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किसानों ने मांगा भूमि अधिकार

सैकड़ों किसानों ने लोकतंत्र और संविधान को बचाने की ली शपथ, धरना-प्रदर्शन कर मांगा जल, जंगल, जमीन और खनिज पर अपना अधिकार     

रायपुऱ। अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा के आह्वान पर आज प्रदेश के जिला और तहसील मुख्यालयों पर सैकड़ों किसानों ने लोकतंत्र और संविधान को बचाने की शपथ ली और धरना-प्रदर्शन-ज्ञापन के जरिये जल, जंगल, जमीन और खनिज पर संविधानप्रदत्त अपने अधिकारों की मांग की.

आज यहां जारी एक बयान में किसान सभा के राज्य महासचिव ऋषि गुप्ता ने बताया कि सरगुजा, बलरामपुर, सूरजपुर, कोरबा, रायगढ़, चांपा-जांजगीर, बिलासपुर और गरियाबंद जिलों के कई स्थानों पर यह कार्यवाही की गई. इनका नेतृत्व कपिल पैकरा, राकेश चौहान, सुखरंजन नंदी, एन के कश्यप, सोनकुंवर, आशाराम, बिफन नागेश, टी सी सूरज, लंबोदर साव, समयलाल यादव, पीयर सिंह, विशाल बाकरे, देवान सिंह मार्को, शिवशंकर गुप्ता, अलीराम रजवाड़े, वेदनाथ रजवाड़े, अनुज कुमार, देव साय, कन्हैयालाल खूंटे, लीलाधर श्रीवास, सूरजभान सिंह, कृष्णकुमार आदि किसान नेताओं ने किया.

इस आंदोलन के माध्यम से किसान सभा ने पूरे प्रदेश की जनता का ध्यान भाजपा सरकार की किसानविरोधी नीतियों की ओर आकर्षित किया है, जिसके कारण दलित-आदिवासी न केवल अपनी भूमि से, बल्कि अपनी फसल के लाभकारी मूल्य से भी वंचित हो रहे हैं. इन किसान नेताओं का आरोप हैं कि सरकार पेसा और 5वीं अनुसूची के जरिये आदिवासियों को मिले संवैधानिक अधिकारों को ख़त्म करना चाहती है और इसके लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण कानूनों में फेर-बदल कर रही है, आदिवासियों को वन भूमि का पट्टा देने के बजाये मिले पट्टों को छीना जा रहा है और वनों से उन्हें खदेड़कर जमीन कॉर्पोरेटों को सौंपा जा रहा है. उनका कहना है कि चुनाव से पूर्व भाजपा ने समर्थन मूल्य और क़र्ज़ मुक्ति के वादे के साथ इस देश के किसानों से जिन 'अच्छे दिनों' का वादा किया था, उसे पूरा करने के लिए उसने एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाया है.

आज के आन्दोलन में मनरेगा, सूखा राहत, इंदिरा आवास और शौचालय निर्माण में भ्रष्टाचार, किसानों पर वन्य-प्राणियों के हमले जैसे मुद्दे भी बड़े पैमाने पर उठाये गए हैं. इन मुद्दों पर आगामी दिनों में आंदोलन तेज किया जाएगा.

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