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आखिर कब लौटेंगे गुलमर्ग की वादियों में अपने घर कश्मीरी पंडित (20 साल वनवास के )

आज सम्पूर्ण भारत में कश्मीर की समस्याओं को लेकर बहस जारी है। लेकिन कश्मीरी पंडितों के समस्याओ को लेकर न तो प्रशासन ही गंभीर है और न ही देश का बुद्धिजीवी वर्ग। वैसे कश्मीर व कश्मीर की समस्याओं के लिए हमारे देश का कथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग निरंतर प्रयास करता रहता हैं जिसका जीवंत उदाहरण अरुंधती राय जी का विचार व कश्मीर को अधिक स्वायत्तता देने की मांग करता हुआ जस्टिस सगीर अहमद की रिपोर्ट हैं। मगर इस प्रकार के बुद्धिजीवी वर्ग द्वारा कश्मीरी पंडितों के घर वापसी (Homecoming of Kashmiri Pandits) को लेकर न तो किसी प्रकार की मांग उठाई जाती है नहीं कोई संवेदना या प्रतिक्रिया ही सामने आती है। अगर कोई इस प्रकार का प्रयास करता भी है तो उसे सांप्रदायिक कहा जाता है।

भारत जहाँ भगवान् श्री राम को भी 14 वर्ष के वनवास के बाद घर वापसी का सौभाग्य प्राप्त हो गया था। उसी देश में कश्मीरी पंडितों को अपने घर कश्मीर को छोड़े हुए 20 वर्ष बीत गए लेकिन घर वापसी की राह अभी भी अंधकारमय है।

लगभग 7 लाख कश्मीरी परिवार भारत के विभिन्न हिस्सों व् रिफूजी कैम्प में शरणार्थियों की तरह जीवन बिताने को मजबूर हैं। लेकिन इनका दर्द लगता है शासन कर्ताओं को नज़र नहीं आता, शायद इसलिए इनके पुनर्वसन के लिए ठोस प्रयास नहीं किया जा रहा है। लेकिन इनकी उदारता तो देखिये अपने ही देश में शरणार्थियों की तरह जीवन व्यतीत करने के बाद भी भारत में इनकी आस्था कहीं से कमजोर नहीं हुई है। दूसरी तरफ अलगाववादी हैं जिन्हें सरकार के तरफ से हर सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, फिर भी वह भारत को अपना देश नहीं मानते और कश्मीर को भारत से अलग करने की साजिश रचते रहते हैं। इसके बाद भी वह कश्मीर में शान के साथ रहते है।

Kashmiri Pandits are not only angry with the government

कश्मीरी पंडितों को नाराजगी सिर्फ सरकार से नहीं है उनकी आंखें कुछ सवाल हमसे भी पूछती हैं कि क्या हमें भी उनका दर्द नहीं दिखाई देता ? अगर दिखता है तो हम मौन क्यों हैं, इन सवालों का जवाब अपने अन्दर खोजना होगा की कश्मीरी पंडितों को हमारी सद्भावना की नहीं हमारे प्रयासों की आवश्यकता है।

The beauty of Dal Lake and Gulmarg flowers is incomplete without Kashmiri Pandits.

डल झील व गुलमर्ग के फूलों की खूबसूरती बिना कश्मीरी पंडितों के अधूरी है। कश्मीर फिर से सही मान्ये धरती का स्वर्ग तभी बन पाएगा जब कश्मीरी पंडितों की सुरक्षित घर वापसी हो जाएगी और घाटी एक बार फिर कश्मीरी पंडितों के मन्त्र उचारण से गूँजने लगेगी…..

 

नवनीत

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