनी रैकेट में आप लोगों का नाम है। दिल्ली से केंद्र सरकार की हमें रिपोर्ट मिली है। सीआइडी ने भी मामले की जांच की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा केवल यही कहना है कि हम लोग अपने राज्य में किसी भी हाल में किडनी व शिशु तस्करी रैकेट चलने नहीं देंगे।

गौरतलब है कि शिशु तस्करी का जाल कोलकाता से दिल्ली तक फैला हुआ है और प्रभावशाली तबके के साथ इसका नाभिनाल का संबंध है।

भागीरथी नेवटिया वूमेन एंड चाइल्ड केयर सेंटर के प्रतिनिधियों को मुख्यमंत्री ने कहा कि आप के यहां से मरीजों के साथ लापरवाही की काफी रिपोर्ट हमारे पास आयी है। आपके यहां इलाज काफी महंगा है.।

मुख्यमंत्री ने मौजूद सभी प्राइवेट अस्पतालों के प्रबंधन से कहा कि मलेरिया व डेंगू का प्रकोप आरंभ होने वाला है। यह नवंबर तक चलेगा। काफी मामले सामने आये हैं कि नर्सिंग होम वाले डेंगू का डर दिखा कर लाखों रुपया मरीजों से लूट लेते हैं। इलाज करें,   पर लोगों को भयभीत न करें।

फिर उन्होंने हेल्थ हब और हलेथ टुरिज्म के मुक्तबाजारी बिजनेस के थीमसांग की तर्ज पर कहा कि हमारे यहां बांग्लादेश,   नेपाल,   बिहार,   उत्तर पूर्व से काफी लोग इलाज के लिए आते हैं। नर्सिंग होम वालों को यह ध्यान में रखना होगा कि यह ईंट व लकड़ी का व्यवसाय नहीं,   बल्कि जिंदगी बचाने का काम है। सेवा को कभी बेचा नहीं जाता। मरीजों को मानवीय दृष्टि से देखना चाहिए। 20 प्रतिशत की जगह अगर 100 प्रतिशत कमाई करेंगे,   तो यह सेवा नहीं,   संपूर्ण व्यवसाय बन जायेगा।

यह अस्पतालों की तस्वीरें ही नहीं हैं,  ये कुल मिलाकर मुक्त बाजार में हमारे समाज,   राजनीति,   अर्थव्यवस्था,   संस्कृति,   मीडिया,   लोक,   जनपद,   मीडिया,   उत्पादन प्रणाली,   हाट बाजार,   खेत खलिहान,   कल कारखानों,   दफ्तरों की आम तस्वीरे हैं जिन्हें सुनहले दिनों की तस्वीरें और अत्याधुनिक विकास की आयातित स्मार्ट बुलेट मिसाइल राकेट झांकियां मानकर कारपोरेट हिंदुत्व एजंडे के रामराज्य में मनुस्मृति बहाल करने मनुस्मृति शासन के फासिज्म के राजकाज के तहत हम नरसंहारी अश्वमेधी पैदलसेनाओं में शामिल हैं। जाहिर है कि कंबधों के वोट से कोई जनादेश नहीं है।

हिंदू राष्ट्र के मुक्तबाजार के खिलाफ पहले शहीद कामरेड शंकर गुहा नियोगी ने अपने संघर्ष और निर्माण राजनीति के तहत छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चे के कार्यक्रम में जन स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी थी और बिना पूंजी या बाहरी मदद के अपने संसाधनों से मेहनकशों के अपने अत्याधुनिक शहीद अस्पताल में बाजार के व्याकरण और दबाव तोड़कर आम जनता को नाम मात्र खर्च पर सही इलाज का माडल तैयार किया था।

नियोगी की शहादत के बाद छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा का बिखराव हो जाने से छत्तीसगढ़ में यह स्वास्थ्य आंदोलन आगे शहीद अस्पताल के बने रहने के बावजूद नहीं चला लेकिन नियोगी के साथी डा. पुण्यव्रत गुण की अगुवाई में बंगाल के स्वास्थ्यकर्मी और डाक्टर बंगालभर में उत्तर और दक्षिण बंगाल में मेहनतकश तबके की अगुवाई में बिना सरकारी या बाहरी मदद यह आंदोलन जारी रखे हुए हैं।

दल्ली राजहरा के शहीद अइस्पताल के माडल के मुताबिक कोलकाता,  दक्षिण बंगाल और सुंदरवन इलाके में करीब दर्जनभर श्रमजीवी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र चल रहे हैं। जरुरत है कि बाकी देश में स्वास्यकर्मी,  मेहनतकश तबका,  डाक्टर और जनपक्षधर ताकतें मुक्तबाजार के खिलाफ यह जनपक्षधर जनस्वास्थ्य आंदोलन चलायें ताकि आम जनता को इस मुक्तबाजारी श्मशानघाटों या कब्रिस्तानों में जिंदा जलाने या जिंदा दफनाने की रस्म अदायगी का नर्क जीने से हम बचा सकें।

डा.पुण्यव्रत गुण ने शहीद अस्पताल के बारे में जो लिखा है,  वह बेहद गौरतलब हैः

 

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