Home » फासीवाद : कारपोरेट राजनैतिक शासन की नग्न आतंकवादी तानाशाही

फासीवाद : कारपोरेट राजनैतिक शासन की नग्न आतंकवादी तानाशाही

Fascism in India

अखिलेन्द्र प्रताप सिंह

फासीवाद व नाजीवाद का मूल यूरोपीय है।

बेनिटो मुसोलिनी इटली में फासीवाद का संस्थापक था, जो 1922 में सत्ता में पहॅुचा और जर्मनी में नाजीवाद का नेता एडोल्फ हिटलर 1933 में सत्ता पर काबिज हुआ।

इटली में फासीवाद और जर्मनी में नेशनल सोशलिज्म(नाजीवाद) कभी भी सुसंगत विचारों का समूह नहीं रहे। बौद्धिक ईमानदारी और सत्य के प्रति इनमें अनास्था व उदासीनता थी। इनकी जनता में व्यापक भावनात्मक अपील थी।

फासीवाद को कारपोरेट राजनैतिक शासन की नग्न आतंकवादी तानाशाही के बतौर जाना जाता है। यह धारा नस्ल और राष्ट्र का महिमा मंडन करती है और अंध राष्ट्रवाद का प्रतिनिधित्व करती है। ये जनता से वामपंथी अपील करते हैं लेकिन कारपारेट तथा वित्तीय पूंजी के साम्राज्यवादी तत्वों के हितों की सेवा करते हैं। ये कारपारेट अर्थतंत्र का पोषण करते हैं तथा लघु उत्पादकों की अर्थव्यवस्था को तबाह करते हैं।

यूरोप में फासीवाद ने एकाधिकारी पूंजी के लिए निम्न वर्गों, छोटे उत्पादकों, किसानों, दस्तकारों, आफिस के कर्मचारियों, नौकरशाहों आदि के बीच एक जनाधार बनाने का प्रयास किया। फासीवाद ने 18 वीं सदी की ज्ञानोदय की संपूर्ण विरासत को नकार दिया। इसने न सिर्फ मार्क्स को खारिज किया, वरन् वाल्टेयर और जान स्टुअर्ट मिल को भी। इसने न सिर्फ साम्यवाद को खारिज किया वरन् उदारवाद के सभी रूपों को भी। उदारवादियों, समाजवादियों, कम्यूनिस्टों, अकादमिक समुदायों, व्यक्तियों ने फासीवाद का मुकाबला किया।

सोवियत संघ व पश्चिमी मित्र राष्ट्रो के हाथों फासीवाद की करारी शिकस्त हुई, हालाँकि हाल ही में संयुक्त राष्ट्र अभिलेखागार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी-ब्रिटिश सरकारों तथा नाजियों के बीच एक व्यवस्थित साँठ-गाँठ थी।

युद्ध में पराजय के बाद हिटलर ने आत्महत्या कर ली और मुसोलिनी को फँसी पर लटका दिया गया।

यह भी पढ़ेंअमेरिकी साम्राज्यवाद और इस्लामिक फासीवाद – दोनों जनता के दुश्मन हैं

     भारत में आर.एस.एस. से लेकर देशज वादी समाज विज्ञानियों के एक हिस्से तक का विचार है कि फासीवाद पाश्चात्य मूल का है और भारत में फासीवादी राजनैतिक शासन की कोई संभावना नहीं है।

हाल ही में कम्युनिस्ट खेमे में यह बहस उभरी कि भारत में अधिनायकवादी राजनैतिक शासन आ रहा है कि फासीवादी।

मिलिबैंड को उद्धृत किया गया कि नाजी जर्मनी में फासीवाद के संत्रास के खिलाफ सार्वजनिक घृणा के बाद अब पूंजीपतियों के लिए चरम संकट के क्षणों में भी फासीवाद के विकल्प के विषय में सोचना कठिन है।

कहा जा रहा है कि नव उदारवादी प्रक्रिया के गर्भ से पैदा हुई अधिनायकवादी रूझान की अभिव्यक्ति हो रही है संविधान संशोधन के माध्यम से राजनैतिक बदलाव की मांग में। ‘स्थिरता तथा मजबूत सरकार’ प्रमुख चिंता बन गई है।

