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Kidney

डायबिटीज से बढ़ती किडनी की बीमारी

नई दिल्ली : जिन लोगों को डायबिटीज की बीमारी (Diabetes disease) है उनको गुर्दे की बीमारी होने की काफी आशंका रहती हैं। आकड़े बताते हैं कि डायबिटीज, गुर्दे फेल होने का एक प्रमुख कारण (A major cause of renal failure) है। इसलिए डायबिटीज के रोगियों को गुर्दे फेल होने के शुरूआती लक्षणों  का ज्ञान (Early symptoms of renal failure in patients with diabetes) होना अति आवश्यक है। अगर रोगी के परिवार में किसी निकट सम्बन्धी के पूर्व में डायबिटीज से गुर्दे खराब (Diabetes impaired kidneys) हो चुके हैं तो उसके भी गुर्दे खराब होने की आशंका बढ़ जाती है।

नारायणा सुपर स्पेशियालिटी हॉस्पिटल के नेफ्रोलोजिस्ट (Nephrologist in Delhi/NCR) डॉ.सुदीप सिंह सचदेव का कहना है कि वे लोग जो कि डायबिटीज के मरीज हैं, उनमें से लगभग आधे लोग किडनी समस्या से पीडि़त हैं। इन लोगों के लिए आवश्यक है कि वे अपनी नियमित जांच कराएं और किडनी जांच पर विशेष तौर पर ध्यान दें। डायबिटीज से होने वाली किडनी समस्या का उपचार उपलब्ध है, बशर्ते समय रहते उसका निदान किया जा सके। अपने शुगर लेवल को नियंत्रण में ही रखें। आप का रक्तचाप जितना कम होगा, आप की किडनी की कार्यशैली भी उतनी देर से ही दुष्प्रभावित होगी।

वह बताते हैं कि बहुत से लोगों को यह पता है कि उच्च रक्तचाप से हार्ट अटैक, ब्रेन अटैक हो सकता है लेकिन बहुत कम लोगों को ही यह मालूम है कि इससे किडनी को भी नुकसान पहुंच सकता है, विशेषकर उन केसों में जहां पीड़ित दिल की समस्या व डायबिटीज से पीड़ित होता है।

गुर्दे की बीमारी के प्रारम्भिक लक्षण क्या हैं What are the initial symptoms of kidney disease

डॉ.सुदीप सिंह सचदेव के मुताबिक अगर रोगी को निम्नलिखित लक्षणों में से कोई भी लक्षण दिखाई देता है तो तुरन्त गुर्दे के डाक्टर से सम्पर्क करें –

ब्लड प्रेशर का होना,

मुँह पर सूजन आना,

पेशाब में प्रोटीन जाना,

पेशाब में खून का आना आदि।

भारत में टाइप-2 डायबिटीज विकसित देशों की अपेक्षा कम उम्र में लगभग एक दशक पहले हो जाती है। डायबिटीज शुरुआत में ज्यादातर सुप्तावस्था में होती है, लगभग हर बारहवां शहरी भारतीय वयस्क मधुमेह रोगी है। हम केवल कल्पना ही कर सकते हैं कि भारत में स्थिति कितनी भयावह होगी। इस रोग से ठीक से निपटने के लिए हर 2 लाख की आबादी पर एक विशेषज्ञ चिकित्सक होना चाहिए।

हमारे देश के दक्षिण भाग में प्रशिक्षित विशेषज्ञ उत्तर की अपेक्षा कहीं अधिक हैं। भारत में पिछले दो दशकों में तेजी से हुए शहरीकरण तथा बदलती जीवनशैली के परिणामस्वरूप हमारे खानपान में आए परिवर्तन फास्टफूड, कोका कोलोनाइजेशन, शारीरिक श्रम में कमी, भागदौड़, स्पर्धाग्रस्त जिन्दगी से उत्पन्न तनाव इसकी महत्वपूर्ण वजह है।

डॉ. सुदीप सिंह सचदेव का कहना है कि अगर किसी मरीज को रक्तचाप की बीमारी है तो उसे नियमित दवा से ब्लड प्रेशर की 120 से 30/70-80 तक कन्ट्रोल करने पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि अगर ब्लड प्रेशर बढ़ा रहता है तो गुर्दे खराब हो सकते हैं।

इस बीमारी में भी पेशाब में प्रोटीन आना शुरू हो जाती है।

ब्लड प्रेशर भी डायबिटीज के बाद गुर्दे खराब करने का एक प्रमुख कारण

गुर्दे फेल हो जाने पर आने वाले लक्षण देर से आने वाले लक्षणों में भूख में कमी, उल्टी होने की सम्भावना लगना या उल्टी होना, शरीर में खून की कमी, थकावट रहना तथा ब्लड प्रेशर का होना आदि हैं, जो गुर्दे फेल होने की तरफ इशारा करते हैं।

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