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महानता के आख्यान के बीच अप्रिय स्वर – जल्द ही दूसरे एमजे अकबर हो सकते हैं हरिवंश

जल्द ही दूसरे एमजे अकबर हो सकते हैं हरिवंश

दिलीप खान

हे, हरिवंश! ओ हरिवंश!!

हरिवंश को मैं निजी तौर पर नहीं जानता और ना ही उनके साथ मेरी कोई फोटो है कि पोस्ट कर दूं. मेरा कोई इरादा नहीं था उन पर लिखने का, पर सुबह से लगभग पचासों लोगों द्वारा भूरि-भूरि प्रशंसा में डूबी पोस्ट देखने के बाद भीतर कुछ हुमचने लगा.

एक लाइन में कहूं तो लेखनी से मुझे वो हमेशा .. और सेटर लगे. प्रभात ख़बर जब निर्मल बाबा के ख़िलाफ़ कैंपेन चला रहा था तो हरिवंश उसी दौरान किसी दूसरे बाबा की महिमा में आधे-आधे पेज का लेख/संस्मरण/स्तुति लिखते कहे.

मार्कंडेय काट्जू ने बिहार में जाकर जब नीतीश कुमार द्वारा मीडिया पर नकेल कसने की बात कही तो जेडीयू ने काट्जू की दो-चार लाइन में आलोचना करके बात सलटा दी. लेकिन हरिवंश के पास पूरा अख़बार था. हरिवंश प्रधान संपादक थे. सो, उन्होंने पूरे दो पेज का काउंटर लेख लिख मारा. दो पेज के बहुत कम लेख मैंने अपनी ज़िंदगी में देखा है.

लेख में क्या था? लेख में नीतीश कुमार की भूरि-भूरि प्रशंसा थी और काट्जू की लानत-मलानत के ज़रिए ये साबित करने की कोशिश कि बिहार का मीडिया पूरी तरह स्वतंत्र है.

ठीक वैसे ही जैसे इस वक़्त अर्णब गोस्वामी देश के मीडिया को लेकर बोलता है. याद कीजिए ओपन पत्रिका ने उसी दौरान "एडिटर-इन-चीफ़ ऑफ़ बिहार" नाम से नीतीश की हरकतों पर शानदार और बहुचर्चित रिपोर्ट छापी थी. निठल्ले लोगों द्वारा तैयार प्रेस काउंसिल की रिपोर्ट ओपन की रिपोर्ट की फोटोकॉपी टाइप थी.

फिर, प्रभात ख़बर की मदर कंपनी ऊषा मार्टिन का नाम कोलगेट घोटाले में आया तो हरिवंश कितनी बार तत्कालीन कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल से मिलने गए वो डायरी एंट्री हमने देखी है. क्या करने गए थे? ज़ाहिर है …. करने.

सांसद के तौर पर उन्होंने एक भी उल्लेखनीय भाषण नहीं दिया. जेडीयू की तरफ़ से उनसे ज़्यादा तैयारी से हमेशा केसी त्यागी आते रहे.

जेडीयू और बीजेपी गठजोड़ के बाद जिस तरह बीजेपी ने इस मौक़े पर हरिवंश को चुना, उससे ये भी पता चलता है कि बीजेपी खेमे में भी उनकी अच्छी 'साख' है.

वो ऐसे ही चलते रहे, तो जल्द ही दूसरे एमजे अकबर हो सकते हैं. पर, गोबरा जाने के बावजूद एमजे अकबर उनसे बहुत ज़्यादा पढ़े-लिखे के तौर पर जाने जाते रहेंगे.

(दिलीप खान, युवा पत्रकार हैं। राज्यसभा टीवी में शोधार्थी रहे हैं। उनकी एफबी टिप्पणी का आंशिक संपादित अंश साभार )

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