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कार्पोरेट राजनीति में कुत्ता-खचेड़

प्रेम सिंह

      हरियाणा के एक मंत्री ने फिर एक बार संघी संस्कार प्रकट किया है. कहा है, सौ कुत्ते (विपक्षी नेता) मिल कर एक शेर (नरेंद्र मोदी) को गुजरात में नहीं हरा सकते.

पिछले लोकसभा चुनाव का 'पिल्ला प्रकरण' सबको याद ही होगा. पिल्ला कुत्ते के बच्चे को कहते हैं.

कार्पोरेट राजनीति एक कुनबा है. इस कुनबे में सबसे नई, और इस नाते सबसे ज्यादा प्रामाणिक पार्टी आम आदमी पार्टी है. यह सीधे कार्पोरेट की कोख से निकली है. थोड़े समय में इस पार्टी ने कार्पोरेट राजनीति के कुनबे में अच्छी रसाई बना ली है. दिल्ली में उसकी सरकार है. पिछले दिनों इस पार्टी के एक नेता ने पार्टी सुप्रीमो पर कुछ आरोप लगा दिए. मामला जल्दी ही सुलटा लिया गया. आरोप लगाने वाला नेता कुनबे के अंतर्गत किसी अन्य गुट में नहीं गया.

कार्पोरेट राजनीति के कुनबे में विद्यमान गुटों (जो हर कुनबे में होते हैं) में आरोप-प्रत्यारोप लगाना चलता है, लेकिन गुट के अन्दर बड़ों पर आरोप लगाना मर्यादा भंग करना माना जाता है.

हिंदी के लेखक मर्यादा के प्रति ज्यादा सेंसिटिव होते हैं. हिंदी की एक लेखिका ने इस मर्यादा-भंग पर क्षुब्ध होकर कहा, एक शेर (अरविंद केजरीवाल) को चारों तरफ से गीदड़ों (आरोप लगाने वाले नेता और खबर छापने वाले पत्रकारों) ने घेर लिया है. कुनबे का भाषा-परिवार घुमा-फिर कर एक ही होता है – नेता से लेकर लेखक तक!     

परंपरा से शेर और गीदड़ अथवा शेर और बकरी का जोड़ चला आया है. लेकिन भाषा बहता नीर है; शेर के प्रति भक्तिभाव अगर ज्यादा प्रगाढ़ हो तो गीदड़ को कुत्ता बना लिया जाता है. वरना जहाँ शेर रहते हैं, कुत्ते वहां नहीं रहते. दरअसल वे रह ही नहीं सकते. इसकी ताईद साम्राज्यवादी राजनीति के एक बड़े पुरोधा विंस्टन चर्चिल ने भी की है. फिलिस्तीनियों के अपनी मातृभूमि पर प्राकृतिक अधिकार को अस्वीकार करते हुए उन्होंने कहा, मांद में कुत्ता कितने ही लम्बे समय से सोया पड़ा हो, उसका अधिकारी नहीं हो जाता. नीची नस्ल के अमेरिका के रेड इंडीयानों और ऑस्ट्रेलियाई मूल निवासियों को ऊंची श्वेत नस्ल (शेर) द्वारा मार अथवा खदेड़ दिए जाने को वे किसी तरह का अन्याय नहीं मानते.  

संघियों को तो बुरा नहीं लगा, लेकिन भारत पर चर्चिल की नस्ल का करीब दो सौ साल आधिपत्य रहा, यह सच्चाई है. ज़ाहिर है, उनकी नज़र में भारतीय भी फिलिस्तीनियों, रेड इंडीयनों, ऑस्ट्रेलियाई मूल निवासियों की तरह (कुत्ते) ही थे!

      कार्पोरेट राजनीति का कुत्ता-खचेड़ से पुराना रिश्ता है.  

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