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AIDS

एचआईवी के पचास प्रतिशत मरीज 15 से 25 साल के उम्र के बच्चे एवं युवा

Fifty percent of HIV-positive are children and young people aged 15 to 25

What is full form of AIDS

कौशाम्बी (गाज़ियाबाद) 30 नवंबर, 2018. “विश्व एड्स दिवस (world AIDS Day in Hindi) पूरी दुनिया में हर साल 1 दिसम्बर को लोगों को एड्स (एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिशियेंसी सिंड्रोम- Acquired Immuno Deficiency Syndrome) के बारे में जागरूक करने के लिए मनाया जाता है। एड्स ह्यूमन इम्यूनो डेफिशियेंसी (एचआईवी) वायरस के संक्रमण के कारण होने वाला महामारी का रोग है। यह दिन सरकारी संगठनों, गैर सरकारी संगठनों, नागरिक समाज और अन्य स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा एड्स से संबंधित भाषण या सार्वजनिक बैठकों में चर्चा का आयोजन करके मनाया जाता है।“

यह जानकारी गाज़ियाबाद के कौशाम्बी स्थित यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की वरिष्ठ एड्स रोग विशेषज्ञ डॉ रूबी बंसल ने दी। वह विश्व एड्स दिवस की पूर्व संध्या पर हॉस्पिटल में आयोजित एक प्रेस वार्ता में संवाददाताओं से बात कर रही थीं।

डॉ रूबी बंसल ने बताया कि

“विश्व एड्स दिवस का उद्देश्‍य लोगों को एड्स बीमारी के नवीनतम उपचार एवं बचाव के बारे में लोगों को जानकारी पहुँचाना है।”

एड्स बीमारी के भारत एवं विश्व के नवीनतम आकड़े प्रस्तुत करते हुए डॉ रूबी बंसल ने बताया कि बताया कि पूरे विश्व में 36.9 मिलियन लोग एचआईवी से प्रभावित हैं, जिसमें से भारत में 21 लाख लोग एचआईवी से प्रभावित हैं। भारत में 2017 में हुए सर्वे के अनुसार कर्नाटक पहले नम्बर पर रहा और करीब एक लाख इकत्तीस हजार एच आई वी केस के साथ उत्तर प्रदेश पांचवे स्थान पर रह।

डॉ. बंसल ने  बताया कि इस साल विश्व एड्स दिवस की थीम “अपनी स्थिति जानें” है, जिसमें हर ऐसे व्यक्ति, जो एड्स होने के किसी भी संभावित कारण, जोखिम या खतरे से टकराया हो, उसे एड्स का टेस्ट (जांच) करा कर अपना स्टेटस पता कर लेना चाहिए।

विश्व एड्स दिवस पर एक हेल्थ टॉक

इस अवसर पर पर एक हेल्थ टॉक का आयोजन भी किया गया, जिसमें एड्स बीमारी के नवीनतम उपचार एवं बचाव के बारे में जानकारी डॉ रूबी बंसल ने दी।

डॉ बंसल ने स्कूली बच्चों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज के समय में एचआइवी के सम्पूर्ण मरीजों में से पचास प्रतिशत मरीज पंद्रह से पच्चीस साल के उम्र के बच्चे एवं युवा हैं

एड्स से जुड़ी हुई भ्रांतियां

Misconceptions related to AIDS

डॉ रूबी बंसल ने कहा कि एड्स से जुड़ी हुई भ्रांतियों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। एड्स के बारे में समाज में कुछ मिथक भी लोगों के बीच देखे जाते रहे हैं। लेकिन ध्यान देने वाली बात ये है कि एड्स हाथ मिलाने, गले लगने, सामने छींकने, बिना कटी त्वचा को छूने या एक ही शौचालय के उपयोग करने पर कभी नहीं फैलता है।

एचआईवी के फैलने का मुख्य कारण

The main reason for the spread of HIV

डॉ विधि जैन ने बताया कि स्कूल के टीचर्स जैसे बच्चों के नाखून, यूनिफॉर्म आदि की जांच करते हैं, वैसे ही बच्चों की बाजुओं को भी चेक करके देखना चाहिए कि कही पंक्चर (छेद) के निशान तो नहीं, जिससे ये पता चल सके कि बच्चे ने ड्रग्स तो नहीं ली। प्रायः देखा गया है कि बच्चे एक ही सिरिंज से ड्रग्स ले लेते हैं जो कि एचआईवी के फैलने का एक बहुत ही खतरनाक एवं मुख्य कारण है।

डॉ विधि ने कहा कि यदि ऐसी कोई इंजरी हो जाए जिसमें एड्स के संक्रमण का ख़तरा हो, तो उस घाव को तुरंत साबुन एवं बहते पानी से अच्छी तरह से धो देना चाहिए, जिससे एचआईवी का वायरस बाहर ही मर जाता है।

डॉ रूबी बंसल ने बताया कि एआरटी विधि एवं नवीनतम दवाइयों से अब एड्स के मरीजों के एड्स बीमारी के चलते मृत्यु दर न के बराबर रह गयी है।

उन्होंने कहा कि अगर आप में किसी के आसपास कोई एचआईवी पॉजिटिव हो, तो उचित जाँच के साथ दवा का सेवन करें, और अपना और अपने साथी का खास ख्याल रखें। एड्स के साथ भी लम्बा जीवन जिया जा सकता है।

इस हेल्थ टॉक में मेवाड़ इंस्टिट्यूट, वसुंधरा, सन वैली स्कूल, वैशाली, सेंट मैरी स्कूल, साहिबाबाद के 100 से भी ज्यादा स्कूली बच्चे व् शिक्षक भी मौजूद थे।

Poster Competition on the occasion of World AIDS Day

विश्व एड्स दिवस के अवसर पर पोस्टर प्रतियोगिता भी आयोजित की गयी तथा चुने गए पोस्टरों को प्रदर्शित भी किया गया. इस अवसर पर यशोदा हॉस्पिटल के डॉ राहुल शुक्ला, श्रीमती राधा राणा, डॉ सुनील डागर, डॉ विधि जैन, डॉ प्रशांत, डॉ विक्रम ग्रोवर, डॉ अनुज अग्रवाल, डॉ विकास, गौरव पांडेय, सुरेश वली उपस्थित थे।

डॉ रूबी बंसल ने बताया कि यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशाम्बी, गाज़ियाबाद में सौ प्रतिशत स्टाफ को वर्कशॉप एवं ट्रेनिंग के माध्यम से एचआईवी एवं एड्स के प्रति जागरूक (Aware of HIV and AIDS) कर दिया गया है।

डॉ पी एन अरोड़ा जी युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ी को एड्स से बचाने के लिए ड्रग्स को पूरी तरह से नकार दें और अधिक से अधिक इसकी जानकारी फैलायें।

इस अवसर पर सन्देश देते हुए डॉ. अरोड़ा ने कहा कि हम स्टाफ को अपना एचआईवी टेस्ट कराने के लिए प्रेरित कर रहे हैं जो समाज के लिए एक उदाहरण बन सके एवं लोगों को स्वेच्छा से अपना एचआईवी टेस्ट कराने के लिए प्रेरित कर सकें।

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