बेहद खतरनाक होता है विचार शून्य वाम

जगदीश्वर चतुर्वेदी

अपने विरोधी के प्रति बहिष्कारवाद के मामले में वाम और संघी एक ही पथ के राही हैं।

वाम युवा इस कदर वाम विचारधारा शून्य है कि उसके पास निष्ठा के अलावा कोई विचार नहीं होता, वे अपनी पार्टी के प्रकाशनों, अखबारों,पत्रिका आदि को भी ठीक से नहीं नियमित नहीं पढ़ते, विचार शून्य वाम बेहद खतरनाक होता है। यह विचार शून्यता जेएनयूसे लेकर बंगाल तक, केरल से लेकर त्रिपुरा तक सहज ही देखी जा सकती है।

वाम का फंडा है बताएंगे हम लड़ेंगे वे। क्रांतिकारी वाम लेकिन मोदी को पछाड़ेंगे राहुल गांधी!

वाम के कठमुल्ले फेसबुक से लेकर सामाजिक जीवन तक जिस रूप में लिख-पढ रहे हैं उससे सिर्फ जड़ता और भारतीय यथार्थ के अज्ञान के दर्शन हो रहे हैं। माकपा-भाकपा के फेसबुक पर सक्रिय लोगों को कम से कम देश की समस्याओं पर लिखते रहना चाहिए। वे फेसबुक पर हैं लेकिन लिखते कम हैं।जो लिखते हैं उसमें पार्टी कार्यक्रम के बाहर लिखने की कोशिशें न्यूनतम नजर आती हैं।

पता नहीं क्यों वामपंथियों के कदम डगमगाते रहते हैं!!

बंगाल में जो बुद्धिजीवीवर्ग माकपा के साथ था वो ममता भक्त कैसे हो गया?

वाम युवा और संघी युवा में अद्भुत साम्य है दोनों कम से कम पढ़ते हैं।

वाम के युवा जुझारू विचारों के प्रचारक फेसबुक आदि पर सक्रिय क्यों नहीं हैं, फेसबुक पर जितने नाम दिखते हैं वे सब साठोत्तरी हैं।