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जानलेवा साबित होता वायु प्रदूषण और सोती सरकार

जानलेवा साबित होता वायु प्रदूषण और सोती सरकार

Delhi air pollution and role of governments

नई दिल्ली, 06 नवंबर। देश की राजधानी दिल्ली और आसपास के लोग अभी भले ही स्मॉग के भय से भयभीत न हों, लेकिन जैसे-जैसे आसपास के राज्यों में पराली जलाने में तेजी आ रही है, दिल्लीवासियों की सांसें अटक रही हैं। लेकिन सवाल है कि हमारी सरकारें प्रदूषण और वायु गुणवत्ता को लेकर कितनी कितनी सचेत हैं।

किसान फसल अवशेष जलाकर एक तरफ जहां वायु प्रदूषण फैलाता है, वहीं इस प्रदूषण का पहला शिकार वह खुद बनता है, अतः आवश्यकता इस बात की है कि किसानों के बीच में सरकार फसल अवशेष न जलाने को लेकर जागरुकता फैलाए व फसल अवशेष के समुचित प्रबंधन के लिए आवश्यक कदम उठाए।

वरिष्ठ पत्रकार व पर्यावरणविद् पंकज चतुर्वेदी कहते हैं,

“दिल्ली सरकार आबोहवा को लेकर कितनी चिंतित है, इसकी बानगी है एनजीटी का वह हालिया आदेश जिसमें बढ़ते प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए नाकाम रहने पर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर जुर्माना लगाया गया है।“

श्री चतुर्वेदी बताते हैं कि एक अनुमान है कि हर साल अकेले पंजाब-हरियाणा के खेतों में कुल तीन करोड़ 50 लाख टन पराली जलाई जाती है। वह बताते हैं कि एक टन पराली जलाने पर दो किलो सल्फर डाईऑक्साइड, तीन किलो ठोस कण, 60 किलो कार्बन मोनोऑक्साइड, 1460 किलो कार्बन डाईऑक्साइड और करीब 200 किलो राख निकलती हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब कई करोड़ टन फसल अवशेष जलते हैं तो वायुमंडल की कितनी दुर्गति होती होगी। हानिकारक गैसों एवं सूक्ष्म कणों से परेशान दिल्ली वालों के फेफड़ों को कुछ महीने हरियाली से उपजे प्रदूषण से भी जूझना पड़ता है।

स्वतंत्र पत्रकार व स्तंभकार निर्मल रानी कहती हैं,

“सरकारें हैं कि या तो सर्दियों के शुरू होते ही प्रदूषण से निपटने के नाम पर ताल ठोक कर मैदान में आ जाती हैं या फिर पंजाब व हरियाणा जैसे प्रमुख कृषि उत्पादक राज्यों में फसल की कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेष को जलाने के विरुद्ध सरकार का प्रचार या हो-हल्ला सुनाई देता है।

इस बार भी केंद्र सरकार तथा दिल्ली सरकार द्वारा राजधानी में प्रदूषण से निपटने हेतु 44 टीमें बनाई गई हैं। दिल्ली में कूड़ा-करकट व प्लास्टिक जलाने वालों पर कठोर कार्रवाई किए जाने की चेतावनी दी गई है। राजधानी में होने वाले निर्माण कार्य व इसमें बरती जाने वाली लापरवाही पर नज़र रखी जा रही है। प्रदूषण प्रमाण पत्र नहीं रखने वाले वाहनों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई किए जाने का प्रस्ताव है।“

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