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अमेरिका में भी सिर उठा रहे हैं दक्षिणपंथी आतंकवादी, पकड़ा गया छप्पन वर्षीय ( छप्पन इंच वाला नहीं) आतंकी सीजर

अमेरिका में भी सिर उठा रहे हैं दक्षिणपंथी आतंकवादी, पकड़ा गया छप्पन वर्षीय ( छप्पन इंच वाला नहीं) आतंकी सीजर

अरुण माहेश्वरी

भारत में सनातन संस्था नामक संगठन एक आतंकवादी संगठन है और शासक संघ परिवार के वृहत्तर समूह का ही अंग है। आरएसएस की तरह ही हिंदू राष्ट्र बनाना इसका उद्देश्य है और यह गुप्त हत्याओं से लेकर बम विस्फोटों और दंगों तक की षड़यंत्रकारी अपराधपूर्ण गतिविधियों में लगा रहता है। पुलिस के द्वारा इसके सारे प्रमाण उपलब्ध करा देने पर भी मोदी-फडनवीस सरकार इन पर जरूरी कार्रवाइयों से हिचक रही है।

इसी प्रकार, अब अमेरिका की रिपब्लिकन पार्टी के भी आतंकवादी समूहों ने सिर उठाना शुरू कर दिया है। चार दिन पहले ही वहां के ट्रंप-विरोधी डैमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं तथा और भी कई गण-मान्य लोगों को डाक के जरिये भेजे गये बमों को वहां के खुफिया विभाग एफबीआई ने पकड़ा है। जिन्हें ये बम भेजे गये उनमें पूर्व राष्ट्रपति ओबामा, बिल क्लिंटन और पिछले चुनाव में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हिलैरी क्लिंटन भी शामिल हैं।

सीएनएन न्यूज चैनल के दफ्तर में भी इस शैतान ने विस्फोटक सामग्री भेजी थी।

इस पूरे मामले की तहकीकात करते हुए एफबीआई ने फ्लोरिडा के मियामी के उत्तरी इलाके से छप्पन वर्षीय ( छप्पन इंच वाला नहीं) सीजर सायक नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। वह ट्रंप का एक कट्टर समर्थक है। अपराधी वृत्ति के इस आदमी के अपराधों का पुराना इतिहास रहा है।

पिछले कई दिनों से ट्रंप अपने विरोधियों और मीडिया के खिलाफ जहर उगल रहे हैं, उसी का परिणाम है कि उसके समर्थक हत्यारे उन्माद में फंसते जा रहे हैं। अभी चंद दिनों बाद ही अमेरिकी सीनेट का मध्यवर्ती चुनाव होने वाला है। वहां के अखबारों में ट्रंप की तमाम मूर्खताओं और साजिशों की खबरें छपती रहती हैं और ट्रंप उन पर लगातार जहरीला हमला करता रहता है।

नये-नये रूपों में जगह-जगह सिर उठा रहा है फासीवाद

दुनिया ने दक्षिणपंथी आतंकवाद के सबसे घिनौने और विध्वंसक रूप हिटलर, मुसोलिनी, तोजो, फ्रैंको आदि को देखा और भोगा है। अब फिर से एक बार वही फासीवाद नये-नये रूपों में जगह-जगह सिर उठा रहा हैं। इसे अभी सामान्य तौर पर दक्षिणपंथ का उभार कहा जा रहा है। लेकिन 1920-30 के घटनाक्रम से वाकिफ सभी लोग जानते हैं कि दक्षिणपंथ के ऐसे सामान्य उभार के काल के अंदर से ही नाजीवाद-फासीवाद का जन्म होता है। दक्षिणपंथी तत्वों के आतंकवादी समूहों के अंदर से ही हिटलर-मुसोलिनी तैयार हुआ करते हैं।

हम भारत के लोग मोदी के वर्तमान दौर की तमाम लाक्षणिकताओं से, सारी संवैधानिक संस्थाओं को तहस-नहस करके उन पर कब्जा जमाने के नग्न अभियानों के बीच से उस ऐतिहासिक परिघटना की पुनरावृत्ति को साफ तौर पर देख सकते हैं। इसीलिये मोदी को संघर्ष के मैदान में पराजित करने के लिये व्यापकतम एकता की जरूरत से हमें एक क्षण के लिये भी डिगना नहीं चाहिए।

यह तस्वीर मियामी के उस मकान की है जहां से लोगों को डाक से बम भेजने वाला अपराधी पकड़ गया है।

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Topics – Sanatan Sanstha, Terrorist Organization, RSS, Hindu Nation, Raising of Right, Birth of Fascism, Offender of Bombs, US Senate, Righteous Terrorism, 

(एफबी टिप्पणी साभार)

About अरुण माहेश्वरी

अरुण माहेश्वरी, प्रसिद्ध वामपंथी चिंतक हैं। वे हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।

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