यह भी पढ़ेंयोगी के हवाले यूपी : क्या दिशा लेगी भारतीय राजनीति

तुर्की की चर्चा की गई है जहां राजनैतिक इस्लाम के लिए राष्ट्रपति प्रणाली ने संसदीय व्यवस्था की जगह ले लिया है। इस विचार के अनुसार भारत में फासीवाद नहीं बल्कि अधिनायकवाद की आहट है। यह कहा गया है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अधिनायकवादी हिन्दू राष्ट्र में विश्वास करता है।

फासीवाद का भारतीय संस्करण हिन्दुत्व

Hindutva : Indian version of fascism

सच्चाई यह है कि हिन्दुत्व का राजनैतिक विचार राष्ट्रीय आंदोलन के दौर से लेकर आज तक लड़ रहा है। आर.एस.एस. उस हिन्दू राष्ट्र का आकांक्षी है तथा उसके लिए लगातार काम कर रहा है, जो और कुछ नहीं वरन फासीवाद का भारतीय संस्करण है। फासीवाद राजनीति से अधिक कुछ है।

राजनैतिक विचारधारा निश्चय ही अर्थव्यवस्था के धरातल पर काम करती है लेकिन उसकी अपनी स्वायत्तता भी है।

ऐजाज अहमद ने सही ही कहा है कि फासीवाद की शास्त्रीय भूमि इटली का अनुभव दिखाता है कि बड़े पूंजीपति वर्ग ने न तो फासीवाद को खड़ा किया, न ही इसने सत्ता कायम करने या उसके सुदृढ़ीकरण में कोई उल्लेखनीय भूमिका निभाई अर्थात मुसोलिनी शासन की पूंजीपति वर्ग से सापेक्ष स्वायत्तता थी, बावजूद इसके कि दोनों के समान सरोकार थे। हिन्दुत्व का सैद्धांतिक सूत्रीकरण  सावरकर ने अपनी पुस्तक ‘‘हिन्दुत्व या हिन्दू कौन है’’ में किया।

सावरकर ने कुछ खास उद्देश्य से हिन्दुत्वशब्द गढ़ा।

उन्होंने कहा कि ‘‘ आर्य, जो इतिहास के ऊषाकाल में भारत में आबाद हुए, पहले से ही एक राष्ट्र थे, जिन्होंने हिन्दुओं के रूप में मूर्त रूप ग्रहण किया।’’

सावरकर का द्विराष्ट्र सिद्धांत

Savarkar’s two-nation theory

इसी सूत्रीकरण के आधार पर ‘द्विराष्ट्र सिद्धांत’ सावरकर ने गढ़ा। हिन्दुत्व आर.एस.एस. का मार्गदर्शक सिद्धांत रहा है। आर.एस.एस. का सिद्धांत आर्य नस्ल की श्रेष्ठता और प्रधानता पर आधारित है।

यह भी पढ़ेंभगत सिंह और सावरकर एक साथ : फासीवादी गन्दी चाल!

आर.एस.एस. के सिद्धांतकार और दूसरे सर संघ संचालक गोलवलकर सांस्कृतिक राष्ट्रवाद तथा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के राज्य-क्षेत्र आधारित राष्ट्रवाद के बीच फर्क करते हैं। गोलवलकर ने ‘‘वी आर नेशनहुड डिफाइंड’’ में लिखा‘‘ चतुर प्रचीन राष्ट्रों (नाजी जर्मनी और फासीवादी इटली) द्वारा स्वीकृत इस दृष्टि बिंदु के अनुसार विदेशी नस्लों को हिन्दुस्तान में या तो हिन्दु संस्कृति और भाषा को स्वीकार करना होगा, हिन्दू धर्म का सम्मान करना सीखना होगा, हिन्दू नस्ल और संस्कृति अर्थात हिन्दू राष्ट्र के महिमा मंडन से इतर अन्य कोई विचार मन में नहीं लाना होगा, हिन्दू नस्ल में समाहित हो जाने के लिए अलग अस्तित्व का त्याग करना होगा अथवा उन्हें हिन्दू राष्ट्र के पूरी तरह अधीन रहना होगा जहां वे किसी चीज के लिए दावा नहीं कर सकते हैं, किसी विशेषाधिकार के मांग नहीं कर सकते, किसी अतिरिक्त सुविधा की तो बात ही छोड़ दीजिए, यहां तक कि नागरिक के अधिकार भी उनके पास नहीं होंगे। उन्होंने पितृ भूमि और पुण्य भूमि का सिद्धांत पेश किया। उनके लिए केवल हिन्दू नस्ल ही भारतीय होने की अधिकारी है क्योंकि भारत उनके लिए पितृ भूमि और पुण्य भूमि दोनों है।

