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गाँधी के नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय में आज दहशतगर्दों का राज

गाँधी के नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय में आज दहशतगर्दों का राज

हम कैसे विश्वविद्यालय बना रहे हैं, जहाँ एक शिक्षक को जींस पहनने पर ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया जाता है

विशद कुमार

नई दिल्ली, 01 अक्तूबर। गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय शिक्षक संघ द्वारा आज 1 अक्टूबर 2018 को गाँधी जयंती की पूर्व संध्या पर गाँधी के नाम पर स्थापित अपने विश्वविद्यालय में हो रही गाँधीवादी मूल्यों की भ्रूणहत्या और भ्रष्ट एवं हिंसक कुलपति के काले कारनामों के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में एक प्रेसवार्ता आयोजित की गई।

इस प्रेसवार्ता के दौरान विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों और दिल्ली में स्थित विभिन्न विश्वविद्यालय के शिक्षकसंघों के प्रतिनिधियों ने शिरकत की और महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति की अवैध नियुक्ति और उनके दलित एवं स्त्री-विरोधी रवैये एवं शिक्षाविरोधी तानाशाही मानसिकता की कठोर शब्दों में आलोचना की गई ।

प्रेसवार्ता की शुरूआत श्री शरद यादव (पूर्व सांसद) के लिखित वक्तव्य के वाचन से हुई, जिसमें उन्होंने मोतिहारी के केंद्रीय विश्वविद्यालय के शिक्षकों के संघर्ष में सहयोग का वादा किया।

नीलोत्पल बसु (पूर्व सांसद) ने कहा कि गाँधी के नाम पर स्थापित इस विश्वविद्यालय में आज दहशतगर्दों का राज है। यह सिर्फ इस एक विश्वविद्यालय का मसला नहीं है, जेएनयू से लेकर केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय, गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय से लेकर मणिपुर केंद्रीय विश्वविद्यालय तक शैक्षणिक परिसरों का सैन्यीकरण किया जा रहा है। उन्होंने शिक्षा के व्यापारीकरण पर भी अपनी चिंता जाहिर की। फर्जी डिग्रीधारकों के वर्तमान दौर में महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय से उठने वाली प्रतिरोध की आवाज की सराहना करते हुए नागरिक समाज का आह्वान किया कि शिक्षा को बर्बाद करने वाले इन कुलपतियों और इनकी नियुक्ति करने वाली सत्ता के खिलाफ आज एकजुट होकर खड़े होने का समय आ गया है।

कविता कृष्णन (पोलित ब्यूरो सदस्य, सीपीआईएमएल) ने वर्तमान दौर को फासीवाद का दौर बताते हुए कहा कि हम कैसे विश्वविद्यालय बना रहे हैं, जहाँ एक शिक्षक को जींस पहनने पर ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया जाता है। छात्राओं का यौन उत्पीड़न करने वाले लोगों का कुलपतियों द्वारा बचाव किया जाता है। उन्होंने महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के साथ-साथ हिदायतुल्लाह विश्वविद्यालय व मणिपुर केंद्रीय विश्वविद्यालय में जारी मानवाधिकारों के खुले उल्लंघन पर चिंता जाहिर की।

गाँधी की कर्मभूमि में ही गाँधीवादी मूल्यों की हत्या

बिनोय विश्वम (सांसद) ने सत्ताधारी दल द्वारा इतिहास को एक खास रंग में रंगने पर अपना प्रतिरोध दर्ज कराचे हुए कहा कि शिक्षाविरोधी प्रोफेसर अरविंद अग्रवाल आज का गोडसे है, जो गाँधी की कर्मभूमि में ही गाँधीवादी मूल्यों की हत्या कर रहा है।

अली अनवर (पूर्व सांसद) ने शिक्षकों को कौआ कहने वाले और उन्हें कौए की तरह टाँगने की धमकी देने वाले कुलपति को आगाह किया कि कौओं की काँव-काँव सरकार और जनता को जगाकर रहेगी। उन्होंने बताया कि प्रोफेसर अरविंद अग्रवाल अपने एक शिक्षक को फर्जी बलात्कार के मामले में फंसाने की धमकी देकर उसका त्यागपत्र भी ले चुका है। 

शकील अहमद (पूर्व अध्यक्ष, जेएनयू छाक्षसंघ) ने बिहार के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री दोनों की संवेदनहीनता और केंद्रीय मंत्री राधा मोहन सिंह के आतंक का उल्लेख करते हुए बताया कि महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय और बिहार में आज अपराधियों का खुला राज है।

राकेश सिन्हा (विशेष सलाहाकार, दिल्ली सरकार) ने पुलिस छावनी में बदल दिए गए विश्वविद्यालय के शिक्षाविरोधी कुलपति द्वारा किए जा रहे शिक्षा के व्यवसायीकरण का जिक्र किया। उन्होंने केंद्रीय विश्वविद्यालय के शिक्षकों द्वारा शुरु किए गए प्रतिरोध को देशभर के लिए उम्मीद की एक किरण बताया।

प्रो. नवलकिशोर (राष्ट्रीय प्रवक्ता, राजद) ने बिहार की बदतर कानून-व्यवस्था के संदर्भ में मोतिहारी के केंद्रीय विश्वविद्यालय की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला।

प्रो. सोना मिंच (जनूटा) ने शिक्षण और अध्ययन के स्पेस पर हावी होते स्टेट के अंकुश पर अपनी चिंता जाहिर की और कहा कि आज राज्य असमानता का संस्थानीकरण कर रहा है।

डॉ. नज़मा रहमानी (डूटा) ने सार्वजनिक शिक्षण संस्थानों का बर्बाद किए जाने के खिलाफ उठ रही शिक्षकों की आवाज को शिक्षकों का लोकतांत्रिक अधिकार बताया।

डॉ. सुधाशुंकुमार (डूटा) ने बौद्धिकों को देशद्रोही सिद्ध करने की साजिशों के खिलाफ मीडिया का आह्वान करते हुए कहा कि वे इन साजिशों के पीछे कार्यरत शक्तियों को बेनकाब करे।

इस प्रेसवार्ता के दौरान कुलपति के द्वारा शिक्षकों व छात्रों पर करवाए जा रहे जानलेवा हमलों के शिकार डॉ. संजयकुमार भी मीडियाकर्मियों से रूबरू हुए। उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें कुलपति व उनके गुर्गों के इशारे पर जान से मारने व जिंदा जलाने की कोशिश की गई। महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ ने राष्ट्रीय मीडिया से अपील की कि वह कुलपति प्रो. अरविंद अग्रवाल के द्वारा की जा रही विश्वविद्यालय की भ्रूणहत्या को राष्ट्र के सामने लाकर गाँधी जयंती के दिन गाँधी जी को सच्ची श्रद्धांजलि प्रदान करे।

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