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Former PM Dr. Manmohan Singh interacts with business community and media in Mumbai

अपनी अक्षमता के लिए विरोधियों को दोष देना मोदी सरकार की आदत बन गई है : मनमोहन सिंह

मुंबई, 17 अक्तूबर 2019 : वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (Former Prime Minister Manmohan Singh) ने कहा है कि मोदी सरकार की भेदभावपूर्ण नीतियों तथा अक्षमता के कारण देश आर्थिक मंदी (financial crisis) के संकट में फंस गया है जिसके चलते लोगों की उम्मीद धूमिल हुई हैं और उनका भविष्य अंधकारमय दिखायी देता है।

आज यहां एक कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने मुंबई में व्यापारिक समुदाय और मीडिया के साथ बातचीत करते हुए कहा  कि देश में मंदी के चलते ही चीन से आयात तेजी से बढ़ा है। इस अवधि में आयात 1.22 लाख करोड़ रुपए बढा है। देश में निवेश नहीं हो रहा है जिसके कारण रोजगार का संकट बढ रहा है और युवा कम पैसे में काम करने को मजबूर है। ग्रामीण क्षेत्रों में निराशा का माहौल और बेरोजगारी लोगों को भटकने के लिए मजबूर कर रही है।

उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में सुधार लाने की जरूरत है और इसके लिए सरकार को कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा

“मैंने अभी-अभी वित्तमंत्री निर्मला सीतारम का एक बयान देखा है, मैं उस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा, लेकिन मैं केवल यह बता सकता हूं कि अर्थव्यवस्था को ठीक करने के लिए बीमारियों और उनके कारणों का सही निदान करने की आवश्यकता होगी।”

डॉ. सिंह ने कहा कि इस मंदी का सबसे बुरा प्रभाव महाराष्ट्र में दिखायी दिया है। राज्य में पिछले पांच साल के दौरान सबसे अधिक फैक्ट्रियां बंद हुई हैं और चार साल से लगातार विनिर्माण की विकास दर घट रही है। रसायन एवं उर्वरक, इलेक्ट्रॉनिक सामान तथा आटोमोबाइल क्षेत्र में आयात 1.22 लाख करोड़ रुपए बढ़ा है। डबल इंजिन वाली सरकार का खूब प्रचार किया किया गया लेकिन महाराष्ट्र में यह डबल इंजन फेल साबित हुआ है।

उन्होंने कहा कि आज महाराष्ट्र के सामने बहुत सी समस्याएं हैं, जो मानव निर्मित हैं और समाधान उन नीतियों में निहित हैं, जो समावेशी और लोक कल्याणकारी हैं। महाराष्ट्र पेट्रोलियम उत्पादों पर सबसे अधिक वैट वसूलता है। अत्यधिक सरकारी उत्पाद शुल्क लगाने के मोदी सरकार के फैसले के साथ जोड़े गए उच्च वैट ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कम कीमतों के बावजूद लोगों को परेशान किया है।

डॉ. सिंह ने कहा कि पानी की कमी वाली स्थिति का अगर जल्द ही समाधान नहीं किया जाता है, तो स्थिति बदतर हो जाएगी। महाराष्ट्र के लोग पहले से ही पीने के साफ पानी की कम उपलब्धता से जूझ रहे हैं और सूखी नदी के तल खोदने का सहारा ले रहे हैं। निवेश आकर्षित करने में महाराष्ट्र पहले नंबर पर था था। आज, यह किसान आत्महत्याओं में अग्रणी है। कृषि आय दोगुनी करने के वादे के बावजूद, महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में संकट कम होने के आसार नहीं हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के दिनों में, महाराष्ट्र देश भर से प्रतिभाओं को आकर्षित करता था। आज, इस स्थिति में अवसरों की कमी है। शहरी क्षेत्रों में, हर तीसरा युवा बेरोजगार है। शिक्षित व्यक्ति बेरोजगारी की उच्च दर का सामना कर रहे हैं।

“मुझे भारत के सबसे बड़े ऑटो विनिर्माण केंद्र पुणे के ऑटो हब में फैली निराशा के बारे में बताया गया। इसी तरह की समस्याएं नासिक, औरंगाबाद, नागपुर और अमरावती को प्रभावित कर रही हैं, जो कभी सक्रिय औद्योगिक क्षेत्र थे।“

“महाराष्ट्र को गंभीर आर्थिक मंदी के कुछ बुरे प्रभावों का सामना करना पड़ा है। लगातार 4 वर्षों से महाराष्ट्र की विनिर्माण विकास दर घट रही है। पिछले 5 वर्षों में महाराष्ट्र सबसे अधिक फैक्ट्रियों के बंद होने का गवाह रहा है।“

Former PM Dr. Manmohan Singh interacts with business community and media in Mumbai. #DrSinghEconomyKing

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