एक स्वयंसेवक ने खोला राज, वामपंथी कैसे भाजपा की मदद करते हैं !

वे संघी हैं, हमारे पड़ोसी हैं। भले ही बंद दिमाग वाले हैं, किंतु बिना स्वार्थ के, पहले जनसंघ का फिर जनता पार्टी का और अब भाजपा का झंडा उठाये घूमते रहते हैं! उनसे मैंने जब इस बंपर जीत का कारण पूछा तो बोले-

”हम कांग्रेस को या जो भी हमारे उम्मीदवार के सामने हो, उसे कमजोर कभी नहीं समझते! हम विपक्ष की तरह चुनाव के समय ही चुनाव नहीं लड़ते, बल्कि हम 24 घंटे, 365 दिन चुनावी मोड पर सक्रिय रहते हैं!”

सवाल- भाजपा के अलावा अन्य दल भी तो राष्ट्रवादी हैं, उनमें भी हिंदू हैं, फिर आप भाजपा और मोदी का ही समर्थन क्यों करते हैं?

उत्तर- हमारे लिये (आरएसएस के लिये ) मोदी या भाजपा महत्वपूर्ण नहीं हैं! संघ के साढ़े आठ करोड़ भाई बहिन भाजपा और मोदी के प्रति नहीं बल्कि अपनी मातृभूमि के प्रति समर्पित हैं! भाजपा और मोदी सिर्फ हमारे निमित्तमात्र हैं! जब तक वे हमारी लाइन पर चल रहे हैं, हम उन्हें जिताने की प्राणपण से चेष्टा करेंगे, किंतु जब लगेगा कि मोदी और भाजपा दोनों हिंदुत्व और राष्ट्रवाद को नुकसान पहुँचा रहे हैं, तो हम किसी दूसरे राजनैतिक विकल्प पर विचार करेंगे!

सवाल – आपको मालूम है कि मोदी जी गुजराती बनियों के दोस्त हैं और कुछ पूंजीपति घराने आप लोगों (संघ) की मेहनत का बेजा फायदा उठा रहे हैं?

उत्तर -वे उद्यमी अपनी मेहनत से पैसा कमाते हैं, टैक्स में बहुत बड़ी राशि सरकार को देते हैं, संघ को भी दक्षिणा मिलती है, भाजपा को पार्टी फंड मिलता है, जिससे संगठन चलाने में मदद मिलती है, उन धनी लोगों के सहयोग से ही तो हम चुनाव में विपक्ष को हरा पाते हैं!

सवाल – इन चुनावों में वामपंथ को तगड़ी हार का सामना करना पड़ा, आप जैसे पुराने संघी इस बारे में क्या सोचते हैं?

उत्तर- वामपंथी हमारे हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के सबसे बड़े गति अवरोधक हैं! वे बौद्धिक रूप से ताकतवर हैं, किंतु बंगाल, केरल में ही जब उनका कोई असर नहीं, तो हिंदीभाषी क्षेत्रों में हमें उनकी कोई फिक्र नहीं, किंतु जब वामपंथी हिंदू धर्म के रीति रिवाजों, परंपराओं पर हमला करते हैं तो सबरी माला की तरह हमारा काम आसान हो जाता है, हिंदू अपने आप हमारी तरफ आ जाते हैं और सिर्फ हिंदुओं पर हमला करके तो वामपंथी कभी आगे नहीं बढ़ पायेंगे! अब तो ‘संघ’ ने मजदूर किसानों के मजबूत संगठन बना लिये हैं, और धार्मिक आस्था का मजाक उड़ाने वाले वामपंथी जब अपनी जमानत नहीं बचा पाते तो क्रांति क्या खाक करेंगे? जय जय सियाराम!

श्रीराम तिवारी

(लेखक वामपंथी ट्रेड यूनियन लीडर हैं।)