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हार गया भई हार गया, हिटलर का बेटा हार गया

Lost, lost, hitler’s son lost

हार गया भई हार गया, हिटलर का बेटा हार गया

-पुष्पराज

हल्ला- बोल, हल्ला -बोल बोल रे साथी हल्ला बोल
हल्ला -बोल, हल्ला -बोल फासीवाद पर हल्ला बोल
हल्ला- बोल ,हल्ला -बोल ,नाजीवाद पर हल्ला -बोल
बोल रे साथी हल्ला -बोल ,गद्दारों पर हल्ला बोल
हल्ला -बोल ,हल्ला -बोल ,दंगाई पर हल्ला -बोल।
हार गया भई हार गया ,फासीवादी हार गया
हार गया भई हार गया ,जुल्मी -कातिल हार गया
हार गया भई हार गया ,हिटलर का बेटा हार गया
हार गया भई हार गया,देश का दुश्मन हार गया।
जीत गया भई ,जीत गया भारत अपना जीत गया
जीत गया भई जीत गया ,गंगा -यमुनी जीत गया
जीत गया भई जीत गया ,काशी -काबा जीत गया।
जीत हुई भई जीत हुई ,गरीब -गुरबा की जीत हुई
जीत हुई भई जीत हुई,शोषित -जन की जीत हुई
जीत हुई भई जीत हुई जन -जनगण की जीत हुई
जीत हुई भई जीत हुई,हर मेहनतकश की जीत हुई
जीत हुई भई जीत हुई,मानवता की जीत हुई।
जीत गया भई ,जीत गया भारत का लेखक जीत गया
जीत गया भई, जीत गया,सेक्यूलर -भारत जीत गया
जीत गया भई, जीत गया भारत का लेखक जीत गया ।
जीत गए भई जीत गए, कलबुर्गी साहब जीत गए
जीत गए भई जीत गए, पनसारे जी जीत गए
जीत गए भई जीत गए, दाभोलकर जी जीत गए।
जीत गए भई जीत गए, उदय -प्रकाश जी जीत गए
जीत गयी भई जीत गयी, नयनतारा जी जीत गयी।
जीत गए भई जीत गए, इरफ़ान-हवीब भी जीत गए।
जीत गए भई जीत गए, आनंद-पटवर्धन जीत गए
जीत गए भई जीत गए, मैनेजर पाण्डेय जीत गए
जीत गए भई जीत गए, कॉमरेड मुरली जीत गए।
भिखारी ठाकुर जीत गए, कर्पूरी ठाकुर जीत गए
नागार्जुन बाबा जीत गए, रेणु चच्चा जीत गए।
जीत गया भाई जीत गया, पटना में नाटक जीत गया
नाटक के साथी जीत गए, पटना रिपब्लिक जीत गया।

(8 नवम्बर 2015 को बिहार -विजय जिसे भारत विजय की तरह देखा जा रहा है, विजय -उत्स में थिरकते पाटलिपुत्र के मौर्या -लोक के खुले आकाश में स्थित पटना -रिपब्लिक में की गयी है, इसलिए पटना -रिपब्लिक का काल्पनिक -ढांचा इस कविता के केंद्र में मौजूद है। )

About the author

पुष्पराज, लेखक “नन्दीग्राम की डायरी” के लेखक हैं
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