यह भी पढ़ें – सलमान तासीर की हत्या और फासीवाद की आहटें

भाजपा द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर कब्जे ने आर.एस.एस. को राज सत्ता की सभी संस्थाओं में अपनी जड़े जमाने का अवसर दिया है। संस्थाओं को पुनर्परिभाषित किया जा रहा है, मतभेद और असहमति के साथ देश द्रोह जैसा बर्ताव किया जा रहा है। अल्पसंख्यकों, दलितों व आदिवासियों के खिलाफ खुलेआम हिंसक वारदातें संगठित की जा रही हैं। जो भी सरकार, उसके भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलता है, उसे हिंसा का शिकार बनाया जा रहा है।

सावरकर व गोलवलकर की ही तरह मोहन भागवत ने खुलेआम पुष्ट किया है कि ‘‘भारत एक हिन्दू राज्य है और हिंदुस्तान के नागरिकों को हिंदू के रूप में जाना जाना चाहिए।’’

मोदी अपनी छवि गरीब पक्षधर, मजबूत और वैश्विक स्तर के नेता के रूप में पेश करने में सफल हुए हैं। उनकी यह गढ़ी गई छवि जमीनी स्तर तक पहुँची है। किसी विश्वसनीय राजनैतिक विपक्ष तथा राजनैतिक आंदोलन के अभाव में मोदी का प्रभाव व्यापक होता जा रहा है। अन्यथा कोई ऐसी ठोस चीज नहीं है जो मोदी सरकार ने अपने पिछले 3 वर्ष के शासनकाल में जनता को दी हो।

विपक्ष के नव उदारवादी- उत्तर आधुनिकतावादी नुस्खे ने हिंदुत्व की ताकतों को फलने-फूलने का अवसर दिया

विपक्ष के नव उदारवादी तथा उत्तर आधुनिकतावादी नुस्खे हिंदुत्व की ताकतों को फलने-फूलने का अवसर दे रहे हैं।

सच्चाई यह है कि अनौपचारिक क्षेत्र की अर्थव्यवस्था बुरी तरह तबाह हो रही है, बेरोजगारी बढ़ रही है, किसानों की आत्महत्या की घटनायें बढ़ रही हैं। कश्मीर और सीमा प्रश्न अभी भी अनसुलझे हैं। भारतीय राजनैतिक तंत्र का वस्तुगत मूल्यांकन दिखाता है कि सत्ता प्रतिष्ठान गहरे संकट में है, संकट आर्थिक और राजनैतिक ही नहीं नैतिक भी है।

यह भी पढ़ेंमानवता को खतरा मशीनों से नहीं पूंजीवाद से है : फासीवाद का बढ़ता कदम और क्रन्तिकारियों की रणनीति

भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने के इस अभियान का मुकाबला करने के लिए उपयुक्त नीतियों तथा कार्यक्रम की जरूरत है। मोदी सरकार द्वारा पेश चुनौती का मुकाबला करने के लिए आंदोलन की ताकतों, तमाम विचारों, तबकों, व्यक्तियों का व्यापकतम संभव संश्रय बनना चाहिए। एक लोकप्रिय मोर्चा आज समय की मांग है। यह संयुक्त मोर्चा न सिर्फ बहुसंख्यकवादी कारपारेट फासीवाद की आसन्न चुनौती का मुकाबला करेगा, वरन् भारतीय राज व समाज के संपूर्ण जनवादीकरण के लिए भी काम करेगा।

मोर्चें को 1857 के राष्ट्रवाद कीे देशभक्ति को बुलंद करना चाहिए तथा हिन्दुत्व के राष्ट्रवाद के संकीर्ण चरित्र का पर्दाफाश करना चाहिए। नास्तिक भगत सिंह की धर्मनिरपेक्षता के प्रति प्रतिबद्धता तो स्वयं सिद्ध है, सनातनी हिन्दू गांधी एक महान धर्मनिरपेक्षतावादी थे।

यह भी पढ़ेंसंसदीय वामपंथ कम्‍युनिज्‍़म नहीं, बल्कि सामाजिक जनवाद है। फासीवाद के विरुद्ध संघर्ष का मुख्‍य मोर्चा समाज में और सड़कों पर होगा

मोर्चे को मोदी सरकार एवं कारपारेट के संश्रय को बेनकाब करने पर केन्द्रित करना चाहिए और इसे अपने को ‘भ्रष्टाचार से आजादी’ जैसे आंदोलन से जोड़ना चाहिए।

मोर्चे को युवाओं, किसानों अनौपचाारिक क्षेत्र के रोज-ब- रोज के मुद्दों पर भी हस्तक्षेप करना चाहिए। संघ परिवार के गुण्डों, अपराधियों, लम्पटों की सड़क की हिंसा का मुकाबला करने के लिए मोर्चे को विभिन्न स्तरों पर जुझारू जन प्रतिरोध विकसित करना चाहिए। यह आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण तत्व होना चाहिए।

संयुक्त मोर्चा का शासक विपक्ष के साथ रिश्ता कार्यनीतिक मामला है। परिस्थितयों के अनुसार हम तय कर सकते हैं कि किसके साथ क्या रिश्ता होगा। यह कार्यनीतिक प्रश्न है और उसी स्तर पर इसे हल किया जाना चाहिए।

अखिलेन्द्र प्रताप सिंह

राष्ट्रीय कार्य समिति सदस्य, स्वराज अभियान   

(स्वराज अभियान द्वारा आयोजित कार्यशाला में प्रस्तुत पर्चा)

 

About हस्तक्षेप

Check Also

भारत में 25 साल में दोगुने हो गए पक्षाघात और दिल की बीमारियों के मरीज

25 वर्षों में 50 फीसदी बढ़ गईं पक्षाघात और दिल की बीमांरियां. कुल मौतों में से 17.8 प्रतिशत हृदय रोग और 7.1 प्रतिशत पक्षाघात के कारण. Cardiovascular diseases, paralysis, heart beams, heart disease,

Bharatendu Harishchandra

अपने समय से बहुत ही आगे थे भारतेंदु, साहित्य में भी और राजनीतिक विचार में भी

विशेष आलेख गुलामी की पीड़ा : भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रासंगिकता मनोज कुमार झा/वीणा भाटिया “आवहु …

राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा: चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश

राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा : चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश Occupy national institutions : …

News Analysis and Expert opinion on issues related to India and abroad

अच्छे नहीं, अंधेरे दिनों की आहट

मोदी सरकार के सत्ता में आते ही संघ परिवार बड़ी मुस्तैदी से अपने उन एजेंडों के साथ सामने आ रहा है, जो काफी विवादित रहे हैं, इनका सम्बन्ध इतिहास, संस्कृति, नृतत्वशास्त्र, धर्मनिरपेक्षता तथा अकादमिक जगत में खास विचारधारा से लैस लोगों की तैनाती से है।

National News

ऐसे हुई पहाड़ की एक नदी की मौत

शिप्रा नदी : पहाड़ के परम्परागत जलस्रोत ख़त्म हो रहे हैं और जंगल की कटाई के साथ अंधाधुंध निर्माण इसकी बड़ी वजह है। इस वजह से छोटी नदियों पर खतरा मंडरा रहा है।

Ganga

गंगा-एक कारपोरेट एजेंडा

जल वस्तु है, तो फिर गंगा मां कैसे हो सकती है ? गंगा रही होगी कभी स्वर्ग में ले जाने वाली धारा, साझी संस्कृति, अस्मिता और समृद्धि की प्रतीक, भारतीय पानी-पर्यावरण की नियंता, मां, वगैरह, वगैरह। ये शब्द अब पुराने पड़ चुके। गंगा, अब सिर्फ बिजली पैदा करने और पानी सेवा उद्योग का कच्चा माल है। मैला ढोने वाली मालगाड़ी है। कॉमन कमोडिटी मात्र !!

media

82 हजार अखबार व 300 चैनल फिर भी मीडिया से दलित गायब!

मीडिया के लिये भी बने कानून- उर्मिलेश 82 thousand newspapers and 300 channels, yet Dalit …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: