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सरकार हरियाणा रोडवेज के निजीकरण का फैसला रद्द करे

सरकार हरियाणा रोडवेज के निजीकरण का फैसला रद्द करे

नई दिल्ली, 26 अक्तूबर। हरियाणा सरकार के हरियाणा रोडवेज का निजीकरण करने के फैसले के विरोध में हरियाणा रोडवेज के कर्मचारी 16 अक्तूबर से हड़ताल पर हैं. हरियाणा रोडवेज कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों की परिवहन मंत्री और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के साथ हुई वार्ताएं विफल रही हैं. वे किसी भी रूप में हरियाणा बस सेवा के निजीकरण के विरोध पर डटे हुए हैं और चक्काजाम को 29 अक्तूबर तक बाधा दिया है. 

सोशलिस्ट पार्टी ने रोडवेज कर्मचारियों की हरियाणा रोडवेज का निजीकरण नहीं करने की मांग का पूर्ण समर्थन किया है. 

पार्टी अध्यक्ष डॉ. प्रेम सिंह ने कहा कि

      “हरियाणा रोडवेज अपनी समयबद्ध, सुविधाजनक, भरोसेमंद और किफायती सेवा के लिए जानी जाती है. अगर हरियाणा रोडवेज घाटे में है तो इसका समाधान निजीकरण नहीं है, बल्कि सरकार की नीतियाँ हैं. सरकार ने एस्मा लगा कर बड़ी संख्या में स्थायी, प्रोबेशन पीरियड वाले और अस्थायी कर्मचारियों को गिरफ्तार करने और बर्खास्त करने की कार्रवाई की है. यह हैरानी की बात है कि हरियाणा की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने सरकार के इस बेजा और कठोर कदम के खिलाफ जोरदार आवाज़ नहीं उठाई है.”

      सोशलिस्ट पार्टी का मानना है कि खट्टर सरकार का हरियाणा रोडवेज की कीमत पर बस-सेवा के निजीकरण का यह फैसला हरियाणा की पहचान को मिटाने वाला है. गौरतलब है कि हरियाणा रोडवेज राज्य के जन्म (1 नवम्बर 1966) से ही हरियाणा को भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से जोड़ने की सबसे मज़बूत कड़ी रही है. प्रदेश के हरियाणवी, मेवाती, ब्रज और पंजाबी लोकगीतों में हरियाणा रोडवेज का हरियाणा की पहचान के रूप में बखान मिलता है. मुख्यमंत्री खट्टर का हरियाणा की राजनीतिक और सांस्कृतिक विरासत से सरोकार नहीं है. वरना वे हरियाणा रोडवेज का निजीकरण और हड़ताल करने वाले रोडवेज कर्मचारियों पर इस कदर कठोर कार्रवाई नहीं करते.

      सोशलिस्ट पार्टी ने हरियाणा सरकार से रोडवेज के निजीकरण का फैसला वापस लेने, एस्मा हटाने और कर्मचारियों की बर्खास्तगी रद्द करने की मांग की है.

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