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साहित्य पुरस्कारों का ऐलान, नए कार्यक्रमों में गांवों में आयोजित होंगे ड्रामा-आलोक

गांव गांव चली साहित्य अकादमी…

अनिल सागर

नई दिल्ली, 22 दिसम्बर (देशबन्धु)। साहित्य अकादेमी में नई परिषद का गठन हो चुका है और अध्यक्ष का कार्यकाल 31 दिसम्बर को पूरा हो जाएगा। इससे पूर्व कल 24 भाषाओं में अपने वार्षिक साहित्य अकादेमी पुरस्कार की घोषणा कर दी है। इसमें सात उपन्यास, पांच कविता, कहानी-संग्रह, पांच समालोचना, एक नाटक और एक निबंध के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार घोषित कर दिए। हिन्दी का पुरस्कार के लिए रमेश कुंतल मेघ के नाम की घोषणा की है। सभी भाषाओं की निर्णायक समितियों द्वारा की गई अनुशंसा तथा साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष प्रो. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित अकादेमी के कार्यकारी मंडल की बैठक में कल इन्हें अनुमोदित किया गया।

पिछले 11 माह में 599 कार्यक्रम, 544 किताबों के प्रकाशन के बाद अब अकादमी ने तय किया है कि वह गांव गांव पहुंचने के लिए ड्रामा-आलोक शुरू कर इस साल 150 कार्यक्रम कर साहित्य व लेखकों को गांव तक पहुंचाएगी।

बीते 63 साल में जो नही हुआ अब करने का दम भरते हुए अकादमी सचिव डा. के. श्रीनिवास राव ने कहा कि शुरूआत में कारगिल में लेखकों से संवाद, हाल ही में अंडमान निकोबार में कार्यक्रम किए हैं अब कई श्रंख्ला तैयार हो रही हैं। हर राज्य में अकामदी की किताबों को जन जन तक पहुंचाने की योजना में राज्य सरकार की अकादमियों से भी संपर्क कर रहे हैं। अकादमी साल भर में 102 पुरस्कार देती है और अब नए अध्यक्ष का चयन भी शुरू हो चुका है। छह नामांकन में प्रो. चंद्रशेखर कंबार, प्रो. बालचन्द्र नमाड़े, डॉ. प्रतिभा रॉय का नाम तय हुआ है। हाल में गठित 99 सदस्यों की सामान्य परिषद इनमें से एक नाम निर्धारित करेंगे। अन्य नामांकन में डॉ. लीलाधर जबूड़ी, डॉ. भलवन्त जानी, सैफी सोज़ के नाम भी अध्यक्ष पद के लिए आए थे।



सचिव श्री राव ने बताया कि कविता-संग्रहों के लिए पुरस्कृत 5 कवियों में उदय नारायण सिंह 'नचिकेता' (मैथिली), श्रीकांत देशमुख (मराठी), भुजंग टुडु (संताली), (स्व.) इंक़लाब (तमिळ) और देवीप्रिया (तेलुगु) शामिल हैं। जबकि जयंत माधव बरा (असमिया), आफसार आमेद (बाङ्ला), रीता बर' (बोडो), ममंग दई (अंग्रेज़ी) के.पी. रामनुन्नी (मलयालम), निरंजन मिश्र (संस्कृत) और नछत्तर (पंजाबी) को उनके उपन्यास हेतु पुरस्कृत किया गया। अपने कहानी-संग्रहों के लिए पुरस्कृत पांच कहानकारों में शिव मेहता (डोगरी), औतार कृष्ण रहबर (कश्मीरी), गजानन जोग (कोंकणी), गायत्री सराफ (ओडिय़ा) और बेग एहसास (उर्दू) आदि हैं। जबकि उर्मि घनश्याम देसाई (गुजराती), रमेश कुंतल मेघ (हिंदी), टी.पी. अशोक (कन्नड), वीणा हाङ्गखिम (नेपाली) और नीरज दइया (राजस्थानी) को समालोचना के लिए पुरस्कृत किया गया।

राजेन तोइजाम्बा (मणिपुरी) को उनके नाटक के लिए और जगदीश लछाणी (सिंधी) को उनके निबंध के लिए पुरस्कृत किया गया। इन पुस्तकों को संबंधित भाषा के त्रिसदस्यीय निर्णायक मंडल ने निर्धारित चयन-प्रक्रिया का पालन करते हुए पुरस्कार के लिए चुना है। यह पुरस्कार 1 जनवरी 2011 से 31 दिसम्बर 2015 के दौरान पहली बार प्रकाषित पुस्तकों पर दिए गए हैं। साहित्य अकादेमी पुरस्कार के रूप में एक उत्कीर्ण ताम्रफलक, शॉल और एक लाख रुपये की राशि प्रदान करेगी। घोषित पुरस्कार 12 फऱवरी 2018 को नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह (साहित्योत्सव) में दिए जाएंगे। इसके साथ ही अनुवाद के लिए भी लेखकों के पुरस्कारों का ऐलान कर दिया गया।



विभिन्न भाषा की किताबें व लेखक…

अंग्रेजी-द ब्लैक हिल (उपन्यास)-ममंग दई

गुजराती- गुजराती व्याकरणनां बसो वर्ष (समीक्षा)-उर्मि घनश्याम देसाई

हिंदी-विश्वमिथकसरित्सागर (साहित्यिक समीक्षा)-रमेश कुंतल मेघ

कश्मीरी- येलि परदा वोथ (कहानी-संग्रह)-औतार कृष्ण रहबर

कोंकणी- खांद आनी हेर कथा (कहानी-संग्रह)-गजानन जोग

मैथिली- जहलक डायरी (कविता-संग्रह)     -उदय नारायण सिंह 'नचिकेता'

मराठी-  बोलावें ते आम्ही ;कविता-संग्रह-श्रीकांत देशमुख

नेपाली- कृति विमर्श (साहित्यिक समीक्षा)-वीणा हाङ्गखिम

पंजाबी-  स्लो डाउन (उपन्यास)-नछत्तर

राजस्थानी-बिना हासलपाई (आत्मकथा)-नीरज दइया

संस्कृत–गंगापुत्रावदानम् (उपन्यास)-निरंजन मिश्र

सिंधी–आछेन्द लज मरान (निबंध-संग्रह)-जगदीश लछाणी

उर्दू–दख़मा (कहानी-संग्रह)-बेग एहसास



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