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भारतीय पत्रकारिता का एक और मजबूत स्तंभ, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पहरुआ आज ढह गया

भारतीय पत्रकारिता का एक और मजबूत स्तंभ, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पहरुआ आज ढह गया

जयशंकर गुप्ता

वरिष्ठ और बुजुर्ग पत्रकार कुलदीप नैयर के निधन के बाद भारतीय पत्रकारिता का एक और मजबूत स्तंभ, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पहरुआ आज ढह गया। सादर नमन। उम्र के 95 साल पूरा करनेवाले नैयर साहब से अभी चंद रोज पहले ही 11 अगस्त को उनके निवास पर न्यूज वेबसाइट 'द्रोहकाल' को जारी करने के अवसर पर मिले थे।

वेबसाइट जारी करते समय वह पूरी तरह से सक्रिय और जीवंत लग रहे थे। देर तक उन्होंने देश और समाज, राजनीति और पत्रकारिता से जुड़े सवालों पर चर्चा करते रहे। हम लोग उनके उम्र का शतक लगाने की उम्मीद पाले उनसे इस तरह से बातें कर रहे थे जैसे हम दोस्त आपस में बातें करते हैं। उनके निधन से हम जैसों के लिए संकट की घड़ी में एक बड़ा सहारा नहीं रहा। भारतीय पत्रकारिता के शलाका पुरुष, जन समस्याओं-सरोकारों तथा संघर्षों के साथी प्रवक्ता रहे नैयर साहब को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि।

वरिष्ठ पत्रकार जयशंकर गुप्ता, देशबन्धु के कार्यकारी संपादक हैं।

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