Home » मोदी से मिलकर ज्ञापन देने पहुंचे, पहुंचा दिए गए जेल

मोदी से मिलकर ज्ञापन देने पहुंचे, पहुंचा दिए गए जेल

मोदी से मिलकर ज्ञापन देने पहुंचे, पहुंचा दिए गए जेल

तीन दशक से महिला मुद्दों पर सक्रिय नेत्री दुर्गा झा की रिहाई क्यों नहीं हो रही?

निरभाया दामिनी

लगभग तीन दशक से मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं देश भर मे महिला आंदोलन को नेतृत्व देने वाली साथी तथा वर्तमान मे आम आदमी पार्टी के छत्तीसगढ़ महिला अध्यक्ष दुर्गा झा को पार्टी के अन्य नेताओं के साथ रायपुर सेंट्रल जेल मे विगत 14 जून से अपराधियों के समान रखा गया है।

ज्ञात हो कि पार्टी के नेतृत्वकर्ता विगत 14 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर ज्ञापन देने के लिए एयरपोर्ट पहुंचे थे, जहां उन्हे ना ही मोदी से मिलने के लिए दिया गया बल्कि सभी आप के महिला नेत्री सहित सभी नेताओ को जेल मे डाला गया। कारण यह था कि दुर्गा सहित सारे नेताओ ने मोदी से मिलने ना दिये जाने के संदर्भ मे नारा लगाकर विरोध प्रकट किया, जो कि किसी भी जनतंत्र मे नागरिकों का स्वाभाविक मौलिक अधिकार है।

दरअसल शुरू से ही पुलिस एफआईआर की प्रति किसी को भी नहीं दिखा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 15 जून को सभी नेताओं के ऊपर आरंभ मे 151, 107, 116 जैसी धाराएं लगाई गयीं। बाद में 15 जून को रायपुर एयरपोर्ट अधिकारियों के माध्यम से एक और एफ०आई०आर० की गयी जिसमें 5 अन्य गैर-जमानती सहित धाराएं जैसे 147, 186, 332, 353, 419 को जोड़ा गया।

विशेष सूत्रों के अनुसार आप के द्वारा किए गए इस विरोध प्रदर्शन मोदी के कानों मे तुरंत पहुंची, जिससे प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री रमन सिंह को सवाल किया। जो कि बात भाजपा के आलाकमान तक पहुँच गयी है, जिससे रमन सिंह के कंधों के सितारे उतारने का डर मंडरा रहा है। सूत्रों के अनुसार यही कारण है कि डॉ सिंह इस मामले को स्वयं सीधा मॉनीटरिंग कर रहे हैं।

संभावतः आम आदमी पार्टी के छत्तीसगढ़ नेतृत्व में सामाजिक एवं राजनैतिक आंदोलन के परिप्रेक्ष्य में दुर्गा झा सबसे वरिष्ठ होंगी। 2014 मे आप से जुड़ने के बाद, पार्टी को दुर्गा का नेतृत्व सभी अभियान एवं आंदोलनों मे मिला है। यहां तक़ कि जब प्रदेश संयोजक संकेत ठाकुर पार्टी छोड़कर एक साल जब चले गए थे, दुर्गा ने अन्य नेताओं के साथ पार्टी को प्रदेश में संभाला था।

पार्टी सूत्रों के अनुसार संकेत ठाकुर को मनाकर पार्टी मे वापस लाने में दुर्गा की सबसे अहम भूमिका रही। वैसे पार्टी के प्रदेश नेतृत्व तो, केन्द्रीय नेतृत्व के ठीक विपरीत महिला नेत्रियों के प्रति काफी असंवेदनशील है। महिलाओं की त्याग के इतिहास या कद का कोई इज्ज़त या मायने पार्टी के पुरुषप्रदान नेतृत्व देना नहीं चाहती। ऐसे मे दुर्गा या फिर सोनी सोरी जैसे नेत्रियों का यह हश्र होना स्वाभाविक ही है।

51 साल की दुर्गा झा पिछले तीन दशक से महिला अधिकार, दलित-बहुजन अधिकार, मजदूरों के सवाल, शिक्षा के अधिकार, असंगठित कामकाजी महिला, प्रवासी मजदूर, पंचायती राज को पूर्णता अमल करने, पानी के सवाल इत्यादि के संदर्भ के संघर्षरत हैं।

वह 1987 से छात्र आंदोलन से जुड़ने के बाद, 1990 से पूर्ण रूप से सामाजिक कार्यों मे जुड़ी हुई हैं। दुर्गा जयप्रकाश नारायण और डॉ बाबासाहेब अंबेडकर के विचारों से काफी प्रभावित हैं। इन्होंने चीन के बीजिंग मे 1995 मे आयोजित ‘चौथे विश्व महिला सम्मेलन’ मे भाग लिया, जहां ‘पंचायती राज एवं महिलाएं’ विषय पर प्रस्तुतीकरण भी किया। 1990 मे ‘मध्यप्रदेश महिला मंच’ के गठन में सक्रिय भूमिका के अलावा छत्तीसगढ़ महिला अधिकार मंच का गठन भी किया। वे प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय स्तर पर कई सारे संगठनों और संस्थाओं की स्थापक नेत्री रही हैं। नवो, विमेन्स पावर कनैक्ट, वन बिल्यन रईसिंग, इत्यादि इनमे से कुछेक है। 2008 से दुर्गा भारत मे चुनाव सुधार अभियान के सक्रिय सदस्य रही हैं।

लेकिन ना ही सरकार या पार्टी ने इनके इन तमाम योगदानों को कोई वजूद दिए हैं। सरकार तो ऐसे वरिष्ठ महिलाओं को गलत साबित करने मे फर्जी मुकदमे दायर करने मे जुटी हुई है। वैसे अन्य लोग भी इसमें कोई कसर नहीं छोड़े हैं। यहाँ तक जेल मे होने के बावजूद ना कोई मानव अधिकार संगठन या कार्यकर्ता या कोई महिला संगठन के लोग इनसे मिलने कि कोशिश किए या फिर किसी प्रकार की कार्यवाही के लिए सामने आए। ना किसी पत्रकार इस संदर्भ मे कोई लेख या खबर छापी। ऐसे मे सवाल यह उठता है कि सामाजिक और राजनैतिक आंदोलनों में महिलाओं का क्या स्थान है। यदि दुर्गा जैसे साथी अन्य किसी देश मे पैदा हुए होते तो उन्हे राष्ट्र के बड़े पुरस्कारों से नवाजा होता और उनके सुझाव और अनुभव से प्रदेश और देश समस्याओं का निदान पाने में मदद लेते।

तीसरी नज़र फीचर्स

 

About हस्तक्षेप

Check Also

भारत में 25 साल में दोगुने हो गए पक्षाघात और दिल की बीमारियों के मरीज

25 वर्षों में 50 फीसदी बढ़ गईं पक्षाघात और दिल की बीमांरियां. कुल मौतों में से 17.8 प्रतिशत हृदय रोग और 7.1 प्रतिशत पक्षाघात के कारण. Cardiovascular diseases, paralysis, heart beams, heart disease,

Bharatendu Harishchandra

अपने समय से बहुत ही आगे थे भारतेंदु, साहित्य में भी और राजनीतिक विचार में भी

विशेष आलेख गुलामी की पीड़ा : भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रासंगिकता मनोज कुमार झा/वीणा भाटिया “आवहु …

राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा: चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश

राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा : चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश Occupy national institutions : …

News Analysis and Expert opinion on issues related to India and abroad

अच्छे नहीं, अंधेरे दिनों की आहट

मोदी सरकार के सत्ता में आते ही संघ परिवार बड़ी मुस्तैदी से अपने उन एजेंडों के साथ सामने आ रहा है, जो काफी विवादित रहे हैं, इनका सम्बन्ध इतिहास, संस्कृति, नृतत्वशास्त्र, धर्मनिरपेक्षता तथा अकादमिक जगत में खास विचारधारा से लैस लोगों की तैनाती से है।

National News

ऐसे हुई पहाड़ की एक नदी की मौत

शिप्रा नदी : पहाड़ के परम्परागत जलस्रोत ख़त्म हो रहे हैं और जंगल की कटाई के साथ अंधाधुंध निर्माण इसकी बड़ी वजह है। इस वजह से छोटी नदियों पर खतरा मंडरा रहा है।

Ganga

गंगा-एक कारपोरेट एजेंडा

जल वस्तु है, तो फिर गंगा मां कैसे हो सकती है ? गंगा रही होगी कभी स्वर्ग में ले जाने वाली धारा, साझी संस्कृति, अस्मिता और समृद्धि की प्रतीक, भारतीय पानी-पर्यावरण की नियंता, मां, वगैरह, वगैरह। ये शब्द अब पुराने पड़ चुके। गंगा, अब सिर्फ बिजली पैदा करने और पानी सेवा उद्योग का कच्चा माल है। मैला ढोने वाली मालगाड़ी है। कॉमन कमोडिटी मात्र !!

Entertainment news

Veda BF (वेडा बीएफ) पूर्ण वीडियो | Prem Kahani – Full Video

प्रेम कहानी - पूर्ण वीडियो | वेदा BF | अल्ताफ शेख, सोनम कांबले, तनवीर पटेल और दत्ता धर्मे. Prem Kahani - Full Video | Veda BF | Altaf Shaikh, Sonam Kamble, Tanveer Patel & Datta Dharme

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *