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ईवीएम पर संयुक्त प्रयास हो वरना लोकतंत्र के मशीनी कुंड में ऐसे ही जनादेश की आहुति जारी रहेगी

 

अभिषेक श्रीवास्तव

आजमगढ़ में एक गाँव है तमौली। नेताजी मुलायम सिंह यादव का गोद लिया गाँव है सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत। यहाँ 90 फीसदी यादव हैं और 10 फीसदी दलित। यहां एक भी यादव वोट छिटकता नहीं है, सब सपा को जाता है। आँख बंद कर के। हम लोग जब गाँव गए थे, तब वहां एक यज्ञ चल रहा था। नेताजी के कुनबे में अमन कायम करने के लिए भी यहाँ यज्ञ हुआ था।

थोड़ी देर पहले ग्राम प्रधान से मेरी बात हुई। बता रहे थे कि ज़बरदस्त भितरघात हुआ है। कुल 300 दलित वोट में से 150 भाजपा को गए और 200 यादव वोट भी कमल के फूल पर चले गए। प्रधान बता रहे थे कि बगल के गाँव मुल्लापुर में भी 200 वोटों का खेल हुआ है। उनके मुताबिक हर गाँव में 200 वोट मैनेज किये गए हैं। सहारनपुर, देवबंद आदि से भी ऐसी खबरें हैं।

EVM में गड़बड़ी की बात हम लोग लंबे समय से करते रहे हैं, लेकिन हमारा सवाल हमेशा हास्यास्पद हो जाता है क्योंकि उधर से पूछ लिया जाता है- यूपी में गड़बड़ी हुई तो पंजाब में क्या? लोकसभा में गड़बड़ थी तो दिल्ली का क्या? EVM पर सेलेक्टिव विमर्श हारने वाले पक्ष को हास्यास्पद बना देता है। बावजूद इसके शिकायतें हैं और धीरे-धीरे आ भी रही हैं।

लोकसभा चुनाव में भी कई बूथों से गड़बड़ी की शिकायत आयी थी, लेकिन उन पर किसी ने ठोस संज्ञान नहीं लिया। बनारस में तीन लाख बोगस वोट निकले थे लेकिन अरविन्द केजरीवाल की कुव्वत नहीं थी कि वे राजनारायण जैसा साहस दिखाते

हार-जीत के सामाजिक-राजनीतिक विश्लेषण के साथ ज़रूरी यह भी है कि अलग-अलग बूथों से आ रही शिकायतों को डॉक्यूमेंट किया जाए। Pavan Geeta Dahat बता रहे थे कि महाराष्ट्र के चुनाव में भी ऐसी गड़बड़ियों को लेकर कुछ मुक़दमे कायम हैं। अगर यूपी के लिए इस काम की ज़िम्मेदारी कोई समूह या संगठन ले सके, तो अलग-अलग मामलों को मिला कर एक जनहित याचिका की शक्ल दी जा सकती है।

पत्रकार संदिग्ध मामलों को जुटाएं, सामाजिक संगठन PIL बनाएं और सरोकारी अधिवक्ता मुकदमा अपने हाथ में लें, तो शायद कुछ सार्थक बात बने वरना ठोस साक्ष्य होते हुए भी EVM का रोना रोने वाले खिसियानी बिल्ली करार दिए जाएंगे और लोकतंत्र के मशीनी कुंड में ऐसे ही जनादेश की आहुति जारी रहेगी।

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