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स्वच्छ भारत अभियान : 250किमी लंबे जम्मू पुंछ राजमार्ग पर सार्वजनिक शौचालय नहीं

मोहम्मद अनिस उर रहमान खान

“सीमांत शहर पुंछ की राजधानी जम्मू से पुंछ के बीच की दूरी लगभग 250 किलोमीटर है। इतने लंबे पहाड़ी रास्ते वाले यात्रा को छोटी गाड़ी जैसे टाटा सुमो, टवेरा इत्यादि से तय करने में छह-सात घंटे लगते हैं। और यात्रा बस से किया जाए तो नौ- दस घंटे लगते हैं। मगर अफसोस कि जम्मू से पुंछ के बीच एक भी सरकारी शौचालय नहीं है, जहां महिलाएं पर्दे में रहते हुए शौच को जाएं। पुरुष किसी पेड़ या बड़े पत्थरों की आड़ में शौच से मुक्त हो जाते हैं लेकिन महिलाओं और लड़कियों को परेशानी है।  मुझे लगता है कि हमारी मुख्यमंत्री एक महिला का दर्द बेहतर समझ सकती हैं”।

ये वाक्य हैं पुंछ शहर में रहने वाली 18 वर्षीय शहनाज बुखारी के, जो छात्र के साथ सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं।

   वो आगे कहती हैं "आपको पता होना चाहिए कि हमारे जिले की अधिकांश आबादी पहाड़ी गांव में बस्ती हैं जहां आने के लिए किसी क्षेत्र में रोड है तो कार नहीं और कार है तो किराया देने के पैसे नहीं। कई किलोमीटर दूर से महिलाएं पुंछ शहर आती हैं परंतु बस स्टैंड में शौचालय की व्यवस्था नहीं है। सीमा क्षेत्र होने के कारण अधिकतर विकलांग हैं। ऐसे रोगियों में महिलाएं भी होती हैं और उन्हें जब जम्मू ले जाया जाता है तो उनके लिए रास्ते में शौच का प्रबंध नहीं होता। क्या यह एक राष्ट्रीय समस्या नहीं है? क्या इस ओर तत्काल ध्यान देने की जरूरत नहीं है? "

इस समस्या के बारे जम्मू विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में एम-ए कर रहे छात्र और ग्रामीण लेखक सैयद अनीस उल-हक बुखारी अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहते हैं "पढ़ाई के सिलसिले में जम्मू से पुंछ आना-जाना होता है। परंतु रास्ते में सार्वजनिक शौचालय न होने के कारण परेशानीयों का सामना करना पड़ता है। कई बार शौच के लिए बस ड्राइवर सड़क किनारे गाड़ी खड़ी कर देते हैं, पुरुष किसी कोने में शौच से मुक्त हो जाते हैं लेकिन महिलाओं को घर पहुँचने की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। हालांकि केंद्र सरकार सहित राज्य सरकार भी खुले में शौच के सख्त खिलाफ है, लेकिन यात्रा के दौरान शौचालय की उचित व्यवस्था नही होना बड़ी समस्या है”।

पुंछ जिला मुख्यालय से दस किलोमीटर पर स्थित खनैतर गांव के निवासी मोहम्मद अज़ीज़ चौहान के अनुसार “पहाड़ी क्षेत्रो की लंबी यात्रा में कम से कम तीन चार स्थानों पर सार्वजनिक शौचालय होना जरूरी है, ताकि वाहन उसी स्थान पर रुके और यात्रीयों को शौच की सुविधा मिल सके। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए”।

"जम्मू विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहे राजा हरीश कुमार अपनी बात रखते हुए कहते हैं कि “इस रास्ते में चलने वाली गाड़ियों में पुरुष और महिलाएं दोनो होती हैं। शौच के लिए लोग परेशान रहते हैं।  हम सरकार को टैक्स अदा करते हैं इसलिए सरकार की जिम्मेदारी है कि हमे बेहतर सुविधा न सही कम से कम आवश्यक और बुनियादी सुविधाएं तो उपलब्ध कराए”।

22 वर्षीय शाहनवाज बताते हैं

"जम्मू पुंछ राजमार्ग पर एक भी सरकारी शौचालय नहीं है, हर दस किलोमीटर पर एक सरकारी शौचालय होना चाहिए और महिलाओं के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था होनी चाहिए। हां सिर्फ शौचालय बना देना भी काफी नहीं है बल्कि उसकी नियमित साफ सफाई की जिम्मेदारी भी सरकार को लेनी चाहिए"।

जिला पुंछ के अंतर्गत आने वाले सुरनकोट के विधायक चौधरी मोहम्मद अकरम साहब से जब इस बारे में फोन पर बात की गई तो उन्होंने कहा कि

"यह एक बड़ी समस्या है। मैं पूरी तरह से आपकी बात से सहमत हूँ। केंद्र सरकार स्वच्छ भारत अभियान ज़रूर चला रहा है लेकिन इस गंभीर समस्या पर जल्दी ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि यह केंद्र सरकार के अंतर्गत आता है। अभी मैं एक शोक समारोह में आया हूँ ज्यादा बात करना संभव नहीं है"।

हवेली के विधायक शाह मोहम्मद तान्तरे कहते हैं

“इस समस्या को उजागर करने के लिए आप बधाई के पात्र हैं । इसमें कोई शक नहीं कि सात आठ घंटे की यात्रा में शौचालय होना चाहिए बल्कि मैं तो कहता हूँ कि हर 45 मिनट की दूरी पर एक शौचालय होना ही चाहिए। 8 मार्च को महिला दिवस मनाया गया लेकिन इस राजमार्ग पर महिलाओं के लिए एक भी शौचालय न होना अफसोस की बात है। "

मेंढर के विधायक बी जावेद राणा साहब से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कहा "अभी मीटिंग में व्यस्त हूँ आधे घंटे बाद फोन करें"। बाद में फोन किया गया तो उनके सहयोगी मोहम्मद शब्बीर से बात हुई जिन्होंने बताया कि वो इस समय व्यस्त हैं कारणवश इस समस्या पर उनका नजरिया सामने न आ सका।

मेंढर के रहने वाले हामिद शाह हाश्मी जो जम्मू विश्वविद्यालय से लॉ की पढ़ाई कर रहे हैं वे दो मामलों का उदाहरण देते हुए बताते हैं "मेनका गांधी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने धारा 21 (जो हमें जीवन जीने का अधिकार देता है) का नया नजरिया पेश करते हुए कहा कि जीवन जीने का अधिकार केवल शारीरिक रूप से ही नहीं है बल्कि इस क्षेत्र में मानव गरिमा के साथ जीवन बिताना शामिल है। इसी प्रकार फ्रांसिस कोरली बनाम यूनियन टेरेटरी दिल्ली का फैसला करते समय धारा 21 की व्याख्या करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि "जीवन जीने का अधिकार और मनुष्य की गरिमा" की जिम्मेदारी सरकार पर लागू होती है। इससे मालूम होता है कि दोनों पहाड़ी जिलों राजौरी और पुंछ के लाखों लोगों के मानव गरिमा का हनन हो रहा है। "

युवा सामाजिक कार्यकर्ता वसीम बुखारी के अनुसार

“पुंछ जम्मू राजमार्ग  227 किमी लंबा है।  शौचालय नही होना बड़ी समस्या तो है ही  पहाड़ी रास्ता के कारण जमीन का खिसकना आम बात है। यही कारण है कि यह यात्रा घंटों में तय होती है। सरकार को इस ओर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।“

सवाल यह उठता है कि एक तरफ जनता खुले में शौच करने को बुरा समझते हुए भी मजबूर हैं और दूसरी ओर सरकार बड़े पैमाने पर खुले में शौच को रोकने की कोशिश में करोड़ों रुपये विज्ञापन पर खर्च कर रही है। तो क्या कारण है कि उक्त राजमार्ग पर शौचालय निर्माण नहीं हो पा रहा है ??? सीमा क्षेत्र की जनता समझ नही पा रही है कि केंद्र औऱ राज्य में एक ही पार्टी की सरकार होने के बावजुद शौचालय के संबध में महिलाओं की सुविधाओं की अनदेखी क्यों हो रही है?